कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन तय, इस्तीफे के बाद सिद्धारमैया का बयान- आलाकमान के निर्देश का पालन किया

बेंगलुरु

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर अपने पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया है. बेंगलुरु में मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है और उन्हें पूरा भरोसा है कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राज्यपाल इसे जल्द ही स्वीकार कर लेंगे. सत्ता परिवर्तन के इस बड़े कदम के बीच सिद्धारमैया ने यह भी साफ किया कि राज्य में कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत बरकरार है, इसलिए संविधान के अनुसार नई सरकार बनाने का अधिकार भी उनकी पार्टी को ही मिलना चाहिए. इस बड़े सियासी उलटफेर के दौरान उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का आभार जताया, जिन्होंने उन्हें राज्य का नेतृत्व करने का यह अवसर प्रदान किया था. अब पूरे राज्य की नजरें राजभवन और अगले मुख्यमंत्री के चेहरे पर टिक गई हैं।

कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चल रहे सत्ता हस्तांतरण के विवाद पर आखिरकार कांग्रेस हाईकमान ने निर्णायक कदम उठा लिया है. सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में चली कई दौर की मैराथन बैठकों के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर पद छोड़ने का दबाव बनाया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा देने पर सहमति जता दी. बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया ने शुरुआत में दो सप्ताह का समय मांगा था, ताकि वह जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश कर सकें, लेकिन पार्टी नेतृत्व तत्काल नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में था. कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें याद दिलाया कि 2023 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के साथ ढाई-ढाई साल के सत्ता साझेदारी फार्मूले पर सहमति बनी थी और सिद्दारमैया पहले ही तय अवधि से अधिक समय तक मुख्यमंत्री रह चुके हैं. ‘डेक्‍कन हेराल्‍ड’ की रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने बंद कमरे में हुई बैठकों के दौरान सिद्दारमैया से कहा कि पार्टी की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पुराने वादे का सम्मान जरूरी है. इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में बताए जा रहे हैं. राहुल गांधी ने दोनों नेताओं (सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार) से संयुक्त और अलग-अलग बैठकें कर पार्टी एकता बनाए रखने की अपील की।

बताया जाता है कि बैठक के दौरान सिद्दारमैया ने यह तर्क दिया कि 2025 में पद छोड़ने को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ था, लेकिन राहुल गांधी अपने रुख पर कायम रहे. पार्टी नेतृत्व ने यह भी कहा कि सिद्दारमैया पहले ही आठ वर्षों से अधिक समय तक मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं, इसलिए अब दूसरे नेताओं को अवसर देने का समय है. सूत्रों के मुताबिक, बाद में सिद्दारमैया ने वरिष्ठ नेताओं केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला से चर्चा की, जिन्होंने भी हाईकमान के निर्देश को मानने की सलाह दी. शाम को सिद्दारमैया ने ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज के आवास पर अपने करीबी सहयोगियों से मुलाकात की। कुछ मंत्रियों ने उन्हें जल्दबाजी में फैसला न लेने की सलाह दी, लेकिन सिद्धारमैया ने साफ कहा कि वह अब और इंतजार नहीं करेंगे. सूत्रों के अनुसार, सिद्दारमैया ने अपने सहयोगियों से कहा, ‘मैं शुरू से कहता आया हूं कि राहुल गांधी जब कहेंगे, मैं इस्तीफा दे दूंगा. अब जब उन्होंने कहा है, तो मैं तुरंत पद छोड़ दूंगा।

कांग्रेस के लिए अहम
कांग्रेस नेतृत्व इस फैसले को पार्टी अनुशासन और संगठनात्मक नियंत्रण के लिहाज से अहम मान रहा है. 2014 के बाद कांग्रेस कई राज्यों में क्षेत्रीय नेताओं पर नियंत्रण बनाए रखने में संघर्ष करती रही है. राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सत्ता साझा करने के वादों के बावजूद नेतृत्व परिवर्तन नहीं हो सका था. ऐसे में कर्नाटक में हाईकमान का यह कदम पार्टी के भीतर स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व के फैसले सर्वोपरि होंगे।

 इस्तीफा देने के प्रेस को संबोधित करते हुए भावुक हुए सिद्धारमैया
सीएम सिद्दारमैया का इस्तीफा: कर्नाटक के राजनीति में एक बड़ा बदलाव हुआ है. कांग्रेस आलाकमान के निर्देशानुसार, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए सिद्धारमैया काफी भावुक नजर आए. उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, ‘हाई कमान के पहले ही इस्तीफा देने के लिए कहने के बाद, मैंने आज अपना इस्तीफा सौंप दिया है. मुझे पूरा भरोसा है कि जब राज्यपाल आएंगे, तो वे इसे स्वीकार कर लेंगे, क्योंकि यह संविधान के अनुसार ही किया जाना है.’ सिद्धारमैया ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत है और संवैधानिक रूप से नई सरकार बनाने का अधिकार भी कांग्रेस को ही मिलना चाहिए. इस अवसर पर उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन्हें राज्य का नेतृत्व करने का मौका दिया।

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