ब्राजील-अमेरिका में बढ़ा तनाव, चुनावी हस्तक्षेप के आरोपों पर आमने-सामने दोनों देश

ब्रासीलिया
ब्राजील ने दो अमेरिकी अधिकारियों के वीजा अनुरोधों को ठुकरा दिया है। ये दोनों अमेरिकी अधिकारी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर ब्राजील की चुनावी प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के लिए वहां जाने की योजना बना रहे थे। ट्रंप कई बार ब्राजील के वर्तमान वामपंथी राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने ब्राजील पर 50 प्रतिशत का टैरिफ भी लगाया था, जिसे बाद में कम कर दिया गया। अब ब्राजील के इस कदम से ट्रंप का भड़कना तय माना जा रहा है। ऐसी आशंका है कि ट्रंप एक बार फिर ब्राजील पर भारी टैरिफ लगा सकते हैं।

ब्राजील के चुनाव को प्रभावित कर रहा अमेरिका?
ब्राजील के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि अमेरिका की योजना देश में अक्तूबर में होने वाले चुनाव को प्रभावित करने की है। इस चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा का मुकाबला दक्षिणपंथी झुकाव वाले सीनेटर फ्लेवियो बोल्सोनारो से होगा। फ्लेवियो बोल्सोनारो ट्रंप के सहयोगी और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। जायर बोल्सोनारो पिछला चुनाव लूला से हार गए थे।

ब्राजील ने किन अमेरिकी अधिकारियों का वीजा ठुकराया
ब्राजील ने जिन अमेरिकी अधिकारियों का वीजा अनुरोध ठुकराया है, उनमें विदेश विभाग के 'ब्यूरो ऑफ डेमोक्रेसी, ह्यूमन राइट्स एंड लेबर' की असिस्टेंट सेक्रेटरी राइली एम बार्न्स और डिप्टी असिस्टेंट सेक्रेटरी सैमुअल सैमसन शामिल थे। उन्होंने कहा कि वीजा को खारिज करने का फैसला ऐसे सबूतों पर आधारित था, जो हालात का राजनीतिक फायदा और ब्राजील की चुनाव प्रणाली को कमजोर करने की एक नई कोशिश की ओर इशारा करते हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग ने ब्राजील के आरोपों को खारिज किया
इससे पहले शनिवार को, अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि बार्न्स और सैमसन 27 जुलाई से 30 जुलाई तक ब्रासीलिया का दौरा करेंगे। वे सरकारी अधिकारियों, धार्मिक नेताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों से मिलकर चुनाव की निष्पक्षता, धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चर्चा करेंगे। प्रवक्ता ने ब्राज़ील के चुनावों को कमज़ोर करने की किसी भी "साज़िश" की बात को खारिज कर दिया। उन्होंने ऐसे दावों को "बेबुनियाद" बताया और कहा कि यह दौरा सामान्य है और 'ब्यूरो ऑफ़ डेमोक्रेसी, ह्यूमन राइट्स एंड लेबर' के कानूनी अधिकार क्षेत्र के अनुरूप है।

पूरी दुनिया में चुनावों को प्रभावित कर रहा अमेरिका
अमेरिका पूरी दुनिया में चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। इसका ताजा सबूत लैटिन अमेरिका में देखने को मिला है। ट्रंप ने कोलंबिया के कोलंबिया के चुनाव में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति एबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला को पूरी तरह समर्थन का ऐलान किया था। इसके अलावा अमेरिका ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली की जीत के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। ट्रंप चिली के राष्ट्रपति जोस एंटोनियो कास्ट का भी समर्थन करते हैं।

जायर बोल्सोनारो ने चुनाव प्रणाली पर उठाए सवाल
जायर बोल्सोनारो ने 2022 के चुनाव से पहले ब्राजील की चुनावी प्रणाली पर भरोसा कम करने की बार-बार कोशिश की थी। उनका यह काम ठीक वैसा ही था, जैसा डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन की जीत के वक्त किया था। उस समय बाइडन के कार्यकाल में अमेरिकी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी के निदेशक ने बोल्सोनारो प्रशासन से कहा था कि वे ब्राजील की वोटिंग प्रणाली पर शक करना बंद करें। फिर भी 2022 के चुनावों में हार के बाद बोल्सोनारो ने विदेशी राजनयिकों को बुलाकर बिना किसी सबूत के आरोप लगाए कि ब्राजील की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रणाली में धोखाधड़ी हो सकती है।

बोल्सोनारो के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध, जेल की सजा
उनकी यह चाल उल्टी पड़ गई। ब्राजील में चुनावों की देखरेख करने वाली सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट ने बाद में फैसला सुनाया कि बोल्सोनारो ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया है और उन्हें 2030 तक किसी भी सार्वजनिक पद के लिए चुनाव लड़ने से रोक दिया। बाद में बोल्सोनारो को चुनाव नतीजों को पलटने और सत्ता में बने रहने की साजिश रचने के लिए दोषी ठहराया गया और 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई। वे अभी नजरबंदी (हाउस अरेस्ट) में अपनी सजा काट रहे हैं। अब, उनके बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो ने देश की चुनावी प्रणाली पर फिर से शक पैदा कर दिया है, जो सोशल मीडिया पर फैल रहा है।

 

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