सरकार की झोली में आएगी बड़ी रकम, RBI बोर्ड ने ऐतिहासिक डिविडेंड पर लगाई मुहर

नई दिल्ली

ग्लोबल टेंशन के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सरकार के लिए संकटमोचक बनेगा । दरअसल, RBI की ओर से इस वर्ष सरकार को अब तक का सबसे अधिक डिविडेंड दिए जाने की दी मंजूरी । ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार सरकार को इस हफ्ते रिजर्व बैंक से रिकॉर्ड 2.87 ट्रिलियन रुपये रुपये का सरप्लस ट्रांसफरमिलेगा । RBI बोर्ड शुक्रवार को इस डिविडेंड को मंजूरी दी । बता दें कि RBI ने 2024-25 के लिए केंद्र सरकार को 2.69 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड डिविडेंड दिया था जो इससे पिछले वर्ष 2023-24 के 2.11 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक था।

बहुत से लोगों को लगता है कि आरबीआई किसी निजी कंपनी की तरह अपने शेयरधारकों को डिविडेंड देता होगा, लेकिन ऐसा नहीं है. आरबीआई पूरी तरह देश का केंद्रीय बैंक है और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 47 के तहत यह तय है कि अपने खर्च और जरूरी रिजर्व फंड अलग रखने के बाद जो अतिरिक्त पैसा बचेगा, उसे केंद्र सरकार को ट्रांसफर किया जाएगा. इसी अतिरिक्त रकम को सरप्लस ट्रांसफर या डिविडेंड कहा जाता है. सरकार के लिए यह गैर कर राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है. इस पैसे का इस्तेमाल वित्तीय घाटा कम करने, सड़क, रेलवे और हाईवे जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड करने और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च बढ़ाने के लिए किया जाता है। 

RBI आखिर कमाई कैसे करता है
आरबीआई आम बैंकों की तरह लोगों को लोन नहीं देता, लेकिन उसके पास कमाई के कई बड़े स्रोत होते हैं। 

    सबसे बड़ा जरिया विदेशी मुद्रा भंडार यानी फॉरेक्स रिजर्व है. आरबीआई अरबों डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार को अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड जैसी सुरक्षित जगहों पर निवेश करता है, जिससे उसे ब्याज के रूप में भारी कमाई होती है। 

    इसके अलावा डॉलर और रुपये की खरीद-बिक्री से भी केंद्रीय बैंक को फायदा होता है. जब बाजार में रुपये पर दबाव बढ़ता है, तब आरबीआई डॉलर बेचकर बाजार को स्थिर करने की कोशिश करता है. इसी तरह के फॉरेक्स ऑपरेशंस से भी मुनाफा कमाया जाता है। 

    सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज और नोट छापने की लागत और उसकी वास्तविक वैल्यू के बीच का अंतर भी आरबीआई की कमाई का हिस्सा होता है। 

इस बार रिकॉर्ड डिविडेंड की वजह क्या है
वित्त वर्ष 2026 के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 10 प्रतिशत की कमजोरी देखने को मिली. इससे आरबीआई की विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों का मूल्य बढ़ा और उसकी बैलेंस शीट मजबूत हुई. इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने रुपये की तेज गिरावट को रोकने के लिए डॉलर बेचकर बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप किया. इससे भी आरबीआई को अच्छा फायदा हुआ. भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़कर करीब 688 अरब डॉलर तक पहुंच गया. निवेश से बेहतर रिटर्न और फॉरेक्स ऑपरेशंस की मजबूत कमाई ने केंद्रीय बैंक के सरप्लस को और बढ़ाने में मदद की। 

सरकार के लिए क्यों अहम है यह रकम
पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई से मिलने वाला डिविडेंड तेजी से बढ़ा है और यह सरकार के लिए बेहद अहम राजस्व स्रोत बन चुका है. पिछले तीन वित्त वर्षों में यह रकम तीन गुना से ज्यादा बढ़ चुकी है. अगर इस बार सरकार को 3.5 लाख करोड़ रुपये तक का डिविडेंड मिलता है, तो इससे सरकार को उधारी कम लेने में मदद मिल सकती है. साथ ही वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखने और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च जारी रखने में भी राहत मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी आरबीआई की ओर से सरकार को ऊंचे स्तर का डिविडेंड मिलता रह सकता है, हालांकि केंद्रीय बैंक ने अभी तक आधिकारिक तौर पर संभावित भुगतान पर कोई टिप्पणी नहीं की है। 

रिजर्व बैंक केैसे करता है कमाई?
RBI अपनी विदेशी मुद्रा संपत्तियों, सरकारी बॉन्ड निवेश और करेंसी छपाई से होने वाली आय के जरिए यह सरप्लस कमाता है। बहरहाल, यह सरप्लस ऐसे समय में मिलने जा रहा है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इससे भारत का आयात बिल बढ़ने, चालू खाते के घाटे पर दबाव बनने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज होने की आशंका है। इसी दबाव के बीच RBI का यह बड़ा भुगतान सरकार के लिए राहत का काम करेगा।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
PGIM इंडिया एसेट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख पुनीत पाल के मुताबिक बॉन्ड मार्केट पहले से ही RBI से मिलने वाले लगभग 3 ट्रिलियन रुपये के भुगतान को अपनी कीमतों में शामिल कर चुका है। उन्होंने कहा कि ज्यादा डिविडेंड राजकोषीय प्रबंधन में मदद कर सकता है लेकिन इसका तब तक कोई खास असर नहीं पड़ेगा जब तक कि यह काफी ज्यादा न हो।

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