मौसम मेहरबान या परेशानी? पंजाब में हल्की बारिश से गेहूं पर फायदा और नुकसान दोनों

अमृतसर.

पंजाब में दो दिन तक लगातार हुई बारिश के बाद शनिवार से मौसम साफ चल रहा है। हालांकि, शनिवार कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी जारी रही। इस बदलाव से गेहूं की फसल को लेकर चिंतित किसानों को फिलहाल राहत मिली है। फसल पकने के अंतिम चरण में होने के कारण किसान लगातार मौसम पर नजर बनाए हुए थे।

हाल के वर्षों में कटाई से पहले हुई बेमौसमी बारिश से फसलों को नुकसान की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे किसानों की चिंता स्वाभाविक थी। इस बार हालांकि बारिश हल्की रही और तेज हवाएं नहीं चलीं, जिससे बड़े नुकसान से बचाव हो गया। कृषि विभाग के निदेशक गुरजीत सिंह बराड़ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अभी घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि बारिश धीमी रही और तेज हवाओं का अभाव रहा, जो फसल को गिरने से बचाने में अहम कारक है। हालांकि उन्होंने किसानों को आने वाले दिनों के लिए सतर्क रहने की सलाह दी है।

34.5 लाख  हेक्टेयर में हुई गेहूं की बुवाई
इस वर्ष पंजाब में लगभग 34.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हुई है। ऐसे में मौसम में थोड़ा सा बदलाव भी बड़े स्तर पर असर डाल सकता है। बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ी है, जिससे भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी। लंबे समय से गिरते जल स्तर से जूझ रहे राज्य के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। गुरदासपुर के कुछ क्षेत्रों में फसल के गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन अधिकारियों ने इसे सीमित और मामूली बताया है। इसे बड़े स्तर का नुकसान नहीं माना जा रहा।

चिंताएं अभी कम नहीं हुई
मौसम विभाग ने 26 मार्च तक रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना जताई है। ऐसे में फसल के दाने बनने के इस महत्वपूर्ण चरण में किसानों की चिंता अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इससे पहले फरवरी और मार्च के शुरुआती दिनों में तापमान सामान्य से लगभग पांच डिग्री अधिक दर्ज किया गया था, जिससे फसल पर गर्मी के असर का खतरा बढ़ गया था। कुछ इलाकों में गेहूं की फसल पर हल्का बैंगनी रंग भी देखा गया, जिसे तापमान में उतार-चढ़ाव से जोड़ा गया। पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वीसी डाॅ. सतबीर सिंह गोसल ने स्पष्ट किया कि यह रंग परिवर्तन अस्थायी है और इससे फसल को स्थायी नुकसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि जब तक तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहता है, तब तक फसल सुरक्षित रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल हालात नियंत्रित हैं, लेकिन कटाई के करीब पहुंच चुकी फसल के लिए तेज हवा, ओलावृष्टि या लंबी बारिश खतरा पैदा कर सकती है। ऐसे में किसानों को मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

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