TMC Crisis: ममता बनर्जी ने सभी फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन और कमेटियां की भंग, सियासत तेज

कोलकत्ता 
 पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टूटने और महाराष्ट्र की तरह पार्टी के सिंबल पर कब्जे की खबरों के बीच ममता बनर्जी के सबसे वफादार शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने मोर्चा संभाल लिया है. टीएमसी के पहले निर्वाचित विधायक और विधानसभा में मनोनीत नेता प्रतिपक्ष (LoP) चट्टोपाध्याय ने मंगलवार को दल-बदल और बगावत की सभी अटकलों को खारिज कर दिया. उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस का बहुमत आज भी ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़ा है. संगठन पर पार्टी के पुराने वफादारों का ही नियंत्रण रहेगा। 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने बड़ा एक्शन लेते हुए तृणमूल कांग्रेस की सभी कमेटियों, पार्टी से जुड़े संगठनों को तत्काल प्रभाव से विलय कर दिया है. टीएमसी ने कहा है कि सभी कमेटियों और फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन का पुनर्गठन किया जाएगा। 

टीएमसी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा है कि गहन विचार-विमर्श के बाद, यह निर्णय लिया गया है कि पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की सभी समितियां, साथ ही इसके सभी अनुषांगिक संगठन, तत्काल प्रभाव से भंग माने जाएंगे। 

TMC ने कहा कि पार्टी हर स्तर पर आत्म-निरीक्षण, कार्य-निष्पादन समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन की एक व्यापक प्रक्रिया चलाएगी. इस प्रक्रिया के निष्कर्षों के आधार पर मुख्य संगठन और सभी अनुषांगिक संगठनों की संगठनात्मक संरचना का पुनर्गठन किया जाएगा और उचित समय पर इसकी घोषणा की जाएगी। 

पार्टी अपने संगठन को सुदृढ़ बनाने और उसे नए उत्साह तथा उद्देश्य के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने हेतु पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बता दें कि बंगाल विधानसभा में हार के बाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को TMC में फूट का सामना करना पड़ रहा है. कुछ आनुषांगिक संगठन आलाकमान के फैसले से इतर दूसरे गुट के फैसलों के साथ सहमति जता रहे हैं।

टीएमसी ने भंग की सारी कमेटियां और संगठन
तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में अपनी सभी कमेटियों के साथ-साथ अपने सभी फ्रंटल संगठनों को भी तत्काल प्रभाव से भंग करने का फैसला किया है. पार्टी ने कहा कि अब वह एक विस्तृत आंतरिक समीक्षा करेगी, जिसमें सभी स्तरों पर कामकाज और संगठनात्मक कार्यप्रणाली का मूल्यांकन शामिल होगा. इस प्रक्रिया के नतीजों के आधार पर, मुख्य संगठन और उससे जुड़े सभी विंग्स के लिए एक नए सिरे से तैयार संगठनात्मक ढाँचे की घोषणा बाद में की जाएगी। 

पार्टी ने एक बयान में कहा, ‘गहन विचार-विमर्श के बाद, यह फैसला किया गया है कि पश्चिम बंगाल में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की सभी कमेटियां, और साथ ही उसके सभी फ्रंटल संगठन, तत्काल प्रभाव से भंग माने जाएँगे. पार्टी हर स्तर पर आत्म-निरीक्षण, कामकाज की समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन का एक व्यापक अभियान चलाएगी. इस प्रक्रिया से सामने आए नतीजों के आधार पर, मुख्य संगठन और सभी फ्रंटल संगठनों के संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन किया जाएगा और उचित समय पर इसकी घोषणा की जाएगी। 

उन्होंने आगे कहा, ‘पार्टी अपने संगठन को मज़बूत करने और उसे नए जोश और उद्देश्य के साथ भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करने के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। 

TMC के 16 फ्रंटल ऑर्गनाइजेशन हैं.
टीएमसी की फ्रंटल संगठन की संख्या लगभग 16 है. आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ये संगठन पार्टी के विभिन्न वर्गों जैसे युवा, महिला, छात्र, मजदूर आदि को संगठित करते हैं।  

कमेटियों की बात करें तो इसमें TMC की मुख्य कार्यकारी कमेटी है. इसके अलावा कोर कमेटी, स्टेट कमेटी, जिला और ब्लॉक कमेटी और अनुशासन समिति है. अब इन सभी का विलय कर दिया गया है और कमेटियों का गठन किया जाएगा।  

पैसे और सत्ता के दम पर बगावत कराने की कोशिश : शोभनदेव
शोभनदेव चट्टोपाध्याय का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब निष्कासित और बागी नेताओं (ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा) के गुट 20 से 50 विधायकों के समर्थन का दावा कर रहे हैं. शोभनदेव ने इन दावों के पीछे की इनसाइड स्टोरी को उजागर करते हुए गंभीर आरोप लगाये। 

नेता विपक्ष के पद के लिए 58 विधायकों ने रीताब्रता बनर्जी का समर्थन किया
टीएमसी विधायकों की बैठक के बाद 58 सदस्यों के हस्ताक्षरों वाला एक संयुक्त पत्र विधानसभा स्पीकर को सौंपा गया है, जिसमें विपक्ष के नेता के तौर पर रीतातब्रता बनर्जी के नाम का प्रस्ताव किया गया है। 

 टीएमसी के करीब 60 विधायक बैठक के लिए विधानसभा पहुंचे
टीएमसी के 80 विधायकों में से लगभग 60 विधायक बैठक के लिए पश्चिम बंगाल विधानसभा पहुंचे, जिससे इस बात की अटकलें तेज़ हो गई हैं कि वे शायद विधायक दल पर नियंत्रण हासिल करने और विपक्ष के नेता के पद पर दावा ठोकने की कोशिश कर सकते हैं। 

तो ममता बनर्जी के पास सिर्फ 20 टीएमसी विधायकों का सपोर्ट?
रिताब्रता बनर्जी ने 59 टीएमसी विधायकों के समर्थन का दावा किया है. ऐसे में अगर बनर्जी के बताए नंबर सही हैं, तो इससे विधानसभा के राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव दिखेगा, जिससे पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास सिर्फ 20 MLAs का सपोर्ट बचेगा. हालांकि, इन दावों को अलग से वेरिफाई नहीं किया गया है, और तृणमूल कांग्रेस ने भी अब तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। 

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