भारत के पहले निजी रॉकेट विक्रम-1 की उड़ान, स्पेस सेक्टर में नई शुरुआत, जानिए पूरी कहानी

श्रीहरिकोटा

भारत का पहला प्राइवेट रॉकेट 'विक्रम-1' शनिवार को सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से देश के पहले प्राइवेट रॉकेट ने तकनीकी पेलोड और विशेष पोस्टकार्ड के साथ उड़ान भरी. यह रॉकेट 450 किलोमीटर तक पृथ्वी की निचली कक्षा तक जाएगा. भारत के लिए ये किसी ऐतिहासिक उपलब्धि से कम नहीं है. देश में पहली बार कोई प्राइवेट रॉकेट लॉन्च हुआ है. इस खास मौके पर इसरो के वैज्ञानिक भी मौजूद रहे. लॉन्चिंग से पहले पीएम मोदी ने भी बधाई दी. इस लॉन्चिंग को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया है. जिसके लिए पहले से तैयारियां जोर शोर से चल रही थीं। 

इस बीच केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट, विक्रम-1 के लॉन्च का लाइव प्रसारण देखा। 

विक्रम-1 की खास बातें

  •     विक्रम-1 भारत का पहला कमर्शियल लॉन्च व्हीकल 
  •     रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष प्रोग्राम के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम-1 रखा 
  •     विक्रम-1 सैटेलाइट को 'लो अर्थ ऑर्बिट' में ले जाने के लिए डिजाइन किया गया 

स्काईरूट एयरोस्पेस कंपनी ने 18 नवंबर, 2022 को विक्रम-S नाम का एक सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था. यह पृथ्वी की सतह से 301.4 सेकंड की दूरी तय कर 88.8 किमी. की ऊंचाई पर 'लो अर्थ ऑर्बिट' में पहुंचा. इस टेस्ट रॉकेट की सफलता के बाद तीन साल में ही विक्रम-1 बना लिया गया। 

विक्रम-1 के बारे में जानें

  •      विक्रम-1 रॉकेट 24 मीटर लंबा
  •     पूरी तरह हल्के कार्बन कॉम्पोजिट ढांचे से तैयार 
  •     तीन सॉल‍िड फ्यूल स्‍टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल से ऑपरेट 
  •     लगभग 350 किलो तक के पेलोड को 450 किमी. की पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करने की क्षमता
  •     लैब में तैयार ‘डायमंड लोटस' भी पेलोड के रूप में भेजा गया
  •      भविष्य के वाणिज्यिक प्रक्षेपणों का मार्ग प्रशस्त 
  •     पीएम मोदी का स्पेशल मैसेज भी साथ लेकर गया

विक्रम-1 लॉन्च करने की वजह क्या?
इसे अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स की शुरुआत माना जा रहा है. विक्रम-1 की लॉन्चिंग देश के सरकारी स्पेस मिशन से इंडस्ट्री-लेड स्पेस मिशन की ओर बढ़ने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है. दरअसल केंद्र ने साल 2023 में भारतीय अंतरिक्ष नीति जारी की थी. 2024 से भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में 100 प्रतिशत फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट की परमिशन दी गई थी. केंद्र सरकार के मुताबिक, पिछले एक दशक में अंतरिक्ष क्षेत्र में 300 से ज्यादा स्टार्टअप शुरू हुए हैं। 

ऑर्बिटल रॉकेट क्यों है खास?
सब-ऑर्बिटल और ऑर्बिटल रॉकेट में बड़ा फर्क होता है. सब-ऑर्बिटल रॉकेट अंतरिक्ष तक जाकर वापस आ जाता है. लेकिन ऑर्बिटल रॉकेट सैटेलाइट को इतनी तेज रफ्तार देता है कि वह पृथ्वी की ऑर्बिट में घूमता रहता है. अगर विक्रम-1 सफल रहा, तो पहली बार किसी भारतीय प्राइवेट कंपनी का रॉकेट यह काम करेगा। 

कैसा है विक्रम-1 रॉकेट?
विक्रम-1 चार चरणों वाला रॉकेट है. इसके पहले तीन चरणों में ठोस ईंधन का इस्तेमाल किया गया है. चौथे चरण में लिक्विड फ्यूल इंजन लगा है, जिसे जरूरत पड़ने पर दोबारा चालू किया जा सकता है. इससे सैटेलाइट को उसकी तय ऑर्बिट में ज्यादा सही जगह पर पहुंचाने में मदद मिलती है. यह रॉकेट खास तौर पर छोटे सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए बनाया गया है। 

