तमिलनाडु में अकेले दम पर सत्ता की ओर CM विजय, कांग्रेस को किनारे करने की चर्चा तेज

चेन्नई

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तमिलनाडु में गठबंधन की सरकार बनाई जरूर है, लेकिन उनका इरादा कुछ और ही लगता है. विजय जल्दी से जल्दी अपने बूते सरकार चलाना चाहते हैं. और यह गठबंधन साथियों, खास तौर पर कांग्रेस, के लिए काफी चिंता वाली बात हो सकती है। 

एक तरफ विजय लोक कल्याणकारी कदम उठा रहे हैं, और ऐन उसी वक्त विरोधी खेमे में बगैर बुलडोजर के ही तोड़-फोड़ की कार्रवाई चल रही होती है. विजय के सलाहकारों की टीम देश भर के नेताओं से सीखने और उस पर अमल करने की रणनीति पर काम कर रही है। 

मुख्यमंत्री ने सहकारी बैंकों से लिए गए किसानों के 50,000 रुपये तक के फसल लोन माफ कर दिए हैं. सरकारी ऐलान के अनुसार, जिन बड़े किसानों ने सहकारी बैंकों से फसल लोन लिया है, उन्हें भी 5 हजार रुपये की राहत दिए जाने की बात है। 

राज्यसभा में डेब्यू, और उपचुनावों की तैयारी
तमिलनाडु में 18 जून को राज्यसभा की एक सीट के लिए उपचुनाव होना है. तमिलनाडु की मेलम विधानसभा सीट से चुन लिए जाने के बाद सीवी शनमुगम ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. मुख्यमंत्री विजय उसी सीट के जरिए टीवीके की राज्यसभा में एंट्री करना चाहते हैं। 

चर्चा है कि टीवीके में रिटायर्ड आईएएस अफसर यू सगायम को राज्यसभा भेजने पर विचार किया जा रहा है. तमिलनाडु में यू सगायम ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने कड़े रुख के लिए मशहूर रहे हैं. उनकी ईमानदारी के कई किस्से सुनाए जाते हैं। 

खास बात यह है कि यू सगायम ऐसे अफसर हैं जिनका 28 साल की सेवा में 25 बार ट्रांसफर हुआ. यू सगायम को राज्यसभा भेज कर मुख्यमंत्री थलपति विजय तमिलनाडु की जनता को संदेश देना चाहते हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ वो क्या करना चाहते हैं, और ऐसा करने से उनके पहले की डीएमके और एआईएडीएमके सरकारें अपने आप निशाने पर आ जाती हैं। 

राज्यसभा के साथ ही टीवीके नेतृत्व की नजर तमिलनाडु की चार विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव हैं. एक सीट तो मुख्यमंत्री विजय ने ही खाली की है, जबकि तीन सीटें टीवीके में शामिल होने वाले विधायकों के AIADMK छोड़ने से खाली हुई हैं। 

AIADMK विधायक के. मरगथम कुमारवेल, एस. जयकुमार और पी. सत्यभामा ने तमिलनाडु विधानसभा स्पीकर JCD प्रभाकर से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया. मरगथम कुमारवेल मदुरंतकम सीट से, पी सत्यभामा धारापुरम सीट से और एस जयकुमार पेरुनदुरई सीट से AIADMK के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. धारापुरम और पेरुनदुरई को AIADMK का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, जबकि मदुरंतकम चेन्नई के पास महत्वपूर्ण सीट मानी जाती है। 

यह घटनाक्रम ऐसे वक्त सामने आया है, जब सीवी शनमुगम के नेतृत्व में टीवीके सरकार को समर्थन देने वाले 25 विधायकों में से कुछ के कैबिनेट में शामिल होने पर बातचीत चल रही थी. लेकिन, वाम दलों, वीसीके और टीवीके के ही कुछ नेताओं के दबाव में अचानक यह प्लान ड्रॉप कर दिया गया। 

इस्तीफा देने वाले विधायक अब टीवीके के चुनाव निशान सीटी पर फिर से मैदान में उतरेंगे. उपचुनाव जीतने के बाद वे टीवीके के विधायक बन जाएंगे, और उसके बाद किसी भी गठबंधन साथी को कोई आपत्ति नहीं होगी – खास बात यह है कि सिलसिला यहीं थमने वाला नहीं है। 

कांग्रेस और टीवीके का साथ कब तक
तीन विधायकों का इस्तीफा तो ट्रेलर लगता है. जननायगन के समानांतर विजय की सियासी पिक्चर अभी बाकी है. टीवीके के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि कम से कम 7 से 8 विधायक अभी आने वाले दिनों में ऐसे ही इस्तीफा दे सकते हैं। 

टीवीके के पास फिलहाल 107 विधायक हैं. टीवीके ने 108 सीटें जीती थीं, जिनमें मुख्यमंत्री विजय की जीती हुई दो सीटें शामिल थीं. विजय ने अपनी एक सीट खाली कर दी थी. अब अगर उपचुनावों में सभी सीटों पर जीत हासिल होती है, तो टीवीके के पास 111 सीटें हो जाएंगी. तमिलनाडु में बहुमत का आंकड़ा 118 है. टीवीके सरकार को कांग्रेस की पांच विधायकों का समर्थन हासिल है। 

