भारत की नई राफेल डील का बड़ा प्लान, 22 विमान सीधे आएंगे और 90 देश में होंगे निर्मित

 नई दिल्ली

भारतीय रक्षा क्षेत्र और वायु सेना (IAF) के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है. भारत सरकार ने फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट्स (Rafale Fighter Jets) खरीदने की मेगा डील की दिशा में सबसे बड़ा और औपचारिक कदम उठा लिया है। 

रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस सरकार को लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR – Letter of Request) जारी कर दिया है, जो सरकारी स्तर (G-to-G) पर होने वाले रक्षा समझौतों की आधिकारिक शुरुआत है. लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली यह मेगा डील भारत का अब तक का सबसे बड़ा फाइटर जेट खरीद कार्यक्रम है। 

यह सौदा न केवल भारतीय वायु सेना की घटती 'स्कवाड्रन क्षमता' को मजबूत करेगा, बल्कि देश को एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग के मामले में एक वैश्विक हब के रूप में स्थापित करेगा. इस सौदे की सबसे खास बात यह है कि यह 'बाय ग्लोबल, मेक इन इंडिया' नीति के तहत आ रहा है, जिसका सीधा असर भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था, रक्षा उत्पादन और रोजगार के अवसरों पर पड़ेगा। 

क्यों खास है 114 राफेल की नई डील?
यह नई राफेल डील साल 2016 में हुई 36 राफेल विमानों की खरीद से बिल्कुल अलग और कई गुना बड़ी है. पिछली बार भारत ने सभी 36 विमान फ्रांस से तैयार स्थिति (Fly-away condition) में खरीदे थे. लेकिन इस बार भारत सरकार की प्राथमिकता देश को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है. इस नई मेगा डील की सबसे मुख्य विशेषताएं हैं…

22 से 24 जेट्स फ्रांस से तैयार होकर आएंगे: वायुसेना की आपातकालीन जरूरतों को देखते हुए लगभग 22 से 24 राफेल लड़ाकू विमान सीधे फ्रांस में डसॉल्ट एविएशन की मैरिनेक फैक्ट्री से पूरी तरह तैयार स्थिति में उड़कर भारत आएंगे. इससे वायुसेना को तुरंत आधुनिक कॉम्बैट क्षमता मिलेगी। 

90 से 94 जेट्स का निर्माण भारत में होगा: इस डील की असली ताकत यह है कि कुल 114 विमानों में से करीब 90 से 94 फाइटर जेट्स का उत्पादन भारत में किया जाएगा. यह इतिहास में पहली बार होगा जब राफेल जैसे विश्वस्तरीय 4.5 जेनरेशन के लड़ाकू विमान का निर्माण फ्रांस की धरती से बाहर किसी अन्य देश में किया जाएगा। 

50% स्वदेशी पुर्जों का होगा इस्तेमाल: भारत में बनने वाले इन राफेल विमानों में कम से कम 50 प्रतिशत सामग्री, तकनीक और पुर्जे पूरी तरह से भारतीय यानी 'स्वदेशी' होंगे. इसके साथ ही, इस समझौते के तहत भारत को यह अधिकार और तकनीकी पहुंच मिलेगी कि वह अपनी स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों (जैसे अस्त्र और ब्रह्मोस मिसाइल को राफेल जेट में सीधे इंटीग्रेट कर सके) .

कौन सी भारतीय कंपनियां बनेंगी डसॉल्ट एविएशन की पार्टनर?
फ्रांस की दिग्गज एयरोस्पेस कंपनी डसॉल्ट एविएशन अकेले भारत में इतने बड़े पैमाने पर विमानों का निर्माण नहीं कर सकती. इसके लिए उसे भारतीय रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों के साथ हाथ मिलाना होगा। 

साझेदारी की रेस में सबसे आगे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (Tata Advanced Systems Limited – TASL) का नाम है. जून 2025 में ही डसॉल्ट एविएशन और टाटा (TASL) ने राफेल के फ्यूजलेज (विमान का मुख्य धड़ या बॉडी) को भारत में बनाने के लिए एक बड़े रणनीतिक समझौते की घोषणा की थी। 

इसके अलावा, भारत की सरकारी रक्षा कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिसके पास लड़ाकू विमान बनाने का दशकों पुराना अनुभव है। 

निजी क्षेत्र की अन्य बड़ी कंपनियां जैसे लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा डिफेंस और भारत फोर्ज भी इस विशाल सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकती हैं. ये भारतीय कंपनियां राफेल के विंग्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार कंपोनेंट्स, केबिन और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों के निर्माण में डसॉल्ट के साथ मिलकर काम करेंगी। 

कहां होगा इन फाइटर जेट्स का प्रोडक्शन और मेंटेनेंस?
90 से अधिक राफेल विमानों का उत्पादन भारत के किन शहरों में होगा, इसे लेकर औद्योगिक गलियारों में भारी उत्साह है. सबसे बड़ा हब हैदराबाद बनने जा रहा है, जहां टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और डसॉल्ट एविएशन मिलकर राफेल के फ्यूजलेज और मुख्य बॉडी पार्ट्स के निर्माण के लिए एडवांस्ड फैसिलिटी स्थापित कर रहे हैं। 

इसके अलावा, विमानों की अंतिम असेंबली लाइन (Final Assembly Line) को लेकर भी कयास जारी हैं, जिसके लिए महाराष्ट्र या कर्नाटक के रक्षा औद्योगिक पार्कों पर विचार किया जा सकता है। 

