सुष्मिता देव ने क्यों कहा ‘संघ परिवार बेहतर’? BJP में शामिल होने के बाद खोले कई राजनीतिक राज

नई दिल्ली

तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुई राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पहली बार खुलकर कहा है कि संघ परिवार गांधी फैमिली से बेहतर और ज्यादा लोकतांत्रिक है। दशकों तक कांग्रेस और पांच साल टीएमसी से जुड़ी रहीं देव ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' से बातचीत में अपनी राजनीतिक यात्रा, पुरानी पार्टियों से मोहभंग और भाजपा चुनने के कारणों पर विस्तार से बात की। इस दौरान उन्होंने नीट पेपर लीक विवाद, छात्र विरोध प्रदर्शनों पर सरकार के रवैये, संसद में भाषा के इस्तेमाल और आरएसएस की भूमिका पर भी अपने विचार रखे।
तीन पार्टियों का अनुभव और वैचारिक अंतर

सुष्मिता देव ने बताया कि उन्होंने अपना राजनीतिक करियर छात्र राजनीति से शुरू किया था। वे कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई से जुड़ी थीं और 2021 में कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से तृणमूल में जाना कोई वैचारिक बदलाव नहीं था। ममता दीदी खुद कांग्रेस से निकलीं और यह पार्टी बनाई। लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हो गया कि बंगाल में या देश के किसी भी हिस्से में तृणमूल का वोट शेयर वैचारिक नहीं, बल्कि पूरी तरह नेता-केंद्रित है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस का एक वैचारिक आधार है। अगर किसी को भाजपा पसंद नहीं है, तो वह कांग्रेस को वोट देता है। वहीं भाजपा का वोट पूरी तरह वैचारिक है। उन्होंने कहा कि जब उनके दो सांसद थे या जब उनके पास कोई सांसद नहीं था, और आज जब वे सत्ता पक्ष में हैं, उन्होंने कभी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया।
नेतृत्व और आंतरिक लोकतंत्र

पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के बारे में बोलते हुए देव ने कहा कि कांग्रेस हर चुनाव के बाद कई समीक्षा बैठकें करती है। इससे पार्टी लोकतांत्रिक लगती है, लेकिन जब बात लागू करने की आती है तो अंदरूनी सहमति की कमी साफ नजर आती है। तृणमूल कांग्रेस में चर्चा के लिए शायद ही कोई मंच है। सत्ता पूरी तरह एक व्यक्ति के हाथ में है क्योंकि उन्होंने पार्टी बनाई और उसे चलाया। सारी डोर उन्हीं के हाथ में रहती है।

वहीं, आलोचकों के इस आरोप पर कि भाजपा में उनकी कोई आवाज नहीं होगी और सत्ता सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के हाथ में है, देव ने इसे गलत बताया। उन्होंने कहा कि सभी सांसदों के पास एक गार्डियन मंत्री होता है। आप उनसे अपने राज्य की दिक्कतों के बारे में खुलकर बात कर सकते हैं। इसके अलावा संगठन भी है। आप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के पास भी जा सकते हैं। अगर कुछ भी काम नहीं करता, चाहे आपको पसंद हो या न हो, संघ परिवार की नजरें और कान जमीन पर हैं।
संघ परिवार से मुलाकात और भूमिका

संघ परिवार से किसी से मुलाकात के सवाल पर देव ने कहा कि उन्होंने सीधे किसी से मुलाकात नहीं की है, लेकिन यह बात उन्हें साफ है कि संघ के बहुत बड़े और अनुभवी नेता संसदीय व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। इसमें कई तरह के जुड़ाव होते हैं। कांग्रेस से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस में अगर शीर्ष पर कोई आपसे नाराज हो जाए तो आपका करियर खत्म हो जाता है। आप परिवार को लेकर कांग्रेस में टिक नहीं सकते। लेकिन अगर आप भाजपा में काबिल इंसान हैं तो वे हमेशा एक मंच रहेंगे।

भाजपा में संघ परिवार की भूमिका पर कांग्रेस नेताओं द्वारा की जाने वाली आलोचना का जवाब देते हुए देव ने कहा कि कांग्रेस पर भी एक परिवार का राज है। एक पार्टी गांधी परिवार के साथ है और भाजपा के लिए उनका आइडियोलॉग संघ परिवार है। आरएसएस जैसा बड़ा संगठन होना बेहतर है, जहां अलग-अलग दिशाओं में अलग-अलग विचार हों। परिवार तो दोनों तरफ है। उधर फर्स्ट फैमिली है और इधर संघ परिवार है। लेकिन संघ परिवार कहीं ज्यादा लोकतांत्रिक है क्योंकि यह एक परिवार से बड़ा संस्थान है।
काग्रेस ने अपनी विचारधारा को कमजोर किया

कांग्रेस की विचारधारा के सवाल पर देव ने कहा कि कांग्रेस ने लगातार अपनी विचारधारा को कमजोर किया है। उन्होंने उदाहरण दिए कि महाराष्ट्र में पहली बार शिवसेना के साथ गठबंधन, एमके स्टालिन के साथ लंबे समय तक रहने के बाद अचानक टीवीके के साथ चले जाना, और असम में कम्युनल पार्टियों के साथ नहीं होने का दावा करने के बावजूद बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन। उन्होंने कहा कि वे वैसी कांग्रेस नहीं हैं जैसी मेरे पिता के समय में हुआ करती थी। बता दें कि उनके दिवंगत पिता संतोष मोहन देव असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रहे थे।
तृणमूल से नाराज क्यों?

