NRI दंपती के बच्चों की कस्टडी पर विवाद, SC बोला- विदेशी कोर्ट के फैसलों का पालन अनिवार्य नहीं

 नई दिल्ली
 एनआरआई (NRI) कपल के बीच बच्चों की कस्टडी को लेकर होने वाले विवाद अक्सर अंतरराष्ट्रीय कानूनी लड़ाई में बदल जाते हैं। कई बार ऐसा होता है कि एक पक्ष को विदेशी अदालत से अपने पक्ष में आदेश मिल जाता है, जबकि दूसरा पक्ष भारतीय अदालत का दरवाजा खटखटाता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारतीय अदालतों को स्वतंत्र रूप से यह तय करना चाहिए कि बच्चे के हित में क्या है। विदेशी अदालत के फैसले को अपने आप नहीं मान लेना चाहिए, उस पर उचित विचार जरूर किया जाना चाहिए।

'निपटाए गए मामले बार-बार सामने आ रहे'
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि विदेशी अदालतों द्वारा पहले ही निपटाए जा चुके मामले बार-बार उनके सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों का फैसला करना आसान नहीं होता, क्योंकि इनमें बेहद भावनात्मक और संवेदनशील मुद्दे शामिल होते हैं। इसमें आगे कहा गया कि बच्चे के कल्याण को सबसे व्यापक अर्थ में समझा जाना चाहिए, न कि केवल पैसे या भौतिक सुख-सुविधाओं के नजरिए से।

बेंच ने कहा, "यह स्थिति दो आधारों पर टिकी है। पहला यह कि एक बार जब कोई मामला अदालत के सामने आता है तो वह अपने पेरेंट्स पैट्रिया अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करती है। इस अधिकार क्षेत्र के तहत अदालत का यह कर्तव्य है कि वह बच्चे के कल्याण को ध्यान में रखते हुए मामले पर खुद विचार करे और उसका आकलन करे। दूसरा यह कि ऐसे मामलों में फैसला पक्षों के कानूनी अधिकारों के आधार पर नहीं, बल्कि बच्चे के कल्याण के आधार पर लिया जाता है। कस्टडी और संरक्षकता से जुड़े हमारे कानूनों में भी कानूनी अधिकारों के बजाय बच्चे के कल्याण पर ही सबसे ज्यादा जोर दिया गया है।"

पीठ ने आगे कहा, "ये कानून स्पष्ट करते हैं कि भले ही किसी व्यक्ति को कस्टडी या संरक्षकता पाने का कानूनी अधिकार हो, फिर भी उसे यह अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए, अगर ऐसा करना बच्चे के कल्याण के लिए सही न हो। इसलिए, इसमें कोई संदेह नहीं है कि किसी विदेशी अदालत के आदेश के मुकाबले बच्चे का कल्याण सर्वोपरि है।”

'विदेशी अदालतों के आदेश का आंख मूंदकर पालन नहीं कर सकते'
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, "दूसरे शब्दों में कहें तो इस देश की कोई अदालत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते समय किसी विदेशी अदालत के आदेश का आंख मूंदकर पालन नहीं कर सकती और न ही केवल उस आदेश को लागू करने वाली अदालत के रूप में काम कर सकती है।"

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी माता-पिता द्वारा विदेशी अदालत के आदेश की अवहेलना करने का मतलब यह नहीं है कि भारतीय अदालत को उस आदेश को अपने आप लागू करना ही पड़े। साथ ही, बच्चे के कल्याण को सबसे ऊपर रखने का यह भी मतलब नहीं है कि विदेशी अदालत के आदेश को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया जाए।

बेंच ने कहा, "बच्चे के कल्याण के लिए क्या जरूरी है, यह तय करते समय अदालत को अपना स्वतंत्र निर्णय लेना चाहिए। हालांकि, ऐसा करते समय उसे विदेशी अदालत के आदेश को भी उचित महत्व देना चाहिए।"

अदालत का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अमेरिकी नागरिक सात साल की बच्ची को वापस अमेरिका भेज दिया जाए। बच्ची को उसकी मां कैलिफोर्निया के कस्टडी आदेश का उल्लंघन करके भारत ले आई थी।

क्या है मामला?
कैलिफोर्निया की एक अदाल
त ने 2022 में इस जोड़े को बच्चे की संयुक्त कस्टडी दी थी और विशेष रूप से यह निर्देश दिया था कि लिखित सहमति या अदालत के आदेश के बिना बच्चे को कैलिफोर्निया से बाहर नहीं ले जाया जा सकता। अदालत के इस आदेश का उल्लंघन करते हुए दो हफ्ते बाद ही मां बच्चे को लेकर भारत आ गई। इसके बाद पिता ने भारत में उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने उस पिता की याचिका स्वीकार कर ली। यह याचिका कर्नाटक हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ थी, जिसमें पिता की अर्जी खारिज कर दी गई थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि बच्ची का भला इसी में है कि वह अमेरिका में ही रहे।

Related Posts

कब और किस राज्य में होगी जनगणना? सरकार ने जारी किया पूरा कार्यक्रम, जानें अपने राज्य की तारीख

नई दिल्ली देश में जनगणना 2027 की शुरुआत 25 जनवरी से होगी। ज्यादातर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनसंख्या की गिनती की…

सरदार पटेल जयंती पर एकता नगर को बड़ी सौगात, PM मोदी ने ₹400 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स का किया शुभारंभ

 एकता नगर प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के एकता नगर में शनिवार को 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी, उनका उद्घाटन किया और उन्हें देश…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

चंडीगढ़ में अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, आखिरी स्लम कॉलोनी को हटाने की तैयारी

चंडीगढ़ में अतिक्रमण पर बड़ा एक्शन, आखिरी स्लम कॉलोनी को हटाने की तैयारी

चुनावी तैयारी में जुटी AAP, पहली सूची में 30 से 35 उम्मीदवारों के नामों का हो सकता है ऐलान

चुनावी तैयारी में जुटी AAP, पहली सूची में 30 से 35 उम्मीदवारों के नामों का हो सकता है ऐलान

2027 के चुनावी रण के लिए कांग्रेस का मंथन, दिल्ली में खरगे की अध्यक्षता में जुटेंगे सांसद

2027 के चुनावी रण के लिए कांग्रेस का मंथन, दिल्ली में खरगे की अध्यक्षता में जुटेंगे सांसद

भारत में हॉकी विश्व कप 2030 कराने की तैयारी, मेजबानी के लिए पंजाब समेत तीन राज्य आगे

भारत में हॉकी विश्व कप 2030 कराने की तैयारी, मेजबानी के लिए पंजाब समेत तीन राज्य आगे

PU में गाड़ियों की आवाजाही से बढ़ी परेशानी, रोक नहीं लगी तो सड़कों पर उतरेंगे छात्र

PU में गाड़ियों की आवाजाही से बढ़ी परेशानी, रोक नहीं लगी तो सड़कों पर उतरेंगे छात्र

अंबेडकर प्रतिमा पर तीसरी बार हमला, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

अंबेडकर प्रतिमा पर तीसरी बार हमला, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581