उत्पादन के साथ-साथ, विमानों के रख-रखाव को लेकर भी भारत ने बाजी मार ली है. डसॉल्ट एविएशन ने उत्तर प्रदेश के नोएडा के पास एक अत्याधुनिक 'मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल' (MRO) फैसिलिटी स्थापित की है, जिसका नाम DAMROI (Dassault Aviation Maintenance, Repair and Overhaul India) है। 

यह सेंटर पहले से ही चालू हो चुका है. वर्तमान में भारतीय वायु सेना के पास मौजूद मिराज-2000 और 36 राफेल विमानों की सर्विसिंग का काम संभाल रहा है. भविष्य में भारत में बनने वाले 94 राफेल विमानों की सर्विसिंग और अपग्रेडेशन भी इसी एमआरओ हब के जरिए देश के भीतर ही संभव होगी। 

रक्षा क्षेत्र में लगेंगी कितनी नौकरियां?
यह निवेश भारतीय रोजगार बाजार के लिए एक गेम चेंजर साबित होने वाला है. रक्षा विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक इस मेगा प्रोजेक्ट से भारत में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों नौकरियां पैदा होंगी। 

    हाई-टेक इंजीनियरिंग नौकरियां: विमान के डिजाइन, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और असेंबली के लिए हजारों एयरोस्पेस इंजीनियरों, डेटा साइंटिस्ट्स और तकनीशियनों की सीधी भर्ती होगी। 

    एमएसएमई (MSME) सेक्टर को बढ़ावा: 50% स्वदेशी पुर्जों की शर्त के कारण भारत की सैकड़ों छोटी और मध्यम (MSME) कंपनियों को कलपुर्जे बनाने के ऑर्डर मिलेंगे. इससे स्थानीय स्तर पर वेल्डिंग, मशीनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में काम करने वाले कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए रोजगार की बाढ़ आ जाएगी। 

    कौशल विकास (Skill Development): फ्रांस की तकनीक भारत में ट्रांसफर (Transfer of Technology) होने से भारतीय कार्यबल को वैश्विक स्तर की हाई-टेक ट्रेनिंग मिलेगी, जो भविष्य में भारत के अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) के विकास में काम आएगी। 

भारतीय वायु सेना के लिए क्यों जीवनदान है यह सौदा?
वर्तमान में भारतीय वायु सेना (IAF) लड़ाकू विमानों की भारी किल्लत से जूझ रही है. दो मोर्चों (चीन और पाकिस्तान) पर एक साथ सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए वायुसेना के पास 42 लड़ाकू विमान स्क्वॉड्रन होने चाहिए. लेकिन पुराने मिग-21 जैसे विमानों के रिटायर होने के बाद यह संख्या घटकर वर्तमान में लगभग 29 से 30 स्क्वॉड्रन पर आ गई है। 

पड़ोसी देश पाकिस्तान जहां हाल ही में चीन से पांचवीं पीढ़ी के जे-35 (J-35) विमान लेने की फिराक में है, वहीं चीन लगातार अपनी हवाई ताकत बढ़ा रहा है. ऐसे में 114 राफेल विमानों का वायु सेना में शामिल होना भारत के पलड़े को भारी कर देगा. राफेल अपने खतरनाक एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट और 'मिट्योर' जैसी लंबी दूरी की हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए जाना जाता है। 

यह महा-डील न केवल भारत की हवाई सरहदों को अभेद्य बनाएगी, बल्कि 'मेक इन इंडिया' के तहत देश को आत्मनिर्भरता की एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी. वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंत तक इस सौदे के अंतिम कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होने की पूरी उम्मीद है। 

Related Posts

कब और किस राज्य में होगी जनगणना? सरकार ने जारी किया पूरा कार्यक्रम, जानें अपने राज्य की तारीख

नई दिल्ली देश में जनगणना 2027 की शुरुआत 25 जनवरी से होगी। ज्यादातर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनसंख्या की गिनती की…

सरदार पटेल जयंती पर एकता नगर को बड़ी सौगात, PM मोदी ने ₹400 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स का किया शुभारंभ

 एकता नगर प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के एकता नगर में शनिवार को 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी, उनका उद्घाटन किया और उन्हें देश…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

PGI में फर्जीवाड़े का मामला, मृत मरीजों के नाम पर निकाले करोड़ों रुपये; CBI करेगी कार्रवाई

PGI में फर्जीवाड़े का मामला, मृत मरीजों के नाम पर निकाले करोड़ों रुपये; CBI करेगी कार्रवाई

पंजाब पुलिस के ASI का डोप टेस्ट पॉजिटिव, नशा सेवन मामले में केस दर्ज

पंजाब पुलिस के ASI का डोप टेस्ट पॉजिटिव, नशा सेवन मामले में केस दर्ज

चंडीगढ़ में अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, आखिरी स्लम कॉलोनी को हटाने की तैयारी

चंडीगढ़ में अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, आखिरी स्लम कॉलोनी को हटाने की तैयारी

चुनावी तैयारी में जुटी AAP, पहली सूची में 30 से 35 उम्मीदवारों के नामों का हो सकता है ऐलान

चुनावी तैयारी में जुटी AAP, पहली सूची में 30 से 35 उम्मीदवारों के नामों का हो सकता है ऐलान

2027 के चुनावी रण के लिए कांग्रेस का मंथन, दिल्ली में खरगे की अध्यक्षता में जुटेंगे सांसद

2027 के चुनावी रण के लिए कांग्रेस का मंथन, दिल्ली में खरगे की अध्यक्षता में जुटेंगे सांसद

भारत में हॉकी विश्व कप 2030 कराने की तैयारी, मेजबानी के लिए पंजाब समेत तीन राज्य आगे

भारत में हॉकी विश्व कप 2030 कराने की तैयारी, मेजबानी के लिए पंजाब समेत तीन राज्य आगे

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581