जनरल सीट और आरक्षण दोनों का लाभ नहीं मिलेगा, पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने तय की सीमा

चंडीगढ़.

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रियाओं में आरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि जो अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया के किसी भी चरण में आरक्षण का लाभ ले चुके हैं, वे बाद में अनारक्षित (जनरल) श्रेणी में माइग्रेशन का दावा नहीं कर सकते।

हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि जिन उम्मीदवारों ने आरक्षित वर्ग में आवेदन तो किया, लेकिन किसी प्रकार की आरक्षण संबंधी रियायत नहीं ली और उनके अंक सामान्य वर्ग की कटआफ से अधिक हैं, उन्हें उपलब्ध सामान्य वर्ग की सीटों पर विचार किए जाने का अधिकार होगा। जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने हरियाणा में आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर (ग्रुप-बी) के 805 पदों पर भर्ती से जुड़े पुनर्विचार आवेदनों का निपटारा करते हुए यह आदेश पारित किया। यह भर्ती 21 जून 2024 को जारी विज्ञापन के माध्यम से की गई थी।

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान आरक्षण के आधार पर कोई भी लाभ प्राप्त करने वाले उम्मीदवार अनारक्षित वर्ग में समायोजन का दावा नहीं कर सकते। वहीं, ऐसे उम्मीदवार, जिन्होंने आरक्षित श्रेणी में आवेदन किया हो लेकिन आयु सीमा में छूट, शुल्क रियायत या अन्य किसी प्रकार का लाभ न लिया हो और जिन्होंने सामान्य वर्ग की निर्धारित कटऑफ से अधिक अंक हासिल किए हों, उन्हें उपलब्ध सामान्य वर्ग की सीटों पर विचार का अवसर दिया जाएगा। मामले में पुनर्विचार याचिकाएं 3 नवंबर 2025 को दिए गए खंडपीठ के एक पूर्व निर्णय के बाद दाखिल की गई थीं।

अनुमति याचिका पहले ही हो चुकी खारिज: हाई कोर्ट
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि भले ही उन्हें आरक्षण का लाभ न मिले, लेकिन उनके अंक सामान्य वर्ग के अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक हैं, इसलिए उन्हें चयन का अधिकार मिलना चाहिए। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि इस मामले में दायर विशेष अनुमति याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है।
दावों की सच्चाई जानने के लिए हाई कोर्ट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वे स्पष्ट करें कि पुनर्विचार याचिकाकर्ताओं में से किन उम्मीदवारों ने आरक्षित वर्ग में आवेदन करने के कारण कोई लाभ प्राप्त किया था या नहीं। इसके बाद राज्य सरकार ने शपथ पत्र दाखिल कर बताया कि कुछ उम्मीदवारों ने आयु सीमा में छूट और अन्य रियायतों का लाभ लिया था।

अदालत ने इस शपथपत्र को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि ऐसे उम्मीदवारों को सामान्य वर्ग में माइग्रेशन की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि जो पुनर्विचार याचिका कर्ता अंतत अपनी मेरिट के आधार पर सामान्य वर्ग में चयनित पाए जाते हैं, उन्हें उनके जूनियर उम्मीदवारों की नियुक्ति तिथि से लाभ दिया जाए। हालांकि वास्तविक वित्तीय और सेवा संबंधी लाभ केवल उनकी वास्तविक नियुक्ति की तारीख से ही मिलेंगे। अदालत ने पूरी प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं।

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