श्रीकृष्ण से जुड़े 5 रहस्यमयी प्रसंग, समुद्र में समाई द्वारका से जगन्नाथ पुरी के ‘दिव्य तत्व’ तक

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन जितना प्रेरणादायक है, उतना ही रहस्यमयी भी है. उनकी लीलाओं और उनसे जुड़े प्रसंगों में कई ऐसे रहस्य छिपे हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. द्वारका नगरी के समुद्र में समाने से लेकर सुदर्शन चक्र, गुरु दक्षिणा और जगन्नाथ पुरी से जुड़े रहस्यों तक, श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े कई प्रसंग आज भी लोगों को आकर्षित करते हैं. आज हम आपको भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े पांच ऐसे अलौकिक और रोचक प्रसंगों के बारे में बताएंगे, जिनके बारे में शायद आपने पहले सुना हो या शायद ये बातें आपके लिए बिल्कुल नई हों.

भगवान श्रीकृष्ण की रहस्यमयी द्वारका नगरी
भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा सबसे बड़ा रहस्य उनकी नगरी द्वारका को माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों में द्वारका का वर्णन एक बेहद भव्य और समृद्ध नगरी के रूप में मिलता है. मान्यता है कि जिस स्थान पर द्वारका नगरी बसाई गई थी, उस क्षेत्र को पहले कुशस्थली कहा जाता था. भगवान श्रीकृष्ण ने इस स्थान का पुनर्निर्माण कराया और यहां एक भव्य नगरी बसाई.

कथाओं के अनुसार, द्वारका के निर्माण में विश्वकर्मा का विशेष योगदान था. विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार और वास्तुकार माना जाता है. कुछ लोककथाओं और परंपराओं में मय दानव का नाम भी इस निर्माण कार्य से जोड़ा जाता है, जिन्हें असुरों का महान वास्तुकार माना गया है. द्वारका के समुद्र में समाने को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. महाभारत और पुराणों से जुड़ी कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के धरती से प्रस्थान के बाद द्वारका समुद्र में समा गई.

समुद्र के भीतर द्वारका क्षेत्र के आसपास पुरातात्विक अवशेषों की खोज भी की गई है. हालांकि, धार्मिक ग्रंथों में वर्णित भगवान श्रीकृष्ण की पूरी द्वारका और पुरातात्विक खोजों के बीच सीधा संबंध अब भी शोध और चर्चा का विषय बना हुआ है.

क्या भगवान श्रीकृष्ण थे मार्शल आर्ट के जन्मदाता?
भगवान श्रीकृष्ण की युद्ध कला और शारीरिक क्षमता से जुड़े कई प्रसंग धार्मिक कथाओं में मिलते हैं. उन्होंने मथुरा पहुंचकर कंस के मल्लों चाणूर और मुष्टिक का सामना किया था.

कुछ लोकमान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण को प्राचीन युद्ध कलाओं से जोड़ा जाता है. दक्षिण भारत की प्रसिद्ध युद्ध कला कलारिपयट्टू को भी कई बार प्राचीन भारतीय युद्ध परंपराओं के संदर्भ में भगवान श्रीकृष्ण से जोड़ा जाता है. हालांकि, भगवान श्रीकृष्ण को कलारिपयट्टू का प्रत्यक्ष आविष्कारक मानने का दावा ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित नहीं है. फिर भी धार्मिक कथाओं में श्रीकृष्ण को एक महान योद्धा और युद्ध कला में निपुण माना गया है.

मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने बचपन से ही ब्रजभूमि में रहते हुए अनेक प्रकार की शारीरिक और युद्ध कलाओं का अभ्यास किया था. यही कारण था कि कम उम्र में भी उन्होंने चाणूर और मुष्टिक जैसे शक्तिशाली मल्लों का सामना किया.

भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र किसने दिया था?
भगवान श्रीकृष्ण के सबसे शक्तिशाली दिव्य अस्त्रों में सुदर्शन चक्र का नाम सबसे पहले आता है. धार्मिक परंपराओं में सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु का प्रमुख अस्त्र माना जाता है. भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, इसलिए सुदर्शन चक्र भी उनकी दिव्य शक्ति का प्रतीक माना गया है.

कुछ कथाओं और लोक परंपराओं में यह भी कहा जाता है कि भगवान परशुराम ने श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किया था. हालांकि, अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इस प्रसंग के अलग-अलग वर्णन मिलते हैं. भगवान श्रीकृष्ण को अनेक दिव्य अस्त्रों का ज्ञाता भी माना जाता है. धार्मिक कथाओं में उनके युद्ध कौशल और दिव्य शक्तियों के कई प्रसंग मिलते हैं.

भगवान श्रीकृष्ण ने कई लोगों को दिया जीवनदान
भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े कई ऐसे प्रसंग मिलते हैं, जिनमें उन्होंने अपने भक्तों और प्रियजनों की रक्षा की थी. ऐसी ही एक प्रसिद्ध कथा उनके गुरु संदीपनि ऋषि से जुड़ी है. माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने संदीपनि ऋषि के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की थी. शिक्षा पूरी होने के बाद जब गुरु दक्षिणा देने की बात आई तो गुरु ने अपने पुत्र को वापस लाने की इच्छा व्यक्त की थी.