तृणमूल कांग्रेस से निराश होने के कारण बताते हुए देव ने कहा कि उनकी हालत पार्टी के अन्य नेताओं जैसी नहीं थी क्योंकि वे बंगाल में जमीनी स्तर पर राजनीति करने वाली नहीं थीं। उन्हें लगा कि तृणमूल के लिए बंगाल के बाहर पार्टी का विस्तार करना बहुत मुश्किल था। उनके पास कांग्रेस और भाजपा में से एक को चुनने का विकल्प था। उत्तर-पूर्व के राज्यों में भाजपा के कामकाज और बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए उन्होंने फैसला किया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और गृह मंत्री अमित शाह से बात करने के बाद उन्हें साफ हो गया कि अगले 10-15 साल अपने लोगों के लिए काम करने के लिए भाजपा ही सही पार्टी है।
आरएसएस के प्रति पुरानी सोच

अपने राजनीतिक करियर के शुरुआती दिनों में आरएसएस और संघ परिवार के प्रति विचारों पर देव ने बताया कि छात्र राजनीति शुरू करते समय वे एबीवीपी के खिलाफ थीं। हमें भगवा से एलर्जी होती थी। अब शिक्षा व्यवस्था और सिलेबस बदलने की बहस पर उन्होंने कहा कि भाजपा के सत्ता में आने से पहले पाठ्यक्रम में इतनी हेराफेरी होती थी कि आजादी के आंदोलन में सिर्फ कांग्रेस के लोगों की भूमिका को ही उजागर किया जाता था। विपक्ष के नेताओं द्वारा संघ परिवार पर शिक्षा व्यवस्था चलाने का आरोप लगाने पर उन्होंने कहा कि गांधी परिवार ने नेहरू के योगदान को आगे बढ़ाया, लेकिन असली सिलेबस वह होना चाहिए जो सभी अलग-अलग विचारधाराओं के बारे में बात करे। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता केबी हेडगेवार से शाखा में मिले थे, लेकिन कांग्रेस कभी यह बात नहीं कहती।
छात्र विरोध प्रदर्शन और सरकार का रवैया

छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर सरकार के रवैये के बारे में देव ने कहा कि एक समय जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शनों का अड्डा हुआ करता था। कांग्रेस सरकार के दौरान किसी मंत्री को उन प्रदर्शनों में जाते शायद ही देखा गया, निर्भया मामले तक नहीं। मोदी सरकार ने नए कानून लाकर और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के जरिए इसे अच्छे से संभाला। अब कोर्ट में यह तय होना है कि इस्तेमाल किया गया बल सही और जरूरी था या ज्यादा। उन्होंने कहा कि संसद की ओर मार्च कर रहे हजारों लोगों को देखते हुए गेट पर रोकना और संसद की सुरक्षा गृह मंत्री की जिम्मेदारी है।

वहीं, दोनों सदनों में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा गृह मंत्री को दोषी ठहराने पर देव ने कहा कि एक जिम्मेदार विपक्ष के नेता को देश का कानून पता होना चाहिए। पुराने सीआरपीसी और नए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में स्पष्ट है कि कौन इस तरह का आदेश दे सकता है और किन परिस्थितियों में कार्यपालिका के पास जाना पड़ता है। इसलिए अमित शाह पर पेलेट्स डालने जैसे आरोप पूरी तरह गलत इरादे वाले राजनीतिक बयान हैं।
संसद की भाषा और जेन जी

संसद में दोनों तरफ से हो रही बातचीत, खासकर भाजपा की कुछ महिला सांसदों की भाषा पर देव ने कहा कि यह बातचीत बिल्कुल ठीक नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या वे राज्यसभा में जाकर कह सकती हैं कि असम में किसी ने विपक्ष को बेवकूफ कहा? सरकार को घेरने का पूरा हक है, लेकिन संसद कोई सड़क या चुनावी रैली नहीं है। विपक्ष के नेता को याद रखना चाहिए कि वे संवैधानिक पद पर हैं।

युवाओं के विरोध प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि जेन जी सबसे युवा पीढ़ी है। उनसे बड़ों जैसा बर्ताव करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। सबसे ऊंचे संवैधानिक पदों के लिए इस्तेमाल की जा रही भाषा देखकर वे बहुत परेशान हुईं। सरकार के रवैये के बारे में उन्होंने बताया कि बिल में साफ कहा गया है कि सर्विस प्रोवाइडर्स, पेपर लीक करने वाले और सिस्टम में शामिल लोगों पर केस चलेगा, लेकिन लीक हुआ पेपर खरीदने वाले छात्रों पर कोई केस नहीं है।
पार्टी बदलने के बाद का अनुभव

वहीं, पार्टी बदलने के बाद के अनुभव पर देव ने कहा कि वे अब तक एनडीए की दो बैठकों में शामिल हो चुकी हैं। पहली बार उन्हें लगा कि प्रधानमंत्री जैसा काम करते हैं, वह पूरा पहले नहीं देखा जाता था। पहले वे उनकी आलोचना कर रही थीं क्योंकि जो सामग्री मिलती थी वह विपक्ष से आती थी। लेकिन एनडीए के कार्यक्रम में जाने के बाद उन्हें लगा कि एक पार्टी के रूप में सरकार के अच्छे कामों को लोगों तक पहुंचाने के लिए और बहुत कुछ करने की जरूरत है।

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