स्काईरूट की शुरुआत कैसे हुई?
स्काईरूट एरोस्पेस की शुरुआत 2018 में इसरो के पूर्व इंजीनियर पवन कुमार चंदाना और नागा भरत डाका ने की थी. 2020 में स्पेस सेक्टर खुलने के बाद कंपनी ने ऑर्बिटल रॉकेट बनाने पर तेजी से काम किया. अब विक्रम-1 उसी सफर का सबसे बड़ा पड़ाव है। 

अगर यह मिशन सफल रहता है, तो भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर को बड़ी मजबूती मिलेगी और भविष्य में देश से ज्यादा कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च किए जा सकेंगे. इस लॉन्च पर पूरे देश की नजर है, क्योंकि यह भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर की अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। 

विक्रम-1 लॉन्चिंग के लिए कितने समय में हुआ तैयार?
भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 को तैयार करने में लंबा समय लगा. इसे 1,000 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम ने कड़ी मेहनत के बाद कई महीनों में तैयार किया. जिसके बाद अब इसकी लॉन्चिंग हुई है. यह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में अपनी कक्षा में स्थापित हो गया है। 

देश के पहले प्राइवेट रॉकेट विक्रम-1 की खास बातें

    'विक्रम-1' भारत का पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट है।

    इसे सैटेलाइट को ऑर्बिट में पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।

    विक्रम-1 के ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल को पूरी तरह से 3डी-प्रिंटेड लिक्विड इंजन से पावर मिलती है।

    यह पहली बार है जब किसी भारतीय ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल में इस तरह के इंजन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    मिशन 'आगमन' नाम से इसका प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी-एसएचएआर) के फर्स्ट लॉन्चिंग पैड से की गई।

    विक्रम-1 की इस परीक्षण उड़ान के साथ ही भारत वैश्विक निजी कक्षीय प्रक्षेपण बाजार में प्रवेश कर गया है।

    पूरी तरह एक भारतीय निजी कंपनी की ओर से विकसित विक्रम-1 देश का पहला निजी निर्मित कक्षीय प्रक्षेपण यान है।

    इसे भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पीएम मोदी का हाथ से लिखा 'वंदे मातरम' पोस्टकार्ड ले जाएगा

    मिशन 'आगमन' का विक्रम-एस सबऑर्बिटल रॉकेट के सफल प्रक्षेपण के बाद स्काईरूट एयरोस्पेस का दूसरा अंतरिक्ष मिशन है।

    इस मिशन के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तलिखित 'वंदे मातरम' संदेश वाला एक पोस्टकार्ड भी विक्रम-1 प्रक्षेपण यान के साथ भेजा गया है।

    स्काईरूट एयरोस्पेस के अनुसार, प्रधानमंत्री का यह हाथों से लिखित संदेश परीक्षण उड़ान में शामिल विशेष पेलोडों में से एक होगा।

    कंपनी ने बताया कि मिशन में स्काईरूट टीम के सदस्यों, निवेशकों, नीति-निर्माताओं और दुनिया भर के शुभचिंतकों के हस्तलिखित संदेश भी शामिल किए गए हैं।

    कंपनी ने इसे कई हाथों से मनाया गया और लाखों लोगों की ओर से साझा किया गया एक उत्सव बताते हुए कहा कि ये स्मृति-चिह्न भारत के उभरते प्राइवेट स्पेस इकोसिस्टम के प्रति सामूहिक समर्थन और आकांक्षाओं का प्रतीक हैं।

    कंपनी के अनुसार, ये प्रतीकात्मक पेलोड उस साझा दृष्टि और सहयोगात्मक प्रयासों को भी दर्शाते हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष अन्वेषण और नवाचार के क्षेत्र में भारत के नए दौर को आकार देने में योगदान दिया है।

पीएम मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस को दी शुभकामनाएं
स्काईरूट एयरोस्पेस ने कहा कि विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों की तकनीकी क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेगा और वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक नया ऐतिहासिक अध्याय। उन्होंने देशवासियों, खासकर युवाओं से आग्रह किया कि इस ऐतिहासिक मिशन को देखें और 'इंडिया विद विक्रम-1' का उपयोग करते हुए टीम स्काईरूट को अपनी शुभकामनाएं दें।

कब और किसने की स्काईरूट की शुरुआत?
स्काईरूट की शुरुआत  2018 में हुई. कंपनी के फाउंडर पवन चंदाना और नागा भरत डाका हैं. ये दोनों ISRO के पूर्व वैज्ञानिक हैं. अपना बिजनेस शुरू करने के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने नेशनल स्पेस प्रोग्राम में अपनी सुरक्षित और प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ दी. एक रॉकेट कंपनी बनाने के लिए फंड जुटाने, कुशल इंजीनियरिंग टीमें बनाने, नई टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए ग्राहकों को यह भरोसा दिलाने की जरूरत थी कि एक भारतीय स्टार्टअप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर सकता है। 

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