बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखें, बचपन और प्रतिभा बचाना शिक्षकों की जिम्मेदारी: PM मोदी

नईदिल्ली 

क्लास में बैठा बच्चा सिर्फ किताबों के पन्ने नहीं पढ़ रहा होता. उसके आसपास की दुनिया भी उसे हर दिन कुछ न कुछ सिखा रही होती है. कभी मोबाइल की स्क्रीन उसे अपनी तरफ खींचती है. कभी दोस्तों का असर पड़ता है. कभी पढ़ाई का दबाव परेशान करता है. ऐसे में बच्चे के साथ सबसे ज्यादा वक्त बिताने वाले लोगों में शिक्षक भी शामिल हैं. शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी भूमिका की याद शिक्षकों को दिलाई. उन्होंने कहा कि बच्चों का बचपन बचाना भी शिक्षकों की बड़ी जिम्मेदारी है. प्रधानमंत्री ने नेशनल टीचर्स अवॉर्ड पाने वाले 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने सिर्फ पढ़ाई और परीक्षा के नंबरों की बात नहीं की. उन्होंने बच्चों के व्यवहार, उनकी आदतों और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी नजर रखने की जरूरत बताई। 

पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चा पढ़ाई में कैसा कर रहा है, यह जरूरी है. लेकिन उससे भी जरूरी यह समझना है कि वह सामान्य जिंदगी में कैसा व्यवहार कर रहा है. उसके स्वभाव में अचानक कोई बदलाव तो नहीं आया. वह दोस्तों से दूर तो नहीं हो रहा. वह देर रात तक मोबाइल तो नहीं चला रहा. कहीं नशे जैसी किसी बुरी आदत की तरफ तो नहीं बढ़ रहा. प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि ऐसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बच्चे के व्यवहार में बदलाव दिखे तो उसकी वजह समझने की कोशिश करनी चाहिए. जरूरत पड़े तो माता-पिता से बात करनी चाहिए और बच्चे को सही रास्ते पर लाने में मदद करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त परिवार कम होने के दौर में बच्चों की जिंदगी में शिक्षक की भूमिका और ज्यादा बढ़ गई है। 

स्क्रीन टाइम पर पीएम मोदी की चिंता
प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों को सिर्फ सिलेबस पूरा कराने तक शिक्षक की भूमिका सीमित नहीं होनी चाहिए. बच्चा सवाल पूछता है तो उसकी जिज्ञासा को दबाने के बजाय उसे सही दिशा देनी चाहिए. उन्होंने शिक्षकों से कहा कि बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा ही उनके सीखने की सबसे बड़ी ताकत हो सकती है. अगर बच्चा कुछ नया जानना चाहता है, अलग सवाल पूछता है या चीजों को अपने तरीके से समझना चाहता है तो उसे रोकने के बजाय प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. पीएम मोदी ने यह भी जोर दिया कि पढ़ाई सिर्फ किताबों और क्लासरूम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. बच्चों को वास्तविक दुनिया से जोड़ना जरूरी है। 

स्क्रीन टाइम भी प्रधानमंत्री की चिंता का एक बड़ा मुद्दा रहा. उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे माता-पिता से बातचीत करें और यह समझें कि बच्चा मोबाइल या दूसरी स्क्रीन पर कितना समय बिता रहा है. खास तौर पर यह देखना जरूरी है कि बच्चे देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे. ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों को निकालने के लिए उन्हें खेल, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कामों से जोड़ने की सलाह दी गई. पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को सिर्फ पढ़ाई में व्यस्त रखने के बजाय उनकी पूरी दिनचर्या और विकास पर ध्यान देना जरूरी है। 

नशे की लत से बच्चों को बचाने की जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री ने नशे की लत को लेकर भी शिक्षकों को सतर्क रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि अगर किसी बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव नजर आता है तो शिक्षक उसे सिर्फ अनुशासन की समस्या मानकर छोड़ न दें. उसके पीछे की वजह जानने की कोशिश होनी चाहिए. शिक्षक बच्चे और उसके परिवार के बीच संवाद का पुल बन सकते हैं। 

स्क्रीन टाइम पर भी रखें नजर
मोबाइल और स्क्रीन आज बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. ऐसे में पीएम मोदी ने शिक्षकों से माता-पिता के साथ मिलकर इस पर नजर रखने को कहा. बच्चों को मोबाइल से दूर करने के लिए सिर्फ रोक-टोक पर्याप्त नहीं है. उन्हें खेल, शारीरिक गतिविधियों और क्रिएटिव कामों के विकल्प देने होंगे. इससे उनका समय भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल होगा और उनका विकास भी होगा। 

क्लासरूम से बाहर भी हो बच्चों की पढ़ाई
पीएम मोदी ने कहा कि पढ़ाई सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. बच्चों को वास्तविक दुनिया दिखानी चाहिए. उन्हें कामकाज की प्रक्रिया समझानी चाहिए. इससे किताबों में पढ़ी चीजों को जिंदगी से जोड़ना आसान होगा. प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से बच्चों में ‘श्रम की गरिमा’ जैसे संस्कार विकसित करने पर भी जोर दिया। 

82 शिक्षकों को मिला नेशनल टीचर्स अवॉर्ड
इस साल 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स को नेशनल टीचर्स अवॉर्ड के लिए चुना गया है. इनमें 48 स्कूल शिक्षक, 21 उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलिटेक्निक के शिक्षक और 13 स्किल ट्रेनर शामिल हैं. अवॉर्ड पाने वाले शिक्षकों ने प्रधानमंत्री के साथ अपने अनुभव भी साझा किए. उन्होंने क्लासरूम में किए गए नए और रचनात्मक प्रयोगों के बारे में बताया। 

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का संदेश सिर्फ शिक्षकों के लिए नहीं, बल्कि स्कूल, परिवार और समाज तीनों के लिए था. बच्चे के विकास का मतलब सिर्फ अच्छे नंबर नहीं हैं. उसका व्यवहार, उसकी आदतें, उसकी जिज्ञासा और उसका आत्मविश्वास भी उतना ही जरूरी है. ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका और बड़ी हो जाती है. क्योंकि कई बार बच्चा अपनी परेशानी घर पर नहीं बता पाता, लेकिन उसके व्यवहार में बदलाव क्लास में सबसे पहले नजर आ सकता है. यही वजह है कि पीएम मोदी ने शिक्षकों से बच्चों का बचपन बचाने और उन्हें सही दिशा देने को अपनी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा मानने की अपील की। 

 

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