कलात से CPEC तक: बलूचिस्तान की राजनीति और संघर्ष का पूरा सच

नई दिल्ली
1947 में जब भारत और पाकिस्तान के रूप में दो नए देशों का जन्म हो रहा था, उसी समय दक्षिण एशिया के एक कोने में एक ऐसा सियासी खेल खेला जा रहा था, जिसकी चिंगारी आज 70 से ज्यादा सालों बाद भी बलूचिस्तान में सुलग रही है। बलूचिस्तान का पाकिस्तान में विलय कैसे हुआ? क्या वहां के शासक भारत के साथ आना चाहते थे? और आज बलूचिस्तान पाकिस्तान और चीन (CPEC) के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है? आइए, इतिहास के उन पन्नों को पलटते हैं जो आज भी भारत-पाकिस्तान और बलूच राष्ट्रवादियों के बीच तीखी बहस का विषय हैं।

1947 का वो विभाजन: दो हिस्सों में बंटा बलूचिस्तान
अंग्रेजों के शासनकाल में आज का बलूचिस्तान दो प्रशासनिक इकाइयों में बंटा हुआ था। यह सीधे ब्रिटिश सरकार के नियंत्रण में था और इसकी सीमाएं रणनीतिक रूप से तय थीं।
इनमें सबसे बड़ी और सबसे प्रभावशाली रियासत थी 'कलात का खानत', जिसके शासक खान मीर अहमद यार खान थे।

ब्रिटिश कानून के मुताबिक, भारत की दूसरी रियासतों की तरह कलात के पास भी यह अधिकार था कि वह अंग्रेजों के जाने के बाद अपना राजनीतिक भविष्य खुद चुने। कलात के खान का तर्क था कि अंग्रेजों के साथ उनकी संधि का दर्जा बाकी रियासतों से अलग है, इसलिए वे भारत या पाकिस्तान किसी में शामिल न होकर एक स्वतंत्र राष्ट्र बने रहेंगे।

कलात की आजादी और पाकिस्तान का 'दबाव'
पाकिस्तान बनने के ठीक एक दिन बाद, 15 अगस्त 1947 को कलात ने खुद को एक स्वतंत्र देश घोषित कर दिया। अगले कुछ महीनों तक कलात और पाकिस्तान के नए हुक्मरानों के बीच बातचीत का दौर चलता रहा।

यह बातचीत मार्च 1948 में खत्म हुई, जब खान मीर अहमद यार खान ने 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' पर दस्तखत कर दिए और कलात औपचारिक रूप से पाकिस्तान का हिस्सा बन गया।

पाकिस्तान का दावा है कि यह विलय पूरी तरह कानूनी और स्वैच्छिक था। इसके उलट, कई बलूच राष्ट्रवादी संगठन और इतिहासकार मानते हैं कि पाकिस्तान ने कलात पर भारी सैन्य और राजनीतिक दबाव बनाया था, जिसके चलते खान को मजबूरन दस्तखत करने पड़े।

पहले बलूच विद्रोह की शुरुआत
विलय के तुरंत बाद ही बलूचिस्तान में विरोध की आग भड़क उठी। कलात के खान के छोटे भाई, प्रिंस अब्दुल करीम ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने अफगान सीमा के पास से पाकिस्तान सरकार के खिलाफ एक सशस्त्र विद्रोह शुरू कर दिया।

हालांकि पाकिस्तानी सेना ने इस विद्रोह को कुचल दिया, लेकिन इतिहासकार इसे 'पहला बलूच उग्रवाद' मानते हैं। तब से लेकर आज तक बलूचिस्तान में स्वायत्तता और आजादी की मांग को लेकर कई बार हिंसक आंदोलन हो चुके हैं।

क्या बलूचिस्तान भारत का हिस्सा बनना चाहता था?
यह बलूचिस्तान के इतिहास का सबसे रहस्यमयी और विवादित हिस्सा है। ऐतिहासिक दस्तावेज बताते हैं कि 1947 में कलात ने भारत सरकार से संपर्क किया था, लेकिन वह भारत में शामिल होने के लिए नहीं, बल्कि अपनी स्वतंत्र पहचान को मान्यता दिलाने और दिल्ली में एक ट्रेड एजेंसी खोलने की इजाजत मांगने के लिए था।
जब उस वक्त इस बात की अफवाहें उड़ीं, तो भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संसद में स्थिति साफ की थी।

