जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, CJI बोले- युवाओं से संवाद बनाए रखना लोकतंत्र की जरूरत

नई दिल्ली

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और उससे जुड़े विवादों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने युवाओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया. अदालत ने कहा कि यदि कुछ भटके हुए तत्व हिंसक घटनाओं या पत्थरबाजी में शामिल भी हो जाएं, तब भी राज्य का पहला दायित्व संवाद, समझाइश और काउंसलिंग के माध्यम से स्थिति को संभालना होना चाहिए. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आक्रामक रवैया सामाजिक तनाव को बढ़ा सकता है और हिंसा को जन्म दे सकता है. अदालत ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कानून-व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। 

युवाओं से संवाद की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में युवाओं को समझाने और उनसे संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि यदि कुछ लोग भटककर पत्थरबाजी जैसी गतिविधियों में शामिल हो जाते हैं, तब भी पूरे समूह को उसी नजर से नहीं देखा जाना चाहिए. युवाओं को उचित सलाह, काउंसलिंग और मार्गदर्शन दिया जाना जरूरी है ताकि वे हिंसा के रास्ते पर न जाएं. अदालत ने कहा कि सबसे प्रभावी तरीका उनकी बात सुनना है और यह समझना है कि वे अपनी आवाज क्यों उठा रहे हैं। 

पुलिस और प्रशासन को संयम बरतने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों को भी संयम बरतने की सलाह दी. अदालत ने कहा कि किसी भी तरह का आक्रामक रवैया सामाजिक तनाव को बढ़ा सकता है और हालात को और जटिल बना सकता है. पीठ ने कहा कि यदि किसी शांतिपूर्ण मार्च या प्रदर्शन के दौरान अप्रिय घटना हो भी जाए तो पुलिस को अत्यधिक संवेदनशीलता और धैर्य के साथ स्थिति को संभालना चाहिए. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ऐसी घटनाओं से बहुत सावधानी से निपटना आवश्यक है ताकि हालात नियंत्रण से बाहर न जाएं। 

एजेंसियों के विवेक पर जताया भरोसा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों के विवेक पर भरोसा किया जाना चाहिए. पीठ ने टिप्पणी की कि सुरक्षा एजेंसियां ऐसी परिस्थितियों से निपटने का व्यावहारिक अनुभव रखती हैं और वे हालात को समझते हुए निर्णय लेने में सक्षम हैं. अदालत ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था और नागरिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। 

याचिका को लंबित मामलों के साथ जोड़ा
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि इस विषय से संबंधित कई याचिकाएं पहले से लंबित हैं. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मौजूदा याचिका को उन लंबित मामलों के साथ जोड़ा जाएगा और अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी। 

याचिकाकर्ता ने उठाया आयोजकों की जवाबदेही का सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत के सामने प्रदर्शन के कथित आयोजकों की जवाबदेही का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि घटना को 15 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कथित आयोजकों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि वह उन्हें "तथाकथित आयोजक" इसलिए कह रहे हैं क्योंकि यह कोई पंजीकृत संगठन नहीं है. वकील ने तर्क दिया कि राष्ट्रीय राजधानी के हाई-सिक्योरिटी जोन में यदि बड़े पैमाने पर हिंसा हुई है तो आयोजकों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। 

टीवी चैनलों पर बयानबाजी का भी उठाया मुद्दा
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में कहा कि घटना के बाद भी कथित आयोजक विभिन्न टीवी चैनलों पर जाकर बयान दे रहे हैं और माहौल को शांत करने के बजाय उसे और भड़का रहे हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी पंडाल में आग लगती है तो आयोजकों को जिम्मेदार माना जाता है. इसी प्रकार बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। 

सामुदायिक सेवा की सजा की मांग
यह याचिका जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन की आड़ में कथित रूप से अभद्र, आपत्तिजनक और अश्लील टिप्पणियां करने वाले युवाओं को सात दिन की सामुदायिक सेवा की सजा देने की मांग से जुड़ी है. पूर्व आईएफएस अधिकारी मनीष सोलंकी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि युवाओं को अपनी गलती का अहसास कराया जाना चाहिए और सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए सामुदायिक सेवा जैसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए. याचिका में यह भी कहा गया है कि गलती का एहसास होने के बाद ही संबंधित मामलों को बंद करने पर विचार किया जाए। 

20 जुलाई के प्रदर्शन को लेकर भी कार्रवाई की मांग
याचिका में 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजकों की जिम्मेदारी तय किए बिना भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना कठिन होगा। 

Related Posts

भारतीय नौसेना को बड़ी मजबूती, 40 हजार करोड़ की लागत से तैयार होंगे 8 आधुनिक युद्धपोत

विशाखापट्टनम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने भारतीय नौसेना के लिए 8 अगली पीढ़ी के कार्वेट यानी नेक्स्ट जनरेशन कॉरवेट्स बनाने का विशाल प्रोजेक्ट…

बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी खबर, 31 अक्टूबर को पांचवें शनिवार पर खुलेंगे या बंद रहेंगे बैंक?

मुंबई  कल पांचवें शनिवार के दिन बैंक बंद रहने वाले हैं। अगर आप कल 31 अक्टूबर को बैंक ब्रांच जाकर अपना काम निपटाने का प्लान कर रहे हैं तो पहले…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

2027 के चुनावी रण के लिए कांग्रेस का मंथन, दिल्ली में खरगे की अध्यक्षता में जुटेंगे सांसद

2027 के चुनावी रण के लिए कांग्रेस का मंथन, दिल्ली में खरगे की अध्यक्षता में जुटेंगे सांसद

भारत में हॉकी विश्व कप 2030 कराने की तैयारी, मेजबानी के लिए पंजाब समेत तीन राज्य आगे

भारत में हॉकी विश्व कप 2030 कराने की तैयारी, मेजबानी के लिए पंजाब समेत तीन राज्य आगे

PU में गाड़ियों की आवाजाही से बढ़ी परेशानी, रोक नहीं लगी तो सड़कों पर उतरेंगे छात्र

PU में गाड़ियों की आवाजाही से बढ़ी परेशानी, रोक नहीं लगी तो सड़कों पर उतरेंगे छात्र

अंबेडकर प्रतिमा पर तीसरी बार हमला, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

अंबेडकर प्रतिमा पर तीसरी बार हमला, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

लुधियाना में दर्दनाक हादसा, ऑटो की टक्कर से 2 की गई जान, 9 लोग घायल

लुधियाना में दर्दनाक हादसा, ऑटो की टक्कर से 2 की गई जान, 9 लोग घायल

लुधियाना में सरेआम गुंडागर्दी, जगजोत सिंह पर हमला कर सिर पर किए वार

लुधियाना में सरेआम गुंडागर्दी, जगजोत सिंह पर हमला कर सिर पर किए वार

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581