ईरान जंग में अमेरिका का 24 हजार करोड़ रुपये का नुकसान, ट्रंप प्रशासन ने रखा इसे छिपा

वाशिंगटन

ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. अमेरिका स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के अनुसार, ईरान के मिसाइलों, ड्रोनों और एक दुर्भाग्यपूर्ण 'फ्रेंडली फायर' की वजह से अमेरिकी सैन्य उपकरणों को 2.3 अरब से 2.8 अरब डॉलर (लगभग 19,400 करोड़ से 23,700 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है. यह अनुमान मुख्य रूप से हवाई उपकरणों का है. इसमें अमेरिकी ठिकानों पर हुए नुकसान या नौसेना के जहाजों का नुकसान शामिल नहीं है। 

रक्षा मंत्री का दावा और अगले दिन ईरान का हमला
26 मार्च को अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कैबिनेट बैठक में बड़े दावे किए. उन्होंने कहा कि इतिहास में कभी भी किसी देश की सेना को इतनी तेजी और प्रभावी ढंग से कमजोर नहीं किया गया. लेकिन ठीक अगले दिन, 27 मार्च को ईरान ने सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी एयरबेस 'प्रिंस सुल्तान' पर मिसाइल और ड्रोन हमला कर दिया। 

इस हमले में एक बेहद महंगा E-3 AWACS रडार डिटेक्शन विमान नष्ट हो गया, जिसकी कीमत लगभग 5,920 करोड़ रुपये थी. यह विमान आकाश में उड़ने वाला कमांड सेंटर था, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से दुश्मन के विमान और मिसाइलों का पता लगाता था। 

कितना हुआ कुल नुकसान?

CSIS के सीनियर एडवाइजर मार्क कैनशियन ने विस्तृत गणना की है. उनके अनुसार…

    THAAD मिसाइल डिफेंस सिस्टम का एक या दो पावरफुल रडार नष्ट हुए, जिनकी कीमत लगभग 4,100 करोड़ से 8,200 करोड़ रुपये के बीच है.

    ईरान के हमलों और एक फ्रेंडली फायर घटना में लगभग 19,400 करोड़ से 23,700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

    फ्रेंडली फायर में कुवैत में तीन F-15 फाइटर जेट भी नष्ट हो गए.

युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी. ईरान ने न सिर्फ अमेरिकी ठिकानों पर, बल्कि अमेरिका के सैनिकों वाले खाड़ी देशों के ठिकानों पर भी हमले किए. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी प्रभावित किया, जिससे तेल परिवहन प्रभावित हुआ. CSIS विशेषज्ञ का कहना है कि ईरान का खाड़ी देशों पर हमला करना रणनीतिक गलती साबित हुआ, क्योंकि इससे खाड़ी देश अमेरिका के और करीब आ गए। 

अमेरिका की मुश्किलें
अमेरिका ने इस युद्ध में पूर्ण पारदर्शिता नहीं दिखाई है. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन चुनावी कारणों से नुकसान की पूरी जानकारी छिपा रहा है. ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका ने ऑपरेशनल सफलताएं हासिल कीं, लेकिन रणनीतिक लक्ष्य अभी दूर दिख रहे हैं. 2003 के इराक युद्ध और अफगानिस्तान की तरह यहां भी ऑपरेशनल जीत रणनीतिक हार में बदल सकती है। 

अभी अमेरिका ने क्षेत्र में 2003 के इराक युद्ध जितनी बड़ी सेना नहीं तैनात की है. ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता ने अमेरिकी हवाई उपकरणों को काफी नुकसान पहुंचाया है. CSIS रिपोर्ट अमेरिका के नुकसान का पहला विस्तृत अनुमान है. इसमें ठिकानों के इमारतों को हुए नुकसान और अन्य विशेष उपकरण शामिल नहीं हैं, इसलिए असली नुकसान इससे भी ज्यादा हो सकता है। 
ईरान के साथ युद्ध में अमेरिका को अब तक 19,400 से 23,700 करोड़ रुपये से ज्यादा का सैन्य नुकसान हो चुका है. यह घटना दिखाती है कि आधुनिक युद्ध में मिसाइल और ड्रोन कितने प्रभावी साबित हो सकते हैं. अमेरिका के लिए यह न सिर्फ आर्थिक, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक चुनौती भी बन गया है. युद्ध अभी जारी है और दोनों पक्षों के बीच तनाव कम होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे हैं। 

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