अमेरिका में फौजी भर्ती सिस्टम में बड़ा बदलाव, 50 साल पुरानी प्रक्रिया होगी बदल

वाशिंगटन

अमेरिका अपने फौजी भर्ती के सिस्टम में एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है. यह बदलाव दशकों में पहली बार हो रहा है और इसे वियतनाम युद्ध के बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। 

अभी तक अमेरिका में 18 से 25 साल के हर लड़के को खुद जाकर एक सरकारी सूची में अपना नाम दर्ज कराना पड़ता था. इसे 'सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम' में रजिस्ट्रेशन कहते हैं. लेकिन अब सरकार इस पूरी प्रोसेस को बदलने जा रही है. नए नियम के तहत यह रजिस्ट्रेशन अपने आप हो जाएगी, यानी लड़के को खुद कुछ नहीं करना होगा, सरकार खुद उसका नाम दर्ज कर लेगी. यह बदलाव दिसंबर 2026 तक लागू हो सकता है। 

सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?

सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम एक अमेरिकी सरकारी व्यवस्था है. इसका सीधा मतलब है एक ऐसी सूची जिसमें उन लड़कों के नाम होते हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर फौज में बुलाया जा सकता है। 

अमेरिका में अभी फौज में जाना जरूरी नहीं है, यानी कोई जबरदस्ती नहीं है. लेकिन अगर कभी देश पर बड़ा संकट आए और फौज को बहुत ज्यादा जवानों की जरूरत पड़े, तो सरकार इसी सूची से लोगों को बुला सकती है. इसे 'ड्राफ्ट' कहते हैं। 

अमेरिका ने आखिरी बार ड्राफ्ट वियतनाम युद्ध के दौरान लागू किया था, जो करीब 50 साल पहले की बात है. उसके बाद से अमेरिका ने कभी किसी को जबरदस्ती फौज में नहीं बुलाया. लेकिन सूची बनाने का काम जारी रहा। 

अभी का नियम यह है कि 18 साल का होने के 30 दिन के अंदर हर लड़के को खुद जाकर इस सूची में नाम दर्ज कराना होता है. अगर कोई ऐसा नहीं करता तो यह कानूनी जुर्म है. इसके लिए जुर्माना, जेल और सरकारी नौकरियों और सुविधाओं से भी हाथ धोना पड़ सकता है। 

नया बदलाव क्या है और कैसे काम करेगा
नए नियम के तहत अब यह रजिस्ट्रेशन अपने आप होगी. सरकार खुद अपने पास मौजूद डेटा का इस्तेमाल करके योग्य लड़कों के नाम सूची में दर्ज कर लेगी। 

यह बदलाव अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस ने 2026 के राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम में मंजूरी दी है. इस कानून में कहा गया है कि सरकार के अलग-अलग विभागों के पास जो डेटा है, जैसे कि पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या दूसरे सरकारी रिकॉर्ड, उसे आपस में जोड़कर सीधे सेलेक्टिव सर्विस की सूची में नाम डाले जाएं। 

कुछ अमेरिकी राज्यों में पहले से ही ऐसा होता है जहां ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते वक्त सेलेक्टिव सर्विस में रजिस्ट्रेशन अपने आप हो जाती है. लेकिन अब यह पूरे देश में एक जैसा होगा. सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम का कहना है कि यह बदलाव दिसंबर 2026 तक लागू हो जाएगा। 

यह बदलाव अभी क्यों हो रहा है?
यह सवाल जरूरी है कि आखिर अमेरिका को अभी यह बदलाव क्यों करना पड़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है दुनिया में बढ़ता तनाव. इस वक्त पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में हालात बहुत गंभीर हैं. अमेरिका और ईरान के बीच टकराव चल रहा है. ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका पहले से ईरान पर हमले कर चुका है। 

ऐसे माहौल में अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अगर कभी बड़े पैमाने पर फौज की जरूरत पड़े तो उसके पास एक पूरी और सटीक सूची हो। 

पुराने सिस्टम में एक बड़ी दिक्कत यह थी कि कई लड़के खुद रजिस्ट्रेशन नहीं कराते थे, चाहे लापरवाही से या जानबूझकर. इससे सूची अधूरी रहती थी. नए सिस्टम से यह समस्या खत्म हो जाएगी क्योंकि रजिस्ट्रेशन अपने आप होगी। 

इसका मतलब क्या है, क्या अमेरिका फिर से जबरदस्ती फौज भर्ती करेगा
यह साफ कर देना जरूरी है कि इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका अभी किसी को जबरदस्ती फौज में भर्ती करेगा. अमेरिकी फौज अभी भी पूरी तरह स्वेच्छा पर आधारित है, यानी जो चाहे वो जाए. ड्राफ्ट यानी जबरदस्ती भर्ती तभी होती है जब कांग्रेस इसकी अनुमति दे और राष्ट्रपति इस पर दस्तखत करें. अभी ऐसा कोई आदेश नहीं है। 

यह बदलाव सिर्फ तैयारी है, एहतियात है. सरकार चाहती है कि अगर कभी ऐसी नौबत आए तो सूची पहले से तैयार हो और कोई नाम छूटे नहीं। 

लेकिन इस बदलाव ने अमेरिका में एक बड़ी बहस जरूर छेड़ दी है. कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह आने वाले किसी बड़े युद्ध की तैयारी का संकेत है. दुनिया में जिस तरह का माहौल है, उसे देखते हुए यह बदलाव सिर्फ एक कागजी काम नहीं लग रहा। 

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