कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग, इन समुद्री रास्तों ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

नई दिल्ली
ईरान में जारी जंग ने पूरी वैश्विक सप्लाई चैन की पोल खोल दी है। एक समुद्री रास्ते के बंद हो जाने से तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाएं ऊर्जा संकट का सामना कर रही हैं। तमाम उद्योग-धंधे बंद होने की कगार पर हैं, तो वहीं परिवहन भी महंगा हो रहा है।

होर्मुज ही नहीं ये 4 स्ट्रेट्स भी हैं ग्लोबल सप्लाई की लाइफलाइन, एक पर भारत का कंट्रोल
पश्चिम एशिया की जंग में लगभग सभी देशों को ऊर्जा संकट में झोंक दिया है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए यह हालात किसी बुरे सपने से कम नहीं है। हालांकि, सरकार लगातार दूसरे देशों से तेल और गैस की सप्लाई सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के झटके से उबरना आसान नहीं है। भारत के अलावा यूरोप समेत तमाम देश भी इस बंद से परेशान है। एक 33 किमी चौड़े समुद्री मार्ग के बंद होने ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को पोल खोल कर रख दी है। हालात यह हैं कि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। ऐसे समय में दुनिया की नजर उन पांच प्रमुख स्ट्रेट्स पर पड़ी है, जहां से करीब 60 फीसदी ऊर्जा की सप्लाई होती है। इनमें से अगर किसी एक पर भी कोई परेशानी होती है, तो पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई ठप होने की नौबत आ सकती है।

    मलक्का स्ट्रेट
हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाला 'मलक्का स्ट्रेट' दुनिया का सबसे व्यस्त समुद्री जलमार्ग है। चीन जैसे देश, जो दुनिया की फैक्ट्री माने जाते हैं, उसका ज्यादातर तेल भंडार यहीं से सप्लाई होता है। दुनिया के कुल तेल परिवहन का करीब 22 से 29 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से होकर जाता है। इस रास्ते पर भारतीय जल सेना का प्रभुत्व है। चीन से यु्द्ध की स्थिति में भारतीय सेना इस रास्ते को बंद कर चीन की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकती है। भारत के लिए भी यह रास्ता आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

आम तौर पर यह स्ट्रेट शांत और सुरक्षित रहता है, लेकिन कई बार समुद्री डकैतों से जहाजों को सामना हो जाता है। 2025 में इस क्षेत्र में समुद्री डकैती के बड़े मामले सामने आए थे। हालांकि, हिंद महासागर में सबसे बड़ी नौसेना होने के नाते भारतीय जलसेना इनका सामना
करती है।

 स्वेज नहर
यूरोप और अमेरिका को एशिया से जोड़ने के लिए बनाई गई स्वेज नहर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री जलमार्गों में से एक है। तमाम जरूरी सामानों के साथ यह 7 से 10 फीसदी वैश्विक तेल व्यापार को भी नियंत्रित करता है। इस कैनाल को लेकर इतिहास में कई लड़ाइयां हुई हैं, लेकिन अब वैश्विकरण की स्थिति में सभी देश इसको खुले रखने पर ही सहमत हुए हैं। हालांकि, कई बार लाल सागर में अस्थिरता और 2021 में हुई कैनाल ब्लॉकेज जैसी समस्याओं ने दुनिया को परेशान किया है। इसके बाद भी यह नहर सुचारू रूप से चालू रही है।

अगर यह नहर किसी भी वजह से अस्थिर हो जाती है या बंद हो जाती है, तो इसके विकल्प के तौर पर जहाजों को पूरे अफ्रीका महाद्वीप का चक्कर लगाना होगा। यह रास्ता काफी खर्चीला और समय लेने वाला सिद्ध होगा।

बाव-अल-मंडेब
होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण बाव-अल-मांडेब है। यह समुद्री रास्ता लाल सागर को अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब और खाड़ी देशों से घिरा यह समुद्री मार्ग होर्मुज की तरह ही अपना एक अलग महत्व रखता है। होर्मुज के बंद होने की स्थिति में इस मार्ग से जलपरिवहन बढ़ गया है। सामान्य दिनों में यहां से 10 से 12 फीसदी वैश्विक तेल को सप्लाई किया जाता है।

वैसे तो यह जलमार्ग एक सुरक्षित रास्ता माना जाता रहा है। लेकिन ईरान समर्थित हूती विद्रोही लगातार यहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करते रहते हैं। अभी ईरान युद्ध के समय भी हूतियों ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करने की धमकी दी थी।

तुर्किए स्ट्रेट काले सागर को भूमध्य सागर से जोड़ता है। एशिया और भारत के लिए यह रास्ता इसलिए और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि होर्मुज बंद की स्थिति में भारत रूस से अपने कच्चे तेल का आयात करता है। रूस से आने वाले ज्यादातर तेल की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। इसके अलावा यह स्ट्रेट भले ही ज्यादा महत्वपूर्ण न हो, लेकिन इसका क्षेत्रीय महत्व बहुत ज्यादा है। इस समुद्री रास्ते के जरिए प्रतिदिन 2 से 3 बैरल प्रतिदिन सप्लाई होता है।

 होर्मुज स्ट्रेट
होर्मुज स्ट्रेट आज दुनिया का सबसे चर्चित समुद्री रास्ता है। वैश्विक राजनीति पिछले कई दशक से इस रास्ते पर ही केंद्रित रही है। यूएई, कतर, सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों के व्यापार के लिए महत्वपूर्ण और दुनिया की आर्थिक तरक्की के लिए जरूरी यह स्ट्रेट सामान्य स्थिति में प्रतिदिन 20 से 22 मिलियन बैरल सप्लाई करता है। एशिया से लेकर यूरोप तक लगभग हर देश इस स्ट्रेट पर किसी न किसी तरीके से निर्भर है। ऐसी स्थिति में यह दुनिया का सबसे बड़ा चोकप्वाइंट बन जाता है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की तरफ से किए गए हमले के बाद ईरान ने इसी रास्ते को बंद कर दिया है। इसके बंद होते ही, कच्चे तेल के बाजार में उफान आ गया और कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गईं।

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