‘पुस्तकों की आवश्यकता कभी खत्म नहीं होगी’, मंत्री परमार ने बताया ज्ञान और संदर्भों का सबसे विश्वसनीय स्रोत

प्रामाणिक ज्ञान और संदर्भों के लिए पुस्तकों की आवश्यकता सदैव बनी रहेगी : मंत्री परमार

हिंदी ग्रंथ अकादमी के 56वें स्थापना दिवस समारोह में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित पुस्तक निर्माण पर दिया गया जोर
शिक्षाविदों का किया सम्मान, अकादमी की 55 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को सराहा

भोपाल

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी द्वारा प्रकाशित पुस्तकें गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ मूल्य पर उपलब्ध हैं। मंत्री परमार ने इन पुस्तकों की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास करने तथा अकादमी की वेबसाइट पर पुस्तकों की ऑनलाइन प्रतियां उपलब्ध कराने को कहा। परमार ने विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर भी बल दिया, जिससे प्राप्त सुझावों के आधार पर पुस्तकों में आवश्यक सुधार एवं संशोधन किए जा सकें। उन्होंने कहा कि परिवर्तनशीलता और निरंतर सुधार ही संस्थागत प्रगति का आधार हैं। मंत्री परमार भोपाल स्थित मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभागार में मध्यप्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के 56वें स्थापना दिवस समारोह में सहभागिता कर संबोधित कर रहे थे।

मंत्री परमार ने मप्र हिंदी ग्रंथ अकादमी की 55 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अकादमी परिवार को शुभकामनाएं एवं बधाई दी। उन्होंने देश में उच्च शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण पुस्तकों के निर्माण में अकादमी के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। मंत्री परमार ने कहा कि पुस्तक लेखन एक कठिन और उत्तरदायित्वपूर्ण कार्य है तथा लेखन का मूल भाव भारतीय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश करते हुए अकादमी का कार्य एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है।

मंत्री परमार ने कहा कि सतत कार्य करना अकादमी का स्वभाव बन चुका है। उन्होंने प्रश्नपत्र निर्माण में प्राध्यापकों की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए समग्र अध्ययन-अध्यापन को मूल्यांकन प्रक्रिया से जोड़ने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पुस्तकों का महत्व कभी समाप्त नहीं होगा तथा प्रामाणिक ज्ञान और संदर्भों के लिए पुस्तकों की आवश्यकता सदैव बनी रहेगी। मंत्री परमार ने पुस्तक लेखन से जुड़े सभी लेखकों एवं शिक्षाविदों का आभार भी व्यक्त किया।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने कहा कि हिंदी ग्रंथ अकादमी के योगदान से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने देशभर में अग्रणी पहचान स्थापित की है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि की निरंतरता बनाए रखने के लिए सतत प्रयास आवश्यक हैं। राजन ने अकादमी की पुस्तकों की पहुंच राज्य की सीमाओं से बाहर अन्य राज्यों तक बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पुस्तक लेखन प्रक्रिया से जुड़े सभी शिक्षाविदों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए नई पीढ़ी के निर्माण में उनके योगदान की सराहना की। आयुक्त उच्च शिक्षा प्रबल सिपाहा ने विद्यार्थियों को सत्रानुरूप समय पर पुस्तकें उपलब्ध कराने में अकादमी की भूमिका की सराहना करते हुए विभागीय अपेक्षाओं के अनुरूप निरंतर प्रगति करने पर जोर दिया। अकादमी के संचालक अशोक कड़ेल ने अकादमी की 55 वर्षों की यात्रा का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए उसकी उपलब्धियों एवं भावी कार्ययोजनाओं पर प्रकाश डाला। कड़ेल ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत पुस्तक निर्माण के लिए 375 से अधिक नए लेखकों को अवसर उपलब्ध कराया गया है और अकादमी द्वारा भारतीय ज्ञान परम्परा का समावेश करते हुए विभिन्न विषयों की 1 हजार 336 शीर्षक की 1 करोड़ 10 लाख 99 हजार 512 प्रतियों का प्रकाशन किया गया। उन्होंने जानकारी दी कि 26 विषयों में भारतीय ज्ञान परम्परा संदर्भ पुस्तके तैयार की जा रही है।

स्थापना दिवस समारोह में अकादमी द्वारा प्रकाशित “प्रगति पथ” ब्रोशर तथा द्विमासिक पत्रिका “रचना” के नवीन अंक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत उच्च शिक्षा के लिए स्नातक, स्नातकोत्तर एवं संदर्भ ग्रंथों की पांडुलिपियों के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षाविदों का शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मान किया गया।

ये शिक्षाविद् हुए सम्मानित

स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत स्नातक, स्नातकोत्तर एवं संदर्भ ग्रंथों की पांडुलिपियों के निर्माण में अकादमी को उत्कृष्ट एवं उल्लेखनीय सहयोग प्रदान करने वाले शिक्षाविदों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति के अध्यक्ष डॉ. रविन्द्र कान्हेरे, मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सभापति डॉ. खेमसिंह डहेरिया, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के पूर्व आचार्य डॉ. राकेश ढण्ड तथा प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकौशल कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, जबलपुर के प्राचार्य डॉ. अलकेश चतुर्वेदी को शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर सम्मानित किया गया। इन शिक्षाविदों के योगदान को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित उच्च शिक्षा सामग्री के विकास में महत्वपूर्ण बताया गया।

कार्यक्रम का संचालन अकादमी के संयुक्त संचालक डॉ. उत्तम सिंह चौहान ने किया तथा अकादमी के सहायक संचालक (प्रभारी) राम विश्वास कुशवाहा ने आभार व्यक्त किया। समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, कुलसचिव, महाविद्यालयों के प्राचार्य, प्राध्यापक, शिक्षाविद, साहित्यकार, लेखक एवं विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

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