पढ़ाई जरूरी है, क्योंकि पूरी जिंदगी नहीं खेल सकते: PV सिंधू ने दिया प्रेरणादायक संदेश

गुरुग्राम 
दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय बैडमिंटन स्टार पी वी सिंधू ने इस बात पर जोर दिया कि उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए पढ़ाई करना बेहद जरूरी है और पढ़ाई को नजरअंदाज करके सिर्फ खेल पर ध्यान देना बहुत जोखिम भरा है क्योंकि एक ही चोट से खेल करियर खत्म हो सकता है.

पूर्व विश्व चैंपियन ने डीपीएस इंटरनेशनल में एक बातचीत के दौरान शिक्षाविद देवयानी जयपुरिया से बात करते हुए ये बातें कहीं. हैदराबाद की इस खिलाड़ी ने अपनी बात को समझाने के लिए अपनी जिंदगी के कई पहलुओं का जिक्र किया. इनमें 2016 के ओलंपिक से पहले का वह दौर भी शामिल है जब वह अपने बाएं पैर में ‘स्ट्रेस फ्रैक्चर’ होने के कारण परेशान थीं और उन्हें खुद पर शक होने लगा था.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं इतने साल से खेल रही हूं. कभी न कभी तो आपको ‘रिटायर’ होना ही पड़ता है. और यही सच है. आप 45, 50 या 60 साल की उम्र तक शीर्ष स्तर पर नहीं खेल सकते.’’

सिंधू ने राष्ट्रीय कोच पुलेला गोपीचंद की बात का समर्थन किया जिन्होंने उभरते हुए खिलाड़ियों के माता-पिता से शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही थी. इस खिलाड़ी ने कहा, ‘‘आपको इस बात को स्वीकार करना ​​ही होगा कि शिक्षा हमेशा पूरी जिंदगी आपके साथ रहेगी और हमेशा आपके पास रहेगी.’’

उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी सोने की चम्मच लेकर पैदा नहीं होता और आपको कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, चाहे वह पढ़ाई में हो या खेल में. पढ़ाई और खेल दोनों ही अहम हैं. मैंने अपना एमबीए किया है. इसलिए मुझे पता है कि यह आसान नहीं है. आप सुबह ट्रेनिंग के लिए जाते हैं, वापस आते हैं, पढ़ाई करते हैं, फिर शाम के सत्र के लिए जाते हैं.’’

सिंधू ने कहा, ‘‘सच तो यही है कि खेल एक बहुत छोटी सी चीज है. शिक्षा हमेशा आपके साथ रहेगी. खेल भी जरूरी है, लेकिन इतना भी नहीं कि आप अपनी पढ़ाई पूरी तरह से रोक दें.’’ तीस साल की यह खिलाड़ी अभी ब्रेक पर है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बमबारी के चलते हवाई क्षेत्र बंद करने की वजह से उन्हें कुछ दिनों के लिए दुबई में रुकना पड़ा था.

उन्होंने कहा कि खेल के दौरान लगने वाली चोटों से उबरना मुश्किल हो सकता है इसलिए उन्होंने उभरते हुए खिलाड़ियों से पढ़ाई का एक विकल्प अपने पास रखने की बात कही. सिंधू ने कहा, ‘‘हो सकता है मेरी बात थोड़ी कड़वी लगे, शायद अभी उन्हें यह बात समझ नहीं आए, लेकिन जिंदगी के बाद के पड़ाव में उन्हें यह जरूर समझ आएगा कि पढ़ाई भी उतनी ही जरूरी है. खेल कभी-कभी बहुत जोखिम भरा हो सकता है. इसमें कभी भी चोट लग सकती है."

उन्होंने कहा, ‘‘चोट से आपका करियर खत्म हो सकता है, आपकी सर्जरी हो सकती है। और चोटें बताकर नहीं आतीं, बस हो जाती हैं। ऐसे समय में, आपको यह पक्का करना होता है कि आप जिंदगी में हर चीज के लिए तैयार हैं.’’

उन्होंने 2015 को याद किया जब उनके बाएं पैर में ‘स्ट्रेस फ्रैक्चर’ हो गया था जिससे उनका करियर खत्म होने का खतरा पैदा हो गया था और उन्हें छह महीने तक खेल से बाहर रहना पड़ा था. इसके चलते 2016 के ओलंपिक से पहले उनके पास तैयारी के लिए बहुत कम समय बचा था। इसके बावजूद रियो डि जिनेरियो में हुए उन खेलों में उन्होंने रजत पदक जीता.

उन्होंने कहा, ‘‘मामला गंभीर था. कई हफ्तों तक दर्द के साथ खेलने के बाद मैं ठीक समय पर डॉक्टर के पास पहुंच पाई. मेरे मन में खुद को लेकर शक पैदा हुआ था कि क्या मैं दोबारा खेल पाऊंगी या नहीं.’’

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