धार्मिक कथाओं के अनुसार, श्रीकृष्ण अपने गुरु के पुत्र की खोज करते हुए समुद्र तक पहुंचे और अंत में यमलोक से उसे वापस लेकर आए. इसके बाद उन्होंने गुरु दक्षिणा के रूप में अपने गुरु के पुत्र को उन्हें सौंप दिया. एक अन्य प्रसिद्ध प्रसंग अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित से जुड़ा है. महाभारत युद्ध के बाद अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु पर संकट आ गया था. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति से उस शिशु की रक्षा की. आगे चलकर यही बालक राजा परीक्षित के नाम से प्रसिद्ध हुआ.

इसी तरह खाटू श्याम बाबा के रूप में पूजे जाने वाले बर्बरीक से जुड़ी कथाएं भी भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी हैं. मान्यता है कि महाभारत युद्ध के दौरान श्रीकृष्ण की कृपा से बर्बरीक का शीश युद्ध समाप्त होने तक युद्ध का साक्षी बना रहा.

क्या भगवान श्रीकृष्ण का हृदय आज भी जगन्नाथ पुरी में मौजूद है?
भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा एक बेहद रहस्यमयी और चर्चित प्रसंग जगन्नाथ पुरी से जुड़ा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ को भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का ही स्वरूप माना जाता है. एक लोकप्रिय लोककथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के शरीर त्यागने के बाद उनके शरीर का अंतिम संस्कार किया गया, लेकिन उनका एक दिव्य अंश पूरी तरह नष्ट नहीं हुआ. बाद में उसे समुद्र में प्रवाहित कर दिया गया.

कथा के अनुसार, राजा इंद्रद्युम्न को भगवान ने स्वप्न में दर्शन दिए और समुद्र से प्राप्त दिव्य लकड़ी से भगवान की मूर्तियां बनवाने का निर्देश दिया. इसके बाद विश्वकर्मा एक वृद्ध बढ़ई के रूप में राजा के पास आए और मूर्तियां बनाने की जिम्मेदारी ली. उन्होंने शर्त रखी कि जब तक उनका काम पूरा न हो जाए, तब तक कोई भी कमरे का दरवाजा नहीं खोलेगा.

लेकिन कई दिनों तक अंदर से कोई आवाज न आने पर राजा और रानी चिंतित हो गए. जब दरवाजा खोला गया तो वहां मूर्तियां अधूरी अवस्था में थीं और वृद्ध बढ़ई वहां से गायब हो चुके थे. मान्यता है कि तभी से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की मूर्तियां उसी विशेष स्वरूप में स्थापित की गईं.

जगन्नाथ पुरी में एक विशेष परंपरा नवकलेवर की भी है, जिसमें निश्चित समय के अंतराल पर भगवान की प्रतिमाओं के लिए नई दारु प्रतिमाएं बनाई जाती हैं और एक अत्यंत गोपनीय धार्मिक प्रक्रिया के तहत पुराने स्वरूप से एक पवित्र तत्व नए स्वरूप में स्थानांतरित किया जाता है. इसी पवित्र तत्व को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं. कुछ लोककथाओं में इसे भगवान श्रीकृष्ण के हृदय से भी जोड़ा जाता है. हालांकि, यह धार्मिक आस्था और परंपरा का विषय है.

Related Posts

WhatsApp Profile में जुड़ा नया फीचर, फेसबुक की तरह लगा सकेंगे Cover Photo

नई दिल्ली WhatsApp अपने प्लेटफॉर्म को तेजी से नए-नए फीचर्स के साथ अपडेट कर रहा है। खबर है कि वॉट्सऐप अब एक ऐसा फीचर ला रहा है, जिससे यूजर्स अपनी…

1 नवंबर को बन रहा रवि पुष्य योग, प्रॉपर्टी और बिजनेस में निवेश के लिए खास संयोग

भोपाल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि पर रविवार, एक नवंबर को रवि पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

चंडीगढ़ में अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, आखिरी स्लम कॉलोनी को हटाने की तैयारी

चंडीगढ़ में अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, आखिरी स्लम कॉलोनी को हटाने की तैयारी

चुनावी तैयारी में जुटी AAP, पहली सूची में 30 से 35 उम्मीदवारों के नामों का हो सकता है ऐलान

चुनावी तैयारी में जुटी AAP, पहली सूची में 30 से 35 उम्मीदवारों के नामों का हो सकता है ऐलान

2027 के चुनावी रण के लिए कांग्रेस का मंथन, दिल्ली में खरगे की अध्यक्षता में जुटेंगे सांसद

2027 के चुनावी रण के लिए कांग्रेस का मंथन, दिल्ली में खरगे की अध्यक्षता में जुटेंगे सांसद

भारत में हॉकी विश्व कप 2030 कराने की तैयारी, मेजबानी के लिए पंजाब समेत तीन राज्य आगे

भारत में हॉकी विश्व कप 2030 कराने की तैयारी, मेजबानी के लिए पंजाब समेत तीन राज्य आगे

PU में गाड़ियों की आवाजाही से बढ़ी परेशानी, रोक नहीं लगी तो सड़कों पर उतरेंगे छात्र

PU में गाड़ियों की आवाजाही से बढ़ी परेशानी, रोक नहीं लगी तो सड़कों पर उतरेंगे छात्र

अंबेडकर प्रतिमा पर तीसरी बार हमला, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

अंबेडकर प्रतिमा पर तीसरी बार हमला, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581