भारत से बगावत करने वाले बांगलादेश और मालदीव समेत कई देश अब मदद के लिए आए आगे

नई दिल्ली
ईरान युद्ध से उपजे
वैश्विक तेल और गैस संकट के बीच मालदीव और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देश भारत से मदद मांग रहे हैं। जानें कैसे नई दिल्ली पुरानी बगावत को भुलाकर 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत अपना पड़ोसी धर्म निभा रहा है।

28 फरवरी को ईरान में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल युद्ध ने पूरी दुनिया के सामने एक अभूतपूर्व ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन टूट चुकी है और कच्चे तेल व गैस की कीमतों में लगी आग से वैश्विक अर्थव्यवस्था झुलस रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से विश्व का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है। यह लगभग पूरी तरह बंद है जिसके कारण दक्षिण एशिया के देशों में पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और बिजली संकट गहरा गया है।

इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। जिन पड़ोसी देशों- विशेषकर मालदीव और बांग्लादेश ने हाल के वर्षों में अपनी घरेलू राजनीति चमकाने के लिए भारत के खिलाफ मुखर बगावत की थी और 'इंडिया आउट' जैसे अभियान चलाए थे वे आज गहरे तेल और गैस संकट से जूझते हुए उसी भारत से मदद की गुहार लगा रहे हैं। दूसरी ओर, भारत ने अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) नीति और कूटनीतिक बड़प्पन का परिचय देते हुए तमाम कड़वाहटों को दरकिनार कर इन देशों की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। हाल ही में बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव ने भारत से ईंधन सप्लाई करने की मांग की थी। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इन पड़ोसी देशों ने भारत से डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति का अनुरोध किया है। बांग्लादेश ने विशेष रूप से डीजल की अतिरिक्त सप्लाई मांगी, जबकि श्रीलंका और मालदीव भी एनर्जी के सेक्टर में सहायता की मांग की थी। आइए, विस्तार से समझते हैं कि किन देशों ने भारत के खिलाफ क्या कदम उठाए थे और आज संकट के समय भारत उनकी किस तरह ढाल बन रहा है।

मालदीव: 'इंडिया आउट' से 'इंडिया हेल्प' तक का सफर

क्या थी बगावत? नवंबर 2023 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने 'इंडिया आउट' अभियान के दम पर सत्ता हासिल की थी। सत्ता में आते ही उन्होंने सबसे पहला काम मालदीव में तैनात भारतीय सैन्य कर्मियों को वापस भेजने का किया। ये कर्मी मुख्य रूप से मेडिकल इवैक्यूएशन के लिए वहां थे। मुइज्जू ने भारत पर आरोप लगाया कि भारतीय सैन्यकर्मी मालदीव की संप्रभुता का उल्लंघन कर रहे हैं। नवंबर 2023 में सत्ता संभालते ही मुइज्जू फरवरी 2024 तक सभी भारतीय सैन्यकर्मियों की वापसी का ऐलान कर दिया और मई 2024 तक सभी भारतीय सैनिक मालदीव छोड़ चुके थे। इसके बाद उन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत के बजाय चीन को चुना और बीजिंग के साथ कई रक्षा व आर्थिक समझौते किए। मालदीव के कुछ मंत्रियों ने भारतीय प्रधानमंत्री और भारतीयों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। हालांकि जब मुइज्जू को लगा कि चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है तो उन्होंने भारत का दौरा किया और भारत को 'सबसे भरोसेमंद साझेदार' बताया।

वर्तमान संकट और भारत की मदद- मालदीव अपनी ऊर्जा और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। फरवरी 2026 के युद्ध के बाद वह गहरे संकट में घिर गया। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से मालदीव में पेट्रोल-डीजल और गैस की भारी किल्लत हो गई। चीन की ओर से तत्काल राहत न मिलने पर मुइज्जू सरकार को अंततः नई दिल्ली का रुख करना पड़ा।

भारत का कदम: सूत्रों की मानें तो भारत ने कूटनीतिक परिपक्वता दिखाते हुए मालदीव के लिए आवश्यक वस्तुओं के निर्यात को न सिर्फ जारी रखा, बल्कि आपातकालीन कोटे के तहत मालदीव को पेट्रोल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की विशेष खेप भेजी है, ताकि वहां का पर्यटन उद्योग और बुनियादी ढांचा पूरी तरह ठप न हो जाए।
बांग्लादेश: सत्ता परिवर्तन और 'बहिष्कार' के बाद सच्चाई का सामना

