Crude Oil News: तेल उत्पादन को लेकर 7 देशों का बड़ा फैसला, वैश्विक बाजार में हलचल, जानें भारत पर क्या होगा असर

 नई दिल्ली

मिडिल ईस्ट टेंशन लगभग खत्म हो गई है, दुनिया की तेल जरूरतों के बड़े हिस्से की आवाजाही और सप्लाई के लिए अहम होर्मुज स्ट्रेट से तेल-गैस से लदे जहाज निकलने लगे. इन सबके बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत गिरते हुए 72 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई। 

Crude Oil Price Crash और Hormuz पर हालात सामान्य होने के बीच अब तक एक-दूसरे से लड़ते झगड़ते नजर आने वाले ओपेक+ (OPEC+) देशों ने एक साथ मिलकर बड़ा फैसला लिया है, जो दुनिया के लिए राहत भरा है। 

Crude की कीमतों में गिरावट जारी
इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है.  खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड की कीमत और भी ज्यादा फिसल गई. Brent Crude Oil Price 1 फीसदी के आसपास फिसलकर 71 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था. तो वहीं WTI Crude Oil Price फिसलकर 68 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इसके अलावा मर्बन क्रूड ऑयल की कीमत मामूली बढ़त के साथ 66 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थी।

संकट टला, अब आई ये राहत भरी खबर
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर बात बनने और बैठकों को लेकर पॉजिटिव संकेतों के बीच पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश से लेकर ब्रिटेन तक, दुनिया के तमाम देशों में तेल-गैस का संकट खत्म होता नजर आया है. क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट ओपन है और यहां से तेल-गैस के टैंकरों की आवाजाही जारी है. यानी Oil-Gas सप्लाई चेन फिर से सुचारू नजर आ रही है. हालांकि, ये युद्ध पूर्व स्तर से अभी भी नीचे बनी हुई है, लेकिन इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव और गिरावट के रूप में दिखने भी लगा है। 

इस बीच एक और राहत भरी खबर ये आई है कि ओपेक+ (OPEC+) देशों ने भी तेल को लेकर बड़ा फैसला किया है. इसमें शामिल सात देशों ने एक साथ मिलकर अगले महीने से तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक,  सऊदी अरब और रूस की अगुवाई में प्रति दिन 1.88 लाख बैरल एक्स्ट्रा क्रू़ड ऑयल प्रोड्यूश करने को मंजूरी दी गई है. मतलब अब आने वाले समय में तेल पर्याप्त तेल बाजार में सप्लाई होगा. लगातार 5वें महीने इस बढ़ोतरी को लेकर सहमति बनी है। 

एक साथ आए ये 7 ओपेक+ देश
गौरतलब है कि बीते कुछ समय में ओपेक+ देशों के बीच उत्पादन कोटा, बाजार हिस्सेदारी और तेल की कीमतों को लेकर बड़े मतभेद देखने को मिल रहे थे. कुछ देश क्रूड प्राइस को लेकर प्रोडक्शन सीमित रखने पर जोर दे रहे थे, तो कुछ उत्पादन में इजाफा कर इनकम बढ़ाने पर फोकस कर रहे थे. लेकिन इन मतभेदों के बाद अब ओपेक+ में शामिल देश सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने एकमत से उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है। 

OPEC+ देशों (तेल उत्पादक) देशों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, 'बाजार की स्थितियों पर नजर रखना और उनका आकलन करना जारी रखा जाएगा, इसके अलावा तेल बाजार की स्थिरता को बनाए रखने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत सतर्क दृष्टिकोण अपनाने को महत्व दिया जाएगा। 

क्या भारत में सस्ता होगा Petrol-Diesel? 
अगर तेल उत्पादक देशों की सहमति के मुताबिक, अगले महीने से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल क्रूज प्रोडक्शन बढ़या जाता है, तो निश्चित तौर पर कच्चे तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ेगा और इनमें गिरावट देखने को मिल सकती है. Crude Price Fall से इसके आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों राहत मिलेगी, क्योंकि OMCs की लागत कम होगी और इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद भी बढ़ेगी।  

हालांकि, ये तुरंत सस्ता होगा कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि देश में Petrol-Diesel कितना और कब सस्ता होगा, ये कई कारकों पर निर्भर करेगा. भारत में फ्यूल प्राइस कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव के साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में उतार-चढ़ाव, रिफाइनिंग कॉस्ट, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और राज्यों में लागू VAT पर भी निर्भर करते हैं. देखने वाली बात ये होगी कि प्रोडक्शन बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कितने समय के लिए नीचे बनी रहती हैं। 

पेट्रोलियम मंत्री ने दिए थे ये संकेत 
मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच सरकारी तेल कंपनियों को हो रहे भारी भरकम नुकसान के बीच भारत में करीब चार साल बाद अचानक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार चार बार में 7 रुपये प्रति लीटर के आसपास का इजाफा किया गया था. अब होर्मुज ओपन होने और कच्चा तेल सस्ता होने के बीच पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने बीते हफ्ते कीमतों में कटौती के संबंध में तस्वीर साफ की थी। 

Hardeep Singh Puri ने कहा था कि निजी क्षेत्र की कंपनियों और OMCs के पास जो शेयर हैं, वे दो से ढाई महीने पहले खरीदे गए थे, जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, अगर कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. इस बारे में अटकलें लगाना मेरे लिए उचित नहीं होगा। 

 

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