इवानोव की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप, पुतिन के करीबी माने जाने वाले अधिकारी को लेकर रहस्य गहराया

मॉस्को

 कभी रूस के राष्ट्रपति पुतिन के उत्तराधिकारी समझे जाने वाले सर्गेई इवानोव की मृत्यु हो गई है. सर्गेई इवानोव रूस के रक्षा मंत्री रह चुके थे. उन्हें कभी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता था. वे 73 साल के थे। 

खास बात यह है कि क्रेमलिन ने बताया कि इवानोव की मौत शुक्रवार को हुई, लेकिन मौत की वजह या अन्य कोई जानकारी नहीं दी. लेकिन क्रेमलिन इसके बारे में कोई डिटेल नहीं दे रहा है. हालांकि पुतिन ने इवानोव के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की. रूस समेत सोशल मीडिया में इस बारे में चर्चा हो रही है। 

पुतिन ने 2001 में इवानोव को अपना रक्षा मंत्री नियुक्त किया था. इवानोव भी रूस की खुफिया एजेंसी KGB के अधिकारी थे. इवानोव वे 2007 तक इस पद पर रहे और चेचन्या में दूसरे युद्ध के दौरान कामकाज संभाला, जिसमें उस इलाके की अलगाववादी कोशिशों को कुचल दिया गया था। 

द सोवियत जेम्स बॉन्ड
लेनिनग्राद में जन्मे इवानोव ने KGB में नौकरी की. यहीं पर पुतिन के साथ उनकी दोस्ती हुई. दोनों KGB के लेनिनग्राद डायरेक्टोरेट में साथ काम करते थे. 1998 में जब पुतिन FSB के प्रमुख बने, तो इवानोव उनके डिप्टी बने. पुतिन के राष्ट्रपति बनने के बाद इवानोव ने अहम पद संभाले। 

इन पदों में सुरक्षा परिषद सचिव, रक्षा मंत्री, प्रथम उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति प्रशासन के प्रमुख शामिल हैं. वे ‘सिलोविकी’ के प्रमुख चेहरे थे. सिलोविकी सुरक्षा एजेंसियों से आए अफसरों के शक्तिशाली समूह को कहा जाता है. एक समय उन्हें पुतिन का संभावित उत्तराधिकारी भी माना जाता था. पुतिन के साथ उनका रिश्ता KGB के दिनों से गहरा और विश्वास-आधारित था. पुतिन उन्हें अपने सबसे करीबी और भरोसेमंद साथियों में गिनते थे. लेकिन जैसा कि राजनीति में होता है जिससे नजदीकी होती है उसी से अविश्वास भी होता है।  

इवानोव को रूस के सर्कल में सोवियत जेम्स बॉन्ड कहा जाता था. इवानोव के करियर में हुई तरक्की का काफी हद तक श्रेय पुतिन के साथ उनकी पुरानी दोस्ती को जाता है. दोनों दोस्त पहली बार 1970 के दशक के आखिर में KGB अफसरों के तौर पर मिले थे. दोनों ने सोवियत जासूसी केंद्रों में काम किया. पुतिन पूर्वी जर्मनी में थे और इवानोव की तैनाती फिनलैंड और केन्या में थी। 

पत्रकार मिखाइल ज़ीगर ने अपनी किताब 'ऑल द क्रेमलिन मेन्स' में लिखा, "वह एक आदर्श सोवियत जासूस हैं. आप उन्हें भीड़ में अलग से नहीं पहचान सकते, वह 'द मैट्रिक्स' के एजेंट स्मिथ जैसे हैं, नाम में भी और शक्ल में भी. "1990 के दशक में रूस की दो मुख्य खुफिया एजेंसियां FSB (फ़ेडरल सिक्योरिटी सर्विस) और SVR (फ़ॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस) उन्हें पाने के लिए होड़ कर रही थीं। 

SVR में इवानोव को यूरोपीय विभाग का पहला डिप्टी डायरेक्टर बनाया गया और 40 साल की उम्र के शुरुआती दौर में ही वह सबसे कम उम्र के जनरलों में से एक बन गए. लेकिन इस एजेंट को पाने की होड़ में जीत FSB की हुई, जब पुतिन उसके प्रमुख बने. 1998 में उन्होंने इवानोव को अपना डिप्टी नियुक्त किया. जिससे एजेंसी का एनालिटिकल काम मज़बूत हुआ. जब पुतिन प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने इवानोव को रूसी सुरक्षा परिषद का प्रमुख नियुक्त किया। 

इवानोव पुतिन के उत्तराधिकारियों में से थे
जब 2008 में पुतिन ने कार्यकाल की सीमा के कारण पद छोड़ने और प्रधानमंत्री बनने का फ़ैसला किया, तो इवानोव को उनका सबसे संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा था.  लेकिन पुतिन ने अपने एक और पुराने सहयोगी दिमित्री मेदवेदेव को अपनी जगह काम करने के लिए चुना ताकि 2012 में राष्ट्रपति पद पर वापसी कर सकें। 

इवानोव की महात्वाकांक्षा और पुतिन का डर
कुछ जानकारों का मानना ​​था कि पुतिन ने इवानोव की उम्मीदवारी को इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि उन्हें लगा कि इवानोव बहुत ज़्यादा महत्वाकांक्षी हैं और उन्हें डर था कि वे राष्ट्रपति पद पर बने रहने की कोशिश कर सकते हैं। 

इवानोव 2007 से 2011 तक उप-प्रधानमंत्री के तौर पर पुतिन के साथ रहे और फिर 2011 से 2016 तक क्रेमलिन के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के तौर पर काम किया। 

2016 में इवानोव को पर्यावरण संरक्षण और परिवहन के लिए राष्ट्रपति का विशेष दूत नियुक्त किया गया; इस पद का कोई राजनीतिक महत्व नहीं था और इसे ज़्यादातर लोग सम्मानजनक रिटायरमेंट के तौर पर देख रहे थे. उन्होंने इस साल की शुरुआत में यह पद छोड़ दिया। 

यूक्रेन में मॉस्को की सैन्य कार्रवाई के जवाब में रूस के अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ इवानोव पर भी अमेरिका और यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाए हैं। 

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