ममता बनर्जी ने किया बड़ा ऐलान, इस्तीफा नहीं देंगी और उपचुनाव नहीं लड़ेंगी

कोलकाता
 पश्चिम बंगाल की मुख्य
मंत्री ममता बनर्जी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सनसनीखेज एलान करते हुए कहा कि वह अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगी. बीजेपी की 206 सीटों की भारी जीत को ‘मशीनी चमत्कार’ और ‘संवैधानिक डकैती’ करार देते हुए ‘दीदी’ ने साफ कर दिया है कि बंगाल की पिच पर नया ‘खेला’ अभी शुरू हुआ है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी को मिले स्पष्ट बहुमत के बाद राज्य में शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। 

‘जनता का नहीं, मशीनों का चुनाव है’- ममता बनर्जी
कालीघाट स्थित अपने आवास से पत्रकारों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी बेहद आक्रामक नजर आईं. उन्होंने कहा, ‘मैं उन लोगों के सामने आत्मसमर्पण नहीं करूंगी जिन्होंने जनादेश को लूटा है. कई सीटों पर हमारे उम्मीदवारों को जबरन हराया गया और ईवीएम के साथ खिलवाड़ किया गया. जब तक हर एक वोट की दोबारा गिनती (VVPAT Counting) नहीं हो जाती, मैं इस्तीफा नहीं सौंपूंगी.’ ममता के इस बयान ने राज्य में एक बड़े संवैधानिक संकट की आहट दे दी है, क्योंकि लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार हार के बाद मुख्यमंत्री को राज्यपाल को इस्तीफा सौंपना होता है। 

सड़कों पर उतरने की तैयारी में टीएमसीममता बनर्जी के इस एलान के साथ ही टीएमसी कार्यकर्ताओं ने कोलकाता समेत राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. ‘दीदी’ ने संकेत दिया है कि वे इस नतीजे के खिलाफ कोर्ट जाएंगी और जरूरत पड़ी तो राज्यव्यापी आंदोलन भी करेंगी. टीएमसी के रणनीतिकारों का मानना है कि इस्तीफा न देकर ममता बनर्जी बीजेपी को सरकार बनाने की प्रक्रिया में उलझाना चाहती हैं. उन्होंने कहा, ‘बंगाल की बेटी हार नहीं मानती, वह लड़ती है. यह लड़ाई अब सड़कों पर लड़ी जाएगी। 

IAS-IPS के तबादलों से ममता नाराज
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के नतीजों के बाद ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने दबाव बनाकर राज्य के कई निष्पक्ष IAS और IPS अधिकारियों का तबादला कर दिया ताकि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके. उन्होंने कहा कि “हमारी हार नहीं हुई है बल्कि साजिश के तहत हमसे 100 सीटें छीनी गई हैं.” ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि अधिकारियों को बदलकर प्रशासन को पंगु बना दिया गया जिससे मतदान और मतगणना में धांधली का रास्ता साफ हुआ. उन्होंने इस जनादेश को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार देते हुए कानूनी लड़ाई और जनता के बीच जाने का संकल्प दोहराया। 

साजिश और बदसलूकी के गंभीर आरोप
ममता बनर्जी ने भावुक होते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान उनके साथ बदसलूकी हुई और उन्हें ‘मारा’ गया. उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा ने पूरी सरकारी मशीनरी और चुनाव आयोग के साथ मिलकर ‘फिक्सिंग’ की. उनके प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं:

EVM पर सवाल: उन्होंने पूछा कि मतदान के बाद मशीनों में 80-90% चार्ज कैसे रह सकता है?

· वोटर लिस्ट में धांधली: 90 लाख नाम हटाए गए, जिनमें से कोर्ट के आदेश पर केवल 32 लाख वापस जुड़ सके। 

ममता ने स्पष्ट किया कि वह ‘इंडिया गठबंधन’ के साथ मजबूती से खड़ी हैं और इस ‘गंदे खेल’ के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगी। 

EVM चार्जिंग पर तकनीकी सवाल: ममता ने दावा किया कि मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी कई EVM मशीनों में 80% से 95% तक चार्जिंग दिखाई दे रही थी. उनका सवाल है कि लंबे समय तक चलने वाली वोटिंग के बाद मशीनों की बैटरी इतनी ज्यादा कैसे चार्ज रह सकती है। 

अधिकारियों का सामूहिक तबादला: उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ बड़े अधिकारी ही नहीं बल्कि IC, OC, SGO से लेकर DM, IPS और राज्य सेवा (WBCS-WBPS) तक के अधिकारियों को भाजपा के इशारे पर बदल दिया गया। 

वोटर लिस्ट में ‘गुप्त’ खेल: उन्होंने कहा कि 90 लाख नाम काटे गए थे, जिनमें से कोर्ट के जरिए 32 लाख वापस आए. लेकिन उनका नया दावा है कि 7 लाख अतिरिक्त नाम भी बाद में शामिल किए गए, जिनके बारे में किसी को जानकारी नहीं दी गई। 

मीडिया पर रणनीतिक दबाव: ममता का आरोप है कि दिल्ली से मीडिया को बुलाकर पहले दौर की गिनती से ही ऐसा माहौल बनाया गया ताकि टीएमसी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ा जा सके और भाजपा को मनोवैज्ञानिक बढ़त दिलाई जा सके। 

बीजेपी का पलटवार- जनादेश का अपमान कर रही हैं दीदी
ममता बनर्जी के इस रुख पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. बीजेपी के प्रदेश नेतृत्व ने कहा कि 206 सीटें जीतने के बाद भी अगर कोई मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से बचता है, तो यह लोकतंत्र की हत्या है. बीजेपी ने राज्यपाल से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी हार पचा नहीं पा रही हैं और बंगाल में अराजकता फैलाना चाहती हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर संवैधानिक प्रक्रिया में बाधा डाली गई, तो केंद्र सरकार कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी। 

क्या लगेगा राष्ट्रपति शासन?
ममता बनर्जी के अड़ियल रुख ने बंगाल को एक अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री बहुमत खोने के बाद भी इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल के पास अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश करने या ममता बनर्जी को बर्खास्त करने का अधिकार है. 84 साल बाद हिंदुत्ववादी विचारधारा की वापसी के इस दौर में, ममता बनर्जी का यह ‘खेला’ राज्य को किस दिशा में ले जाएगा, यह अगले 24 घंटे तय करेंगे. फिलहाल, राजभवन से लेकर नबन्ना तक सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पूरे देश की नजरें कोलकाता के इस हाई-वोल्टेज ड्रामे पर टिकी हैं। 

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