सुभाष चंद्रा के कर्ज सैटलमेंट पर विजय माल्या का तंज, जानिए क्या है बैंकिंग का ‘हेयरकट’ खेल

 नई दिल्ली

अगर आप किसी बैंक से 100 रुपये का लोन लें और बाद में बैंक के पास जाकर कहें कि भाई मेरे पास पैसे नहीं हैं, आप सिर्फ 30 पैसे रखकर मेरा पूरा कर्ज माफ कर दो… तो सोचिए बैंक मैनेजर का क्या रिएक्शन होगा? आम इंसान के लिए तो यह किसी हसीन सपने जैसा लगता है, लेकिन भारत के बड़े उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट वर्ल्ड में ऐसा सचमुच हो रहा है. देश के इंसॉल्वेंसी ट्रिब्यूनल (NCLT) ने मीडिया दिग्गज और ज़ी ग्रुप के चेयरमैन रहे सुभाष चंद्रा को लेकर एक ऐसा ही फैसला सुनाया है, जिसने पूरे देश के बैंकिंग सिस्टम और आर्थिक हलकों में हंगामा मचा दिया है. इस मामले में विजय माल्या और कांग्रेस का रिएक्शन और भी दिलचस्प है। 

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंसॉल्वेंसी ट्रिब्यूनल ने सुभाष चंद्रा को 22,006.57 करोड़ रुपये के भारीभरकम कर्ज से मुक्त होने की हरी झंडी दे दी है. इसके बदले उन्हें चुकाने होंगे महज 6.5 करोड़ रुपये. अगर इसका हिसाब लगाएं तो यह कर्ज की कुल राशि का लगभग 99.97 प्रतिशत हिस्सा माफ कर देने जैसा है. सरल शब्दों में कहें तो 100 रुपये के भारी-भरकम कर्ज के बदले महज 30 पैसे देकर पूरे कर्ज से आजादी मिल गई। 

विजय माल्या की बधाई में छुपा दर्द और तंज
जैसे ही यह खबर बाहर आई, ब्रिटेन में रह रहे भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या खुद को रोक नहीं पाए. उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर अपनी भड़ास निकालते हुए सुभाष चंद्रा को खास अंदाज में बधाई दी और साथ ही देश के इंसॉल्वेंसी ट्रिब्यूनल पर करारा तंज कसा। 

माल्या ने चुटकी लेते हुए लिखा कि “मुझसे सरकारी तौर पर घोषित 6,203 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले अब तक 14,100 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं. यानी जितने का कर्ज था, उससे डबल से ज्यादा पैसा वसूला गया, फिर भी मुझे कोई राहत नहीं मिल रही है. और दूसरी तरफ 22,000 करोड़ का कर्ज महज 6.5 करोड़ देकर खत्म हो रहा है. शायद यही भारत का कर्ज सैटल करने वाला असली 'जस्टिस' है… और कमाल की बात देखिए, इस पर कोई सवाल भी नहीं पूछ रहा है!

विजय माल्या का यह तंज भले ही खुद को पीड़ित दिखाने का एक तरीका हो, लेकिन उनके इस बयान ने भारतीय फाइनेंशियल सिस्टम की एक बड़ी और कड़वी सच्चाई को सरेआम उजागर कर दिया है. माल्या खुद बैंकों का पैसा डकार कर विदेश भाग गए थे और उन्होंने भी कभी बैंकों की दरियादिली का जमकर फायदा उठाया था. लेकिन आज जब वे दूसरों को इतनी आसानी से छूट मिलते देख रहे हैं, तो उनका दर्द छलकना स्वाभाविक ही है। 

'हेयरकट' या फिर सीधा 'मुंडन'? कांग्रेस का तीखा हमला
इंसॉल्वेंसी ट्रिब्यूनल दरअसल देश में दिवालिया हो रही कंपनियों, बैंकों और सरकारी देनदारियों का तालमेल बैठाकर फैसला सुनाती है. फाइनेंशियल जर्नलिज्म की भाषा में इसे 'हेयरकट' कहा जाता है. यानी कर्जदार के सिर से कर्ज का बोझ थोड़ा हल्का कर देना. लेकिन जब सिर से 99.97% बाल ही साफ कर दिए जाएं, तो उसे हेयरकट कौन कहेगा?

इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार और ट्रिब्यूनल पर जोरदार हमला बोला. जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि इंसॉल्वेंसी के नाम पर दी गई यह राहत दरअसल 'हेयरकट' नहीं, बल्कि बैंकों का सरेआम 'मुंडन' है. उन्होंने कहा कि इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC 2016) को इसलिए लाया गया था ताकि बैंकों का फंसा हुआ पैसा जल्दी वापस आ सके, लेकिन इस तरह 99.9% से ज्यादा का डिस्काउंट देना इस कानून का सीधा-साधा मखौल उड़ाना है। 

किसकी जेब से जा रहा है यह पैसा?
IBC कानून 2016 ने बेशक कई डिफाल्टरों से वसूली को आसान और तेज बनाया है, लेकिन इसने देश के बैंकिंग ढांचे की सबसे बड़ी कमजोरी की पोल खोलकर रख दी है. सवाल यह उठता है कि जब 22 हजार करोड़ का कर्ज सिर्फ 6.5 करोड़ में सैटल हो जाता है, तो बाकी के 21,999 करोड़ रुपये का नुकसान कौन उठाता है?