अगर उपचुनाव घोषित होने से पहले और विधायक इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हो जाते हैं, तो टीवीके को सहयोगियों पर निर्भरता कम हो जाएगी. सबसे ज्यादा 5 सीटों वाली कांग्रेस से छुटकारा पाना आसान हो जाएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, टीवीके के सीनियर नेताओं का मानना है कि विजय जैसे करिश्माई नेता के इर्द-गिर्द बनी पहली पीढ़ी की राजनीतिक पार्टी चुनाव के बाद बने सहयोगी दलों पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रह सकती। 

एक सीनियर टीवीके नेता का कहना है, अगर ये सीटें साथ में जाती हैं, तो बात बहुत मायने रखती है. जब लोगों को लगता है कि सरकार खुद को स्थिर कर रही है, तो जनता के बीच माहौल बदलने लगता है। 

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की रणनीति जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला से काफी हद तक मिलती जुलती लगती है. हालांकि, दोनों राज्यों के राजनीतिक समीकरण में थोड़ा फर्क भी है. उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा था. विजय ने कांग्रेस के साथ चुनाव बाद गठबंधन किया है। 

कांग्रेस ने चुनाव से पहले तो उमर अब्दुल्ला की पार्टी नेशनल कांफ्रेंस के साथ गठबंधन कर लिया था, लेकिन सरकार में शामिल नहीं हुई. उमर अब्दुल्ला ने भी कांग्रेस को लेकर कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई. धीरे धीरे गठबंधन रस्मअदायगी भर रह गया. केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में कांग्रेस के 6 विधायक हैं. कहने को तो कांग्रेस सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन पार्टी की वही स्थिति है जैसी तमिलनाडु की पिछली डीएमके सरकार में थी। 

ऐसा ही एक उदाहरण दिल्ली में मिलता है. 2013 में अरविंद केजरीवाल भी बहुमत के आंकड़े से पिछड़ गए थे. पहली बार सरकार बनाने के लिए केजरीवाल ने कांग्रेस का सपोर्ट लिया था, लेकिन अपने बूते सरकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी को अगले विधानसभा चुनाव तक इंतजार करना पड़ा, विजय तमिलनाडु में ये सब पहले ही कर लेना चाहते हैं। 

क्या टीवीके नेता थलपति विजय का ताजा एक्शन बीजेपी के 'ऑपरेशन लोटस' जैसा है?

देखा जाए तो तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए टीवीके के राजनीतिक सपोर्ट लेने की शुरुआत गठबंधन की कोशिश के रूप में हुई थी. जिसमें AIADMK के बागियों का भी समर्थन मिला था. लेकिन, अब रणनीतिक बदलाव साफ साफ नजर आने लगा है. अब जो कुछ हो रहा है, वह कुछ हद तक राजनीतिक अधिग्रहण जैसा माना जा सकता है. बीते वक्त में कर्नाटक और मध्य प्रदेश में बीजेपी को ऐसे तौर तरीके अपनाते देखा जा चुका है, जिसे 'ऑपरेशन लोटस' के रूप में याद किया जाता है।

 रिपोर्ट के मुताबिक, सत्ताधारी टीवीके जिस तरीके से कदम बढ़ा रही है, तमिलनाडु की राजनीति के कई नेता निजी तौर पर इसे कहीं ज्यादा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मान कर चल रहे हैं, और टीवीके का मकसद पूरी तरह साफ है – अब एक ही मिशन है, सहयोगी दलों पर निर्भरता कम करने के साथ ही 234 सदस्यों वाली विधानसभा में सीधे 118 के महत्वपूर्ण आंकड़े तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ना। 

'लोटस' नहीं, ऑपरेशन 'एल'
टीवीके की रणनीति में बीजेपी की राजनीति की जो झलक देखने को मिल रही है, उसे तमिलनाडु की राजनीति में अब एक नया नाम भी मिल चुका है – ऑपरेशन एल

यह नाम बताया है AIADMK नेता एडप्पाडी के. पलानीस्वामी के करीब माने जाने वाले एक नेता ने. जब उनसे पूछा गया कि 'एल' का क्या मतलब है, तो उन्होंने लोटस नहीं बल्कि कई और नाम बता डाले. इंडियन एक्सप्रेस से हंसते हुए वो कहते हैं, लॉटरी, या लीमा या लीव… जो चाहो समझ लो। 

AIADMK नेता का यह कटाक्ष टीवीके में दबदबा रखने वाले नेताओं के इर्द-गिर्द घूमता है. एल से लॉटरी कहने का उनका आशय टीवीके के भीतर काफी प्रभावशाली माने जाने वाले अर्जुन से है, जो लॉटरी कारोबारी सैंटियागो मार्टिन के दामाद हैं. लीमा नाम AIADMK विधायक लीमा रोज मार्टिन की तरफ इशारा है, जो मार्टिन की पत्नी हैं. लीव का मतलब विधायकों के AIADMK छोड़ने से भी जोड़ा जा सकता है, और वैसे भी AIADMK का चुनाव निशान 'टू लीव्स' यानी दो पत्तियां हैं – और पार्टी के टूटने को दो में से एक पत्ती के अलग होने की तरफ इशारा है। 

 

 

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