धरती पर बढ़ेगा आग जैसा तापमान, सुपर अल नीनो से भारत पर बड़ा संकट

नई दिल्ली

एक बात ये कि इस साल गर्मी ज्यादा पड़ेगी क्योंकि ‘एल नीन्यो’ असर डालेगा. ये शायद आपने सुना हो, लेकिन अब तो कह रहे हैं कि इस साल का ‘एल नीन्यो’, ‘सुपर एल नीन्यो’ होने वाला है यानी गर्मी के सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं. तो ये सुपर एल नीन्यो क्या बला है? ज्यादातर पब्लिक तो ये भी नहीं समझती कि एल नीन्यो क्या होता है? पहले तो वही समझ लेना चाहिए, उसके बाद समझेंगे कि सुपर एल नीन्यो क्या होता है. तो एल नीन्यो स्पेनिश भाषा में छोटे बच्चे को कहते हैं. छोटे लड़के को या बालक. जी हां, ये बालक कुछ सालों में लौट कर आता रहता है और भारत में गर्मी बढ़ा जाता है. तो स्पैनिश में नाम क्यों है? स्पेन का हमारी गर्मी से क्या लेना-देना? तो वैसे तो स्पेन का एल नीन्यो से भी कोई लेना-देना नहीं है। 

ये नाम एल नीन्यो इसलिए स्पेन की भाषा में है क्योंकि दक्षिण अमेरिका के ज्यादातर देशों पर स्पेन का राज हुआ करता था. जैसे भारत में अंग्रेजों का राज हुआ करता था, तो यहां अंग्रेजी भाषा उनके साथ आई, लेकिन भारत में पहले से लोग रहते थे और हमारी अपनी भाषाएं भी थीं. लेकिन दक्षिण अमेरिका के बड़े से महाद्वीप पर बहुत ज्यादा आबादी नहीं थी. सारा जंगल था. कुछ मूल निवासी वहां के रहा करते थे. तो स्पेन और पुर्तगाल जैसे यूरोप के देशों के लोग वहां गए और बस गए और राज किया तो उनकी भाषाएं दक्षिण अमेरिका की भी भाषाएं हो गईं। 

अभी से दिखने लगा है एल नीन्यो का असर.
नामकरण जान लेते हैं

जैसे ब्राजील में पुर्तगाल की भाषा बोली जाती है. लेकिन बाकी दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के ज़्यादातर देशों में स्पेन की भाषा स्पैनिश बोली जाती है और स्पैनिश में छोटे लड़के को कहते हैं एल नीन्यो. ये नाम दिया गया है मौसम के एक बदलाव को. जो हर कुछ साल में वहां दक्षिण अमेरिका के पूर्व के हिस्से में होता है. अब समझने वाली बात ये है कि ये छोटा बालक अगर दक्षिण अमेरिका के पानी में उथल-पुथल मचाता है, तो भारत में गर्मी क्यों बढ़ जाती है?

नक्शे से समझिए एल नीन्यो की ज्योग्राफी
तो जरा नक्शा देख लेते हैं. एक तो नक्शा हमें ऐसे देखने की आदत है, जिसमें उत्तर और दक्षिण अमेरिका बाईं तरफ होते हैं यानी पश्चिम में और ऑस्ट्रेलिया और जापान दाईं तरफ होते हैं यानी पूर्व में. स्कूल से ऐसे ही देखते आ रहे हैं और इस नक्शे में दक्षिण अमेरिका भारत के पश्चिम में होता है. लेकिन, दुनिया तो गोल है. तो नक्शे को अगर ऐसे खींचे पूर्व की तरफ से तो ऑस्ट्रेलिया के और आगे जाने पर क्या आएगा? दक्षिण अमेरिका ही आ जाएगा. और दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के बीच में है साउथ पैसिफिक ओशियन या दक्षिण प्रशांत महासागर. यानी दाहिनी तरफ पूर्व में दक्षिण अमेरिका का किनारा है – पेरू और एक्वाडोर जैसे देश. बाईं तरफ यानी पश्चिम में एशिया और ऑस्ट्रेलिया है. अब भारत इस नक्शे पर बाईं तरफ है यानी पश्चिम में, प्रशांत से काफी दूर, हिंद महासागर के पास। 

एल नीन्यो क्यों बनता है?
सामान्य दिनों में क्या होता है कि प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से यानी दक्षिण अमेरिका के पास का पानी ठंडा रहता है. वहां ठंडा पानी ऊपर आता रहता है. जबकि पश्चिमी हिस्से यानी इंडोनेशिया और फिलीपींस के पास का पानी बहुत गर्म रहता है. हवाएं चलती है पूर्व से पश्चिम की तरफ यानी दक्षिण अमेरिका से एशिया की चरफ. इन हवाओं को कहते हैं ट्रेड विंड्स. ये हवाएं गर्म पानी को पश्चिम की तरफ धकेलती रहती हैं. यानी दक्षिण अमेरिका से एशिया वाली साइड पर गर्म पानी धकेलती रहती हैं. इस वजह से पूर्व में ठंडा पानी ऊपर आता रहता है, यानी प्रशांत महासागर में दक्षिण अमेरिका की तरफ ठंडा पानी ऊपर आता रहता है और गर्म पानी एशिया की तरफ जाता रहता है. लेकिन हर 2 से 7 साल में कभी-कभी ट्रेड विंड्स यानी ये वाली हलाएं कमजोर पड़ जाती हैं. इसको कहते हैं एल नीन्यो। 

