समुद्र की गहराई में मिला ‘गोल्डन ट्रेजर’! दुनिया के सबसे बड़े सोने के भंडार के दावे ने बढ़ाई हलचल

नई दिल्ली

वैज्ञानिकों ने एक ऐसा खजाना खोजा है जो आंखों से दिखाई नहीं देता. जापान की राजधानी टोक्यो से 360 किलोमीटर दूर समुद्र में यह कामयाबी मिली है. वैज्ञानिकों ने 700 मीटर की गहराई में ‘फूल गोल्ड’ के अंदर असली सोना खोजा है. यह कोई आम सोना नहीं है. यह पत्थरों के अंदर परमाणु स्तर पर छिपा हुआ है. हिगाशी-आओगाशिमा काल्डेरा नाम की जगह पर यह रिसर्च की गई है. यहां समुद्र तल पर ज्वालामुखी मौजूद हैं. इन्हीं ज्वालामुखियों के पास मौजूद पत्थरों में यह अदृश्य सोना मिला है. रोबोटिक पनडुब्बियों की मदद से इन पत्थरों के सैंपल निकाले गए. इस खोज ने जियोलॉजिस्ट्स को हैरान कर दिया है. इससे भविष्य में दुनिया भर में सोने की खदानें खोजने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। 

आखिर क्या होता है ‘फूल गोल्ड’ और कैसे मिला इसके अंदर सोने का खजाना?
पाइराइट एक तरह का आयरन सल्फाइड अयस्क है. इसकी चमक और पीला रंग बिल्कुल असली सोने जैसा होता है. इसी वजह से इसे ‘फूल गोल्ड’ या मूर्खों का सोना कहा जाता है. बिना अनुभव वाले लोग अक्सर इसे असली सोना समझ लेते हैं. लेकिन इस बार इस पत्थर ने वैज्ञानिकों को एक बड़ा सरप्राइज दिया है। 

रिसर्चर्स ने रोबोटिक पनडुब्बियों की मदद से समुद्र के नीचे से रॉक सैंपल इकट्ठा किए. इसके बाद लैब में इन पत्थरों में छोटे-छोटे छेद करके उनके अंदर झांका गया. इसके लिए सेकेंडरी-आयन मास स्पेक्ट्रोमेट्री तकनीक का इस्तेमाल हुआ. इसमें पता चला कि इन पत्थरों में सोने की मात्रा रिकॉर्ड स्तर पर है. यह मात्रा 1.9 वजन प्रतिशत तक दर्ज की गई है जो काफी ज्यादा है। 

समुद्र की गहराई में मौजूद यह सोना आम खदानों से कैसे बिल्कुल अलग है?
आम तौर पर सोने की खदानों में सोना दानों या टुकड़ों के रूप में मिलता है. लेकिन समुद्र की गहराई में मिला यह सोना बिल्कुल अलग है. यह धातु सीफ्लोर पाइराइट के क्रिस्टल लैटिस के भीतर एक सॉलिड सॉल्यूशन के रूप में मौजूद है. साइंटिफिक रिपोर्ट्स में पब्लिश इस रिसर्च ने कई पुरानी धारणाओं को तोड़ दिया है। 

हिगाशी-आओगाशिमा काल्डेरा एक अंडरवाटर ज्वालामुखी क्रेटर है. इसके फर्श पर तीन एक्टिव हाइड्रोथर्मल फील्ड मौजूद हैं. इनमें सेंट्रल कोन, साउथईस्ट और ईस्ट साइट शामिल हैं. इन जगहों से पृथ्वी की क्रस्ट के नीचे से मिनरल से भरा सुपरहीटेड लिक्विड लगातार निकलता रहता है. यह पूरा इलाका काले धुएं वाली चिमनियों और सल्फाइड के बड़े टीलों से भरा हुआ है। 

ज्वालामुखियों के पास मौजूद पत्थरों में सोने की इतनी ज्यादा मात्रा कैसे आई?

    वैज्ञानिकों ने 2015 में इस इलाके में अपनी रिसर्च शुरू की थी. उस समय पत्थरों में औसतन 102 पार्ट प्रति मिलियन यानी पीपीएम सोना मिला था। 

    यह मात्रा दुनिया भर के अन्य डीप-सी डिपॉजिट की तुलना में बहुत ज्यादा थी. अन्य जगहों पर यह मात्रा 0.01 से 43 पीपीएम तक ही होती है। 

    इस स्टडी में रिसर्चर्स ने सभी एक्टिव साइट्स से सैंपल लिए. इन सैंपल्स को उनके आकार के आधार पर चार हिस्सों में बांटा गया। 

    कुछ पत्थरों को पीसकर पाउडर बनाया गया. फिर मास स्पेक्ट्रोमीटर से उनमें मौजूद सोना और आर्सेनिक मापा गया। 

    इलेक्ट्रॉन बीम से लेड, कॉपर और आर्सेनिक जैसे मेटल्स का डिस्ट्रीब्यूशन देखा गया. इसके बाद अल्ट्रा-सेंसिटिव तकनीक से पत्थरों के अंदर परमाणु स्तर पर सोना खोजा गया। 

क्रिस्टल के अंदर परमाणु स्तर पर कैसे छिप जाता है सोने का यह विशाल भंडार?
वैज्ञानिक इस बात से सबसे ज्यादा हैरान थे कि सोना पत्थरों में कैसे मौजूद था. यह खनिज के अंदर फंसे छोटे टुकड़ों के रूप में नहीं था. बल्कि यह सोना पाइराइट के क्रिस्टल स्ट्रक्चर में परमाणु दर परमाणु बुना हुआ था। 

रिसर्च में पाया गया कि ऐसा तभी होता है जब आर्सेनिक, लेड और कॉपर जैसे तत्व मौजूद हों. ये तत्व पाइराइट लैटिस के स्ट्रक्चर में बदलाव कर देते हैं. इससे खाली जगह बन जाती है और सोने के परमाणु उस क्रिस्टल में फिट हो जाते हैं। 

पत्थरों में आर्सेनिक बढ़ने के साथ सोने का कंसंट्रेशन भी बढ़ता दिखा. आर्सेनिक असल में सल्फर की जगह ले लेता है, जिससे बड़े गोल्ड आयन के लिए जगह बन जाती है। 

क्या सभी पत्थरों में मिला है बराबर सोना और इससे भविष्य में क्या फायदा होगा?

    रिसर्च में पता चला कि सभी तरह के पाइराइट में सोने की मात्रा बराबर नहीं होती. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे कहां और किस कंडीशन में बने हैं. सेंट्रल कोन साइट पर सबसे ज्यादा सोना पाया गया। 

    गर्म हाइड्रोथर्मल लिक्विड के ठंडे समुद्री पानी से टकराने पर बनने वाले क्रिस्टल में सबसे अधिक सोना था. इस खोज से पता चलता है कि एडवांस माइक्रो-एनालिटिकल टूल्स कितने मददगार हो सकते हैं। 

ये टूल्स ऐसी कीमती चीजों को खोज सकते हैं जिन्हें पहले नजरअंदाज कर दिया जाता था. यह रिसर्च सोने की नई खदानें खोजने में एक अहम सुराग का काम कर सकती है. पत्थरों का टेक्सचर और केमिकल फिंगरप्रिंट सबसे अमीर गोल्ड जोन की पहचान करा सकते हैं। 

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