नेहरू ने साफ शब्दों में कहा कि कलात ने कभी भी भारत में विलय का औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया। उन्होंने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि बलूचिस्तान की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि भारत में इसके विलय का सवाल ही पैदा नहीं होता।

आज भी भारतीय अभिलेखागार में ऐसा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है जो यह साबित करे कि भारत ने कभी कलात के विलय पर विचार किया था।

आज बलूचिस्तान क्यों है बेहद खास?
इतिहास के विवादों से इतर, आज बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे महत्वपूर्ण और रणनीतिक क्षेत्र बन चुका है। इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं:

विशाल भूभाग और संसाधन: यह क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, जो देश के कुल 44 फीसदी हिस्से को कवर करता है (हालांकि यहां की आबादी सबसे कम है)। यह इलाका प्राकृतिक गैस, कोयला, तांबा और सोने जैसे बेशकीमती संसाधनों से समृद्ध है।

ग्वादर पोर्ट और CPEC: अरब सागर के तट पर स्थित ग्वादर पोर्ट बलूचिस्तान में ही है। यह बंदरगाह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का मुख्य केंद्र है, जो चीन के महत्वाकांक्षी 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) का एक फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है।

शोषण का आरोप: बलूच राष्ट्रवादियों का आरोप है कि इस्लामाबाद उनके प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहा है, लेकिन इसका आर्थिक लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा। वहीं पाकिस्तान सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती है कि CPEC जैसी परियोजनाओं से इलाके में नौकरियां और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो रहा है।

Related Posts

नेतन्याहू को हटाने के लिए विपक्ष की बड़ी तैयारी, गादी आइसेनकोट बन सकते हैं नए प्रधानमंत्री

 यरूशलम इजरायल के चर्चित प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है। बीते चुनाव में उन्हें स्पष्ट जनादेश नहीं मिला। उन्हें क्या, किसी भी दल को स्पष्ट…

सरकारी पद पर रहते हुए 50 मिलियन डॉलर का करार! ट्रंप की पूर्व वकील पर उठे सवाल

वाशिंगटन  डीसी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी पूर्व वकील अलीना हब्बा मिल्डन को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। मामला 50 मिलियन डॉलर यानी करीब 440 करोड़ रुपये के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

‘सिख नरसंहार के दिन कांग्रेस ने किया जख्मों पर वार’, अमित शाह का बड़ा बयान

‘सिख नरसंहार के दिन कांग्रेस ने किया जख्मों पर वार’, अमित शाह का बड़ा बयान

AAP विधायकों के इस्तीफे पर अमन अरोड़ा और बलतेज पन्नू का पलटवार, BJP पर लगाए आरोप

AAP विधायकों के इस्तीफे पर अमन अरोड़ा और बलतेज पन्नू का पलटवार, BJP पर लगाए आरोप

पंजाब में चुनावी सरगर्मी तेज, आम आदमी पार्टी के दो विधायकों के इस्तीफे से हलचल

पंजाब में चुनावी सरगर्मी तेज, आम आदमी पार्टी के दो विधायकों के इस्तीफे से हलचल

राहुल गांधी का बड़ा बयान, साफ छवि और जीतने की क्षमता वाले नेताओं को मिलेगा टिकट

राहुल गांधी का बड़ा बयान, साफ छवि और जीतने की क्षमता वाले नेताओं को मिलेगा टिकट

मोहाली जमीन घोटाले में बड़ा खुलासा, बिल्डर को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप

मोहाली जमीन घोटाले में बड़ा खुलासा, बिल्डर को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप

भगवंत मान होंगे AAP का चेहरा, संजीव अरोड़ा को पार्टी ने बनाया उम्मीदवार

भगवंत मान होंगे AAP का चेहरा, संजीव अरोड़ा को पार्टी ने बनाया उम्मीदवार

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581