…फिर भारत में नहीं होती है बारिश
जैसे किसी ने हवा का स्विच ऑफ कर दिया हो. तो वो गर्म पानी जो पश्चिम में जमा था, एशिया की तरफ जमा था वो अब पूर्व की तरफ यानी दक्षिण अमेरिका की ओर बहने लगता है. यानी पूरे प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है. 0.5 डिग्री या उससे भी ज्यादा गर्म हो जाता है. इससे क्या होता है कि समुद्र के ऊपर की हवा गर्म हो जाती है. गर्म हवा ऊपर उठती है, बादल बनते हैं, बारिश होती है. लेकिन ये सब वहीं दक्षिण अमेरिका के पास हो जाता है, क्योंकि हवाएं इस तरफ़ चल ही नहीं रही होतीं तो बादल एशिया की तरफ आते ही नहीं वो वहीं पर बरस जाते हैं. दक्षिण अमेरिका में बारिश ही बारिश हो जाती है। 

कैसे प्रभावित होता है भारत का मौसम?
अब भारत पर आइए. हमारा मॉनसून पश्चिम की तरफ से आता है. मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम हवाओं से आता है. मतलब अरब सागर और हिंद महासागर के ऊपर से हवाएं आती हैं समुद्र के पाली की नमी लेकर. और जून से सितंबर तक भारी बारिश लाती हैं. एल नीन्यो होने प्रशांत महासागर में गर्म पानी की वजह से ये हवा का पूरा पैटर्न बदल जाता है. वो हवाएं जो भारत की तरफ नम हवा लाती हैं, वे कमजोर पड़ जाती हैं या रास्ता बदल लेती हैं. तो भारत के ऊपर भी बादल कम बनते हैं. आसमान ज़्यादातर साफ रहता है. अप्रैल, मई, जून के महीनों में सूरज की किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं. कोई बादल छांव नहीं देता. जमीन तेजी से गर्म होती है. खासकर उत्तर भारत, मध्य भारत, राजस्थान, दिल्ली, यूपी, मध्य प्रदेश आदि इलाकों में। 

2 साल पहले भी हुई थी घटना
2023 में भी जब एल नीन्यो मजबूत था, तो भारत के कई शहरों में तापमान 45-48 डिग्री तक पहुंच गया था. मानसून कमजोर रहा, बारिश कम हुई, और गर्मी लंबी खिंच गई थी. यानी दूर प्रशांत महासागर में पानी गर्म होने से हवा की एक लंबी चेन चलती है जो हजारों किलोमीटर दूर भारत तक असर करती है। 

इस साल सुपर एल नीन्यो
अब इस साल क्या हो रहा है? एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि एल नीन्यो इस साल छोटा बच्चा नहीं रहेगा. ये सुपर एल नीन्यो हो सकता है. क्योंकि प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का पानी बहुत तेजी से गर्म हो रहा है. मध्य प्रशांत महासागर में तो साप्ताहिक तापमान पहले ही +0.9 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया है. पानी की ऊपरी सतह के नीचे भी बहुत गर्म पानी जमा हो गया है और 6 महीने से लगातार बढ़ रहा है. सुपर एल नीन्यो मतलब जब मध्य प्रशांत महासागर में पानी 2 डिग्री या उससे ज्यादा गर्म हो जाए. +0.9 डिग्री तो अभी से हो चुका है. लेकिन 2 डिग्री तक हो गया तो ऐसा 1950 के बाद कुछ ही बार हुआ है. 1982 में हुआ था, 1997 में हुआ था, 2015 में हुआ था. और इस साल इसलिए डर है क्योंकि प्रशांत महासागर में पानी बहुत तेजी से गर्म हो रहा है। 

भट्टी बन जाएगी धरती
धरती के पानी के नीचे बहुत ज्यादा गर्म पानी का बड़ा भंडार बन गया है. ये ऊपर आ रहा है और हवा के साथ मिलकर हवा को और गर्म कर रहा है. पूरी पृथ्वी पहले से ही ग्लोबल वॉर्मिंग से गर्म हो रही है. इसलिए जब एल नीन्यो आता है, तो उसका असर और तेज हो जाता है. कुछ विशेषज्ञ कह रहे हैं कि इस साल वाला 150 साल में सबसे मजबूत एल नीन्यो हो सकता है. अगर इस साल का एल नीन्यो, सुपर एल नीन्यो बन गया तो मॉनसून और भी कमजोर हो सकता है यानी बहुत कम बारिश हो सकती है, सूखा पड़ सकता है. गर्मी और हीटवेव की लहरें और लंबी और तेज चलेंगी. और उत्तर भारत पर, मध्य भारत पर और पश्चिम भारत पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा ऐसा हुआ तो. तो छोटे मियां तो छोटे मियां, सुपर एल नीन्यो अगर हो गया तो भट्टी बन जाएगी धरती। 

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