नया स्ट्रेन नहीं फिर भी Swine Flu के केस बढ़े, इम्यूनिटी और बदलते मौसम का कितना असर?

नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू (HINI) के केस बढ़ने लगे हैं. कर्नाटक में 4 हजार से ज्यादा केस आ चुके हैं. दिल्ली में 1700 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं. लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए आशंका जताई जा रही थी कि क्या इस बार स्वाइन फ्लू का कोई नया स्ट्रेन आ गया है? लेकिन इस मामले में ICMR ने स्पष्ट कहा है कि भारत में H1N1 (स्वाइन फ्लू) का कोई नया स्ट्रेन नहीं मिला है। 

पुराना स्ट्रेन ही लोगों को संक्रमित कर रहा है. अब सवाल उठता है कि जब कोई नया स्ट्रेन नहीं है तो भी फिर केस क्यों बढ़ रहे हैं.कब तक ये केस कम होने की उम्मीद है? स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने का एक बड़ा कारण मौसम में बदलाव तो है ही,लेकिन दूसरी वजह शरीर की इम्यूनिटी भी है. इसको समझने के लिए आपको साल 2009 में जाना होगा। 

मई 2009 में स्वाइन फ्लू का देश में पहला मामला सामने आया था. इसके बाद सर्दियों के मौसम (दिसंबर 2009 से मार्च 2010) में फिर केस बढ़ने लगे. तब देश में बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हुए थे. उसके बाद धीरे- धीरे केस कम होने लगे थे.  फिर 2014 और 2015 के बीच  देश में स्वाइन फ्लू का आउटब्रेक हुआ और हजारों लोग संक्रमित हुए थे. फिर 2019 में बहुत केस बढ़े,उसके बाद अब साल 2026 में अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। 

हर कुछ सालों में क्यों बढ़ जाते हैं केस, इम्यूनिटी का क्या है रोल
सफदरजंग अस्पताल में कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ जुगल किशोर ने इस बारे में बताया है. डॉ किशोर कहते हैं कि भारत में हर कुछ सालों के बाद स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ते है. यह पैटर्न बताता है कि H1N1 वायरस कभी खत्म नहीं हुआ था.यह लोगों के बीच मौजूद रहा और समय-समय पर इसके मामले सामने आते रहे. डॉ किशोर बताते हैं कि जब भी किसी वायरस से लोग बड़ी संख्या में संक्रमित हो जाते हैं तो उसके खिलाफ  इम्यूनिटी बन जाती है. यह सालों तक रहती है. इस वजह से फिर केस बढ़ते नहीं हैं. थोड़े बहुत मामले आते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में केस नहीं रिपोर्ट होते हैं. लेकिन फिर जब कुल सालों में धीरे- धीरे शरीर में  इम्यूनिटी कम होने लगती है तो केस फिर से बढ़ने लगते हैं. ऐसा हर कुछ सालों में होता ही रहता है. यही कारण है कि इस बार फिर से स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं। 

इसको ऐसे समझें, मान लीजिए किसी इलाके में पहले बहुत से लोगों को स्वाइन फ्लू हो चुका था, उनके शरीर में वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी बन गई. ऐसे में अगले कुछ साल तक संक्रमण कम रहा और केस नहीं बढ़े, लेकिन समय बीतने के साथ लोगों में उस वायरस से लड़ने की ताकत कम होती रही, जिससेफिर से केस बढ़ने लगे.डॉ. किशोर कहते हैं कि कोई भी वायरस हमेशा के लिए खत्म नहीं होता है. जब इम्यूनिटी कम होती तो वायरस लोगों को संक्रमित करना शुरू कर देता,जिससे केस बढ़ने लगते हैं। 
 
मौसम भी करता है खेल
बारिश और मौसम में बदलाव के समय फ्लू के मामले बढ़ सकते हैं. कभी गर्मी, कभी बारिश और फिर उमस. ऐसे मौसम में वायरस को फैलने का मौका मिल सकता है. इसके अलावा लोग ऑफिस, स्कूल, मेट्रो और दूसरे बंद स्थानों पर एक-दूसरे के काफी करीब रहते हैं. अगर किसी को फ्लू है, तो खांसने या छींकने के दौरान निकले छोटे कणों से संक्रमण दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है। 

केस कब तक कम होने की उम्मीद
डॉ किशोर कहते हैं कि जब तक पूरे समुदाय में पर्याप्त इम्यूनिटी नहीं होती, तब तक मामले आते रहेंगे. इसका मतलब यह है कि जब अधिकतर आबादी संक्रमित हो जाएगी और लोगों में स्वाइन फ्लू के खिलाफ इम्यूनिटी बन जाएगी तो केस अपने आप कम होने लगेंगे. वायरस के मामलों के कम होने का यही पैटर्न भी है, हालांकि इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है. अधिकतर लोगों में हल्के ही लक्षण ही हैं और होंगे भी. स्वाइन फ्लू किसी महामारी का रूप नहीं लेगा. लोगों को यह भी सलाह है कि डॉक्टर से सलाह लेकर फ्लू से बचाव की वैक्सीन भी लगवा लें।  

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