चुनाव के बीच पार्टियों में खलबली, ECI ने तय समय-सीमा में चुनावी खर्च का विवरण जमा करने का निर्देश दिया

नई दिल्ली
 विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के प्रमुखों को एक जरूरी याद दिलाई है. आयोग ने दलों को निर्देश दिया है कि वे चुनाव खत्म होने की तय समय-सीमा के भीतर अपने चुनावी खर्च और उम्मीदवारों को दी गई एकमुश्त राशि का विवरण जमा कर दें। 

चुनाव आयोग ने कहा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए, सभी राजनीतिक दलों के लिए चंदे की सटीक जानकारी देना अनिवार्य है. इसमें उम्मीदवारों को दी गई एकमुश्त राशि का विवरण भी शामिल होना चाहिए. आयोग ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि दलों द्वारा दी गई जानकारी में कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

सभी पंजीकृत राष्ट्रीय दलों, राज्य मान्यता प्राप्त दलों और पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) के अध्यक्षों और महासचिवों को जारी किए गए एक हालिया पत्र में, चुनाव आयोग ने कुछ महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं. चुनाव आयोग ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए, उसने 2001 में एक प्रारूप तय किया था. इस प्रारूप को समय-समय पर (27 दिसंबर 2001, 22 मार्च 2004, 13 जनवरी 2009, 21 जनवरी 2013 और 15 जनवरी 2022 को) संशोधित किया गया है। 

इस प्रारूप के अनुसार, सभी राजनीतिक दलों के लिए प्रत्येक विधानसभा या लोकसभा चुनाव के बाद अपने चुनाव खर्च का विवरण जमा करना अनिवार्य है. यह विवरण चुनाव पूरा होने के 75 से 90 दिनों के भीतर जमा करना होगा। 

चुनाव आयोग (ECI) ने कहा है कि मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पार्टियों को अपने चुनाव खर्च का विवरण सीधे चुनाव आयोग को सौंपना होगा. वहीं, गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत पार्टियों (RUPPs) को यह विवरण उस राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) को देना होगा जहां पार्टी का मुख्यालय स्थित है। 

आयोग ने आगे बताया कि राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के खातों में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए, संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए यह निर्देश दिया गया है. इसके अनुसार, पार्टियों को चुनाव खत्म होने के 30 दिनों के भीतर एक 'आंशिक चुनाव खर्च विवरण' जमा करना होगा. इसमें उन सभी दान, चंदे या एकमुश्त भुगतान की जानकारी देनी होगी जो पार्टी ने चुनाव के दौरान अपने उम्मीदवारों को दिए हैं. यह नियम 8 सितंबर, 2015 से प्रभावी है। 

चुनाव आयोग ने कहा कि उनके सामने ऐसे कई मामले आए हैं जहां जमा किए गए खातों या बयानों में सही ढंग से मिलान नहीं किया गया था. आयोग ने यह भी नोट किया कि ऐसा लगता है कि उसके निर्देशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया है। 

चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए, सभी राजनीतिक दलों को उम्मीदवारों को दिए गए दान या एकमुश्त राशि का सही-सही विवरण देना अनिवार्य है. यदि राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग/मुख्य निर्वाचन अधिकारी को दी गई जानकारी और उम्मीदवारों द्वारा जिला निर्वाचन अधिकारी के पास जमा किए गए चुनावी खर्च के विवरण (जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 78 के तहत) में कोई भी अंतर पाया जाता है, तो चुनाव आयोग 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के नियम 89(5) के तहत उचित कार्रवाई करेगा। 

चुनाव आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEO) को यह निर्देश भी जारी किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के सभी राजनीतिक दलों को इस बारे में सूचित करें। 

गौरतलब है कि असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल को एक ही चरण में संपन्न हुए. चुनाव आयोग के अनुसार, असम में अनुमानित 85.38 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि केरल में 78.03 प्रतिशत और पुडुचेरी में 89.83 प्रतिशत मतदान हुआ। 

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में और तमिलनाडु में एक ही चरण में होंगे. पश्चिम बंगाल में पहले चरण के लिए मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे व अंतिम चरण के लिए 29 अप्रैल को होगा. तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में मतदान होगा. चुनाव नतीजे एक साथ 4 मई को जारी होंगे. असम विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को और केरल का 23 मई को समाप्त होगा। वहीं, तमिलनाडु विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को और पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को पूरा होगा। 

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