क्या थी बगावत? अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में डॉ. मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ। इस सत्ता परिवर्तन के बाद बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों का उदय हुआ और भारत विरोधी भावनाएं भड़काई गईं। वहां 'बॉयकॉट इंडिया' अभियान चलाकर भारतीय उत्पादों का बहिष्कार किया गया। यूनुस सरकार ने भारत के साथ कई पूर्व समझौतों (जैसे अडानी पावर डील) की समीक्षा करने की धमकी दी और सीमा व नदी जल बंटवारे को लेकर आक्रामक बयानबाजी की। सीमा पर भारत की बाड़बंदी रोक दी; BGB ने BSF को 'बैक टर्न' करने से इनकार कर दिया। यूनुस ने भारत के 'सेवन सिस्टर्स' (नॉर्थईस्ट) को 'लैंडलॉक्ड' बताते हुए चेतावनी दी कि अस्थिर बांग्लादेश भारत को प्रभावित कर सकता है। पाकिस्तान और चीन से संबंध मजबूत किए। यूनुस का मार्च 2025 चीन दौरा और 'ताइवान इंडिपेंडेंस' का विरोध। अल्पसंख्यक (हिंदू) हिंसा पर भारत की चिंता को 'बढ़ा-चढ़ाकर' बताया। लेकिन फरवरी के चुनाव के बाद सत्ता में आई तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार ने भारत के अच्छे संबंध बनाने की बात कही।

वर्तमान संकट और भारत की मदद: ईरान युद्ध के कारण गैस सप्लाई रुकने से बांग्लादेश का पावर ग्रिड चरमरा गया है। देश के कपड़ा उद्योग, जो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, को बिजली और डीजल की भारी कमी के कारण बंद होने का खतरा पैदा हो गया। बांग्लादेश 95% तेल और 30% गैस मध्य पूर्व से आयात करता है। ईरान युद्ध से देश में LNG की कमी, पैनिक बाइंग और ईंधन राशनिंग शुरू हो गई। विश्वविद्यालय बंद, स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर दी गईं। मार्च 2026 में बांग्लादेश ने भारत से डीजल मांगा।

भारत का कदम: भारत ने नुमालीगढ़-पार्वतीपुर 'मैत्री पाइपलाइन' के जरिए हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति को बढ़ाकर बांग्लादेश की लाइफलाइन को जिंदा रखा है। इसके अलावा, भारतीय पावर ग्रिड से बांग्लादेश को दी जाने वाली बिजली आपूर्ति को बिना किसी बाधा के जारी रखा गया है, ताकि वहां मानवीय और आर्थिक संकट गहरा न हो। भारत ने 10 मार्च को 5,000 टन डीजल भेजा और अगले सप्ताह 10 हजार टन भेजा। इस महीने 40,000 टन का अतिरिक्त डीजल भेजने का प्लान है। MEA ने पुष्टि की कि बांग्लादेश का अनुरोध भारत की अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर स्वीकार किया जा रहा है।
श्रीलंका: पुराने संकट की यादें और भारत की स्थायी मित्रता

क्या था रुख? हालांकि श्रीलंका मालदीव या बांग्लादेश जितना मुखर भारत विरोधी नहीं रहा, लेकिन 2022 के आर्थिक संकट से पहले उसने लगातार चीनी निवेश को तरजीह दी थी और चीनी जासूसी जहाजों को अपने बंदरगाहों पर रुकने की अनुमति देकर भारत की सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज किया था।

वर्तमान संकट और भारत की मदद: 2022 के भयंकर आर्थिक संकट में भारत ने 4 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद देकर श्रीलंका को बचाया था। 2026 के इस नए तेल झटके ने श्रीलंका की पटरी पर लौटती अर्थव्यवस्था को फिर से डगमगा दिया है।

भारत का कदम: भारत ने 'फर्स्ट रेस्पोंडर' की अपनी भूमिका निभाते हुए श्रीलंका को पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद के लिए नई लाइन ऑफ क्रेडिट का विस्तार किया है। भारतीय तेल कंपनियों ने श्रीलंका के पेट्रोल पंपों पर सप्लाई चेन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मार्च 2026 में राष्ट्रपति दिसानायके ने PM मोदी से फोन पर बात की और 38,000 MT ईंधन (20,000 MT डीजल और 18,000 MT पेट्रोल) की आपूर्ति का अनुरोध किया। भारत ने 28 मार्च 2026 को यह शिपमेंट कोलंबो भेज दिया। दिसानायके ने X पर लिखा- भारत का त्वरित समर्थन… 38,000 MT ईंधन कल पहुंचा। PM मोदी और EAM जयशंकर को धन्यवाद।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी रिफाइनिंग क्षमता, घरेलू जरूरतों को देखते हुए मदद कर रहा है, लेकिन पड़ोसियों को 'एनर्जी सिक्योरिटी' दे रहा है। कुल मिलाकर भारत ने पड़ोसियों को हजारों करोड़ की लाइन ऑफ क्रेडिट और विकास सहायता दी है। मालदीव का 'इंडिया आउट', बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की 'मेगाफोन डिप्लोमेसी' और सीमा-व्यापार तनाव- ये सब हाल के वर्षों की 'बगावत' के उदाहरण थे। लेकिन ईरान युद्ध ने साबित कर दिया कि दक्षिण एशिया की ऊर्जा सुरक्षा में भारत अपरिहार्य है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे इस युद्ध ने एक बात स्पष्ट कर दी है: जब भी कोई वैश्विक संकट आता है, तो चीन जैसे देश व्यावसायिक हित देखते हैं, जबकि भारत 'वसुधैव कुटुंबकम' और 'नेबरहुड फर्स्ट' की अपनी नीतियों पर अमल करते हुए बिना किसी शर्त के मदद करता है।

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