जवाब साफ है कि यह पैसा देश के आम करदाताओं (Taxpayers) और बैंकों में अपनी मेहनत की कमाई जमा करने वाले आम नागरिकों का है. जब बड़े उद्योगपतियों को बिना किसी कड़े रिपेमेंट प्लान के हजारों करोड़ के लोन बांट दिए जाते हैं, और बाद में उन्हें 'इंसॉल्वेंसी' के नाम पर कौड़ियों के भाव राहत दे दी जाती है, तो बैंकों का बैलेंस शीट बिगड़ता है. इस घाटे की भरपाई अंततः आम जनता की जेब से ही होती है। 

विजय माल्या भले आज नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हों और सुभाष चंद्रा के बहाने व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हों, लेकिन सच यह है कि हमारे देश में सरकारों और बैंकों द्वारा बिना रिपेमेंट की क्षमता जांचे खुले हाथ से कर्ज बांटने की जो बीमारी रही है, उसका फायदा हर बड़े डिफाल्टर ने कर्ज लेते वक्त उठाया है. अब देखना यह होगा कि क्या संसद और नियामक संस्थाएं इस 'मुंडन संस्कृति' पर कोई लगाम लगाती हैं या फिर वही ढर्रा चलेगा कि आम आदमी तो लोन के लिए बैंक के चक्कर काटता रहे और बड़े दिग्गज मजे में हजारों करोड़ का कर्ज माफ करवाते रहें। 

कड़वी सच्चाई : आम आदमी के लोन की हकीकत ये है कि वह 100 रुपए के लोन पर 50 रुपए सूद भर चुका होता है. लेकिन, इसके बाद यदि उसका 50 पैसा भी बाकी रह जाता है तो उसे नोटिस भेजा जाने लगता है. सिबिल स्कोर बिगाड़ दिया जाता है. कर्ज चुका न पाना बेशक अच्छी बात नहीं है. लेकिन, ये आम आदमी के लिए ‘पाप’ और बड़े कारोबारी के लिए यह मामूली बात क्यों हो जाती है?

Related Posts

‘अमेरिका में भारतीय ऐसा करता तो…’, अभिनेता इमरान खान को बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्यों लगाई फटकार?

मुंबई बॉम्बे हाई कोर्ट ने अमेरिकी नागरिक और अभिनेता इमरान खान को राजनीतिक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में तबियत से लताड़ा है। कोर्ट ने इमरान खान को…

मुरासु तूफान से बदलेगा मौसम का मिजाज, दिल्ली-NCR समेत यूपी और राजस्थान में क्या होगा असर?

नई दिल्ली बंगाल की खाड़ी में समुद्री सतह का तापमान बढ़कर 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इसके चलते पहले अर्णब तूफान आया और अब मुरासु। एक हफ्ते के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

‘BJP के आगे कांग्रेस लिख देना चाहिए’, भगवंत मान के बयान से पंजाब की सियासत गरमाई

‘BJP के आगे कांग्रेस लिख देना चाहिए’, भगवंत मान के बयान से पंजाब की सियासत गरमाई

NDA में वापसी की अटकलों पर सुखबीर बादल ने तोड़ी चुप्पी, जानें क्या कहा

NDA में वापसी की अटकलों पर सुखबीर बादल ने तोड़ी चुप्पी, जानें क्या कहा

पंजाब चुनाव में टिकट के दावेदारों पर मंथन, राहुल गांधी आज लेंगे नेताओं की राय

पंजाब चुनाव में टिकट के दावेदारों पर मंथन, राहुल गांधी आज लेंगे नेताओं की राय

मोहाली में किसान मंडी के खिलाफ उठी आवाज, फेज-5 के लोगों ने जताई नाराजगी

मोहाली में किसान मंडी के खिलाफ उठी आवाज, फेज-5 के लोगों ने जताई नाराजगी

निजीकरण के खिलाफ IDBI कर्मचारियों की आवाज बुलंद, चंडीगढ़ में हड़ताल का समर्थन किया

निजीकरण के खिलाफ IDBI कर्मचारियों की आवाज बुलंद, चंडीगढ़ में हड़ताल का समर्थन किया

पार्किंग ठेकों पर कसेगा शिकंजा, बठिंडा निगम 178 आउटसोर्स कर्मियों को करेगा इंसोर्स

पार्किंग ठेकों पर कसेगा शिकंजा, बठिंडा निगम 178 आउटसोर्स कर्मियों को करेगा इंसोर्स

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581