मणिपुर हिंसा ने फिर पकड़ी रफ्तार, 24 मौतें, 85 FIR; ‘5 नए बारूद के जोन’ से बढ़ा सुरक्षा संकट

इंफाल

पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में एक बार फिर अशांति फैली हुई है। अंदर ही अंदर यह राज्य जातीय हिंसा से उबल रहा है। आलम यह है कि पिछले करीब सात महीनों में यानी जनवरी 2026 से जुलाई के दूसरे हफ्ते तक राज्य में नागा और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़प और तनाव से जुड़ी 85 FIR दर्ज की गई हैं, जबकि इन हिंसक झड़पों में 24 लोगों की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं यह जातीय हिंसा भीषण रूप अख्तियार कर रहा है और तनाव राजधानी इंफाल से सटे पांच बड़े इलाकों में फैल चुका है। दरअसल, राज्य में पहले हुए मैतेई-कुकी संघर्ष के बाद, अब नागा और कुकी सशस्त्र समूहों के बीच हिंसक टकराव, अपहरण, आगजनी और आर्थिक नाकेबंदी की घटनाएं बढ़ गई हैं और उसका सिलसिला जारी है।

राज्य के पहाड़ी जिलों में नागा और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़पें 2026 की शुरुआत से ही तेज हो गई हैं, जिससे राज्य में एक नया जातीय संकट पैदा हो गया है। पिछले छह महीने से ज्यादा समय में, पुलिस ने राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जातीय हिंसा पर काबू पाने के लिए 214 से ज़्यादा छापे मारे हैं और 75 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। न्यूज 18 की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से 19 लोगों को हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी से मध्य जुलाई के बीच हिंसा में 24 लोगों की मौत हुई है, जबकि कम से कम 47 लोग घायल हुए हैं।

5 बड़े क्षेत्रों की हिंसाग्रस्त इलाके के तौर पर पहचान
मणिपुर प्रशासन ने पांच बड़े क्षेत्रों को हिंसाग्रस्त इलाकों के तौर पर पहचान की है, जो इस बात की तस्दीक करता है कि यह जातीय संघर्ष अब छोटे और स्थानीय पैमाने पर भड़का आक्रोश न रहकर व्यापक रूप ले चुका है। सरकारी डेटा के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि घटनाओं का क्रम एक स्पष्ट पैटर्न दिखाता है, जिसमें जनवरी का महीना शांतिपूर्ण रहा और कोई हताहत नहीं हुआ। पहली घटना फरवरी में उखरुल में दर्ज की गई, जिसमें एक व्यक्ति घायल हुआ। मार्च में हिंसा तेजी से बढ़ी और अप्रैल में भी जारी रही, फिर मई और जून में यह अपने चरम पर पहुँच गई, जब कई ज़िलों से एक साथ मौत और चोट की खबरें आईं। हालाँकि जुलाई में केवल एक व्यक्ति के घायल होने की सूचना मिली है, लेकिन कुल आँकड़े बताते हैं कि पिछले छह महीनों में यह संघर्ष कई पहाड़ी जिलों में फैल चुका है।

कहां-कहां फैला संघर्ष?
उच्च-स्तरीय सूत्रों के अनुसार, तनाव वाले पहचाने गए इलाकों में उखरुल-इंफाल-उखरुल रोड, कांगपोकपी-इंफाल-कोहिमा रोड, कामजोंग में म्यांमार सीमा के पास के गांव, तामेंगलोंग और कांगपोकपी के बीच सीमावर्ती गांव, और सेनापति और कांगपोकपी के बीच सीमावर्ती गांव शामिल हैं। हाईवे, जिलों की सीमाओं और सीमावर्ती गांवों के आसपास घटनाओं का होना यह बताता है कि हिंसा वाले ये इलाके सुरक्षा और कनेक्टिविटी के नज़रिए से भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। 2 जुलाई 2026 को भी ⁠कामजोंग जिला में भारत-म्यांमार सीमा के पास गांवों में दोनों गुटों के बीच भारी गोलीबारी हुई, जिसमें 20 से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया गया।

उखरुल मुख्य हॉटस्पॉट के रूप में उभरा
रिपोर्ट में कहा गया है कि विवाद की शुरुआत फरवरी 2026 में ⁠उखरूल जिला के लितान गांव में एक मामूली विवाद के बाद हुई थी, जिसने धीरे-धीरे बड़े टकराव का रूप ले लिया। प्रशासन ने उखरुल को सबसे पहले और लगातार प्रभावित होने वाले जिले के रूप में चिह्नित किया है। फरवरी से मई तक यहां कई घटनाएँ हुईं, जिनमें बार-बार मौतें और चोट के मामले सामने आए हैं। इस जिले में पुलिस की कार्रवाई भी सबसे ज़्यादा हुई हैं। यहां 46 FIR दर्ज की गईं हैं और 150 से ज़्यादा छापे मारे गए हैं। इसके अलावा उखरुल में 42 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया और उनमें से 13 को गिरप्तार भी किया गया है।

कांगपोकपी दूसरा बड़ा हॉटस्पॉट
जातीय हिंसा में कांगपोकपी दूसरा बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। हिंसा की खबरें मार्च से शुरू हुईं और जुलाई तक जारी रहीं; मार्च, अप्रैल, मई, जून और जुलाई के दौरान भी हिंसा की घटनाओं में मौतें और घायल होने के मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने जिले में 23 FIR दर्ज कीं, जबकि 35 से ज़्यादा छापे मारे। इस दौरान 33 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया और उनमें से छह को गिरप्तार किया गया है। उखरुल और कांगपोकपी में कुल मिलाकर 85 में से 69 FIR दर्ज हुईं, जो इस संघर्ष में उनकी अहम भूमिका को दिखाती हैं।

केंद्र सरकार से समाधान की गुहार
इस बीच, मणिपुर के एक कुकी-जो संगठन ने सोमवार (13 जुलाई) को दावा किया कि इस साल मार्च से उग्रवादी गुटों ने आदिवासी समुदायों के कम से कम 15 सदस्यों की हत्या की है और 14 गांवों में लगभग 55 घरों को आग के हवाले कर दिया है। संगठन ने केंद्र सरकार से इन घटनाओं की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और मणिपुर संघर्ष का राजनीतिक समाधान जल्द से जल्द निकालने की मांग की है। एक बयान में, संगठन ने यह भी कहा कि कुकी-जो इलाकों में स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं तक पहुंच पर रोक और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में रुकावट की वजह से मानवीय सहायता की स्थिति और खराब हो गई है, और उसने कानून के तहत समान सुरक्षा की मांग की।

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