पहलगाम हमले के बाद कश्मीर में फिर से बढ़ी पर्यटकों की तादाद, रौनक लौट आई

श्रीनगर 

22 अप्रैल 2025 का दिन जम्मू-कश्मीर के लिए किसी बुरे ख्वाब से कम नहीं था. यहां पहलगाम स्थित बैसरन घाटी (Baisaran Valley) में हुए घातक आतंकी हमले ने पूरे कश्मीर घाटी को झकझोर दिया था. ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहलाने वाली इस खूबसूरत घाटी में आतंकियों ने पर्यटकों का धर्म पूछकर उन्हें गोलियों से भून डाला था. इस नृशंस आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर हिंदू पर्यटक थे. इस हमले ने न सिर्फ मानवीय क्षति पहुंचाई, बल्कि पहलगाम के पर्यटन उद्योग को बुरी तरह चोट पहुंचाई. पर्यटन उद्योग ठप पड़ गया था, दुकानें बंद हो गई थीं और स्थानीय कारीगरों-दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया था. लेकिन ठीक एक साल बाद पहलगाम के घाव भरने लगे हैं. इस वसंत में पर्यटकों की रौनक लौट आई है. हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट की दुकानों पर फिर भीड़ उमड़ रही है. पर्यटक कश्मीरी शॉल, कालीन, पशमीना, कढ़ाई वाले सूट, काठ की नक्काशीदार वस्तुएं और सेब की लकड़ी से बने सामान खरीद रहे हैं. स्थानीय दुकानदारों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है और कमाई भी पहले जैसी होने लगी है। 

पहलगाम के मुख्य बाजार लिद्दर बाजार, मलिक बाजार और चंदनवाड़ी रोड पर इन दिनों सुबह से शाम तक चहल-पहल है. दुकानों पर फिर से भीड़ दिखने लगी है. पर्यटक बसों और प्राइवेट गाड़ियों से उतरते ही दुकानों की ओर बढ़ रहे हैं. कई दुकानें सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक खुली रह रही हैं। 

हम साथ देने आए हैं…
इंदौर के रहने वाले फखरुद्दीन अपने परिवार के साथ पहली बार पहलगाम घूमने आए है. वह यहां की सुंदरता और लोगों की मेहमाननवाजी को देखकर कहते हैं, ‘हमने जम्मू-कश्मीर के बारे में बहुत नकारात्मक बातें सुनी थीं, लेकिन यहां आकर हमारा अनुभव बिल्कुल उल्टा है. लोग बेहद मिलनसार हैं और यहां के हस्तशिल्प अद्भुत हैं. हम कश्मीरी शॉल, पशमीना और हाथों से बने सामान खरीद रहे हैं ताकि स्थानीय समुदाय को सपोर्ट मिल सके। 

फखरुद्दीन ने बताया कि उनकी पत्नी और बेटी ने कई पशमीना शॉल, सूट पीस और कालीन खरीदे. वह कहते हैं, ‘हमने सोचा था कि सुरक्षा की वजह से यहां घूमना मुश्किल होगा, लेकिन हर जगह सुरक्षा बल तैनात हैं और वातावरण पूरी तरह शांतिपूर्ण है। 

बैसरन घाटी का वह काला दिन
पिछले साल 22 अप्रैल को दोपहर करीब 1 से 2 बजे के बीच बैसरन घाटी में हथियारबंद आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला बोल दिया. घनी देवदार के जंगलों से घिरी इस घाटी में पर्यटक घोड़े की सवारी या पैदल घूम रहे थे. आतंकियों ने M4 कार्बाइन और AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग की. उन्होंने पुरुषों से उनकी धार्मिक पहचान पूछी और गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाया. इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय घोड़ा चालक शहीद हुए। 

हमले के बाद पूरे कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई. कई पर्यटन स्थल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए. पहलगाम की हैंडलूम-हैंडीक्राफ्ट दुकानों पर ताला लग गया. कारीगर परिवार महीनों बिना कमाई के गुजारा करते रहे. पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अप्रैल-मई में पर्यटकों की संख्या में 80 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। 

कश्मीर में लौट रही रौनक
2026 के वसंत में हालात अब बदल रहे हैं. मार्च के अंत से अप्रैल के पहले दो सप्ताह में पहलगाम में रोजाना 800 से 1200 पर्यटक पहुंच रहे हैं. बैसरन घाटी सहित आसपास के कई पर्यटन स्थल फिर से खुल रहे हैं. जम्मू-कश्मीर सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘Kashmir Travel Mart 2026’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिसमें हस्तशिल्प को विशेष जगह दी गई है। 

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं. पहलगाम में अतिरिक्त सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है. पर्यटक बसों और वाहनों की सुरक्षा के लिए स्पेशल एस्कॉर्ट व्यवस्था की गई है. साथ ही ‘एक्सपीरियंस कश्मीर’ अभियान के तहत सोशल मीडिया पर सकारात्मक रुख बढ़ाया जा रहा है। 

पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल 2026 में अब तक पिछले साल की तुलना में 65 प्रतिशत ज्यादा पर्यटक कश्मीर घाटी आए हैं. पहलगाम के अलावा गुलमर्ग, सोनमर्ग, गांदेरबल और डल झील क्षेत्र भी पर्यटकों से गुलजार हैं। 

पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जख्म अब भर रहा है. आतंकी हमले की यादें अभी भी ताजा हैं, लेकिन पर्यटकों की वापसी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई जान दी है. फखरुद्दीन जैसे परिवार दिखाते हैं कि पर्यटक अब सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय को सपोर्ट करने भी आ रहे हैं। 

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