स्वदेशी तेजस MK2 बनेगा गेमचेंजर? एडवांस तकनीक और दमदार क्षमता से बढ़ेगी भारत की ताकत

बेंगलुरु 

 दशकों पहले जिस देश के पास जितनी मजबूत आर्मी यानी थलसेना होती थी, उसे उतना पावरफुल माना जाता था. फिर हिरोशिमा और नागासाकी परमाणु बम हमले के बाद कॉम्‍बैट फील्‍ड में एयरफोर्स की धमाकेदार एंट्री हुई. आज 21वीं सदी में दुनिया दो भीषण सशस्‍त्र संघर्ष का साक्षी बनी है – रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान जंग. इन दोनों युद्ध में एक बात कॉमन है – एरियल अटैक यानी हवाई हमले. इन संघर्षों में पैदल सेना यानी आर्मी का न के बराबर यूज किया गया. हवाई हमले प्रमुख रहे. फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन हमलों ने प्रतिद्वंद्वी देशों की हालत खराब करके रख दी. इसके दो परिणाम सामने आए हैं – पहला फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन सिस्‍टम डेवलप करने वाले प्रोजेक्‍ट्स का रफ्तार मिली है. दूसरा, अल्‍ट्रा मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी से लैस एयर डिफेंस सिस्‍टम विकसित करने पर जोर दिया जाने लगा है. भारत का मिशन सुदर्शन चक्र परियोजना नेशनल एयर डिफेंस सिस्‍टम का हिस्‍सा है. इसके अलावा देसी टेक्‍नोलॉजी के दम पर फाइटर जेट डेवलप करने की प्रक्रिया को भी रफ्तार मिली है. इसी क्रम में भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने बड़ी सफलता हासिल की है. तेजस फाइटर जेट के MK2 वेरिएंट Mk1A की तुलना में काफी कम रडार क्रॉस सेक्‍शन (RCS) हासिल करने में सफल रहा है। 

 इसका मतलब यह हुआ कि तेजस MK2 मॉडर्न रडार सिस्‍टम को चकमा दे सकता है. साथ ही THAAD और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस सिस्‍टम को धता बताने से महज कुछ कदम ही दूर है. इस खासियत के चलते तेजस MK2 चौथी और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट के बीच का ब्रिज भी माना जा रहा है. साथ ही इसकी स्‍पीड राफेल फाइटर जेट जितनी होने वाली है। 

भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि मिली है. एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा विकसित किए जा रहे तेजस MK2 फाइटर जेट (मीडियम वेट फाइटर) में रडार से बचने की क्षमता को लेकर महत्वपूर्ण सुधार किया गया है. परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, तेजस MK2 का फ्रंटल रडार क्रॉस सेक्शन (आरसीएस) मौजूदा तेजस MK-1A की तुलना में लगभग 75 प्रतिशत कम होगा. इसका अर्थ है कि नए विमान की रडार पर दिखाई देने की संभावना काफी कम हो जाएगी, जिससे युद्धक्षेत्र में दुश्मन को चकमा देने और सर्वाइवल की क्षमता बढ़ेगी. ‘इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग’ की रिपोर्ट के अनुसार, ADA के परियोजना निदेशक ने बताया कि तेजस MK2 का फ्रंटल आरसीएस तेजस MK-1A का लगभग एक चौथाई होगा. स्वतंत्र आकलनों के अनुसार, साफ कॉन्फिगरेशन (बिना बाहरी हथियारों और अतिरिक्त ईंधन टैंकों के) में इसका फ्रंटल आरसीएस 0.1 से 0.2 वर्ग मीटर के बीच हो सकता है. यह आंकड़ा आधुनिक 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की श्रेणी में काफी प्रभावशाली माना जाता है। 

  • RCS में कमी लाने वाली प्रमुख खासियतें
  •     एडवांस शेपिंग और एज अलाइनमेंट (किनारों का विशेष डिजाइन), जिससे रडार तरंगें अपने स्रोत की ओर वापस परावर्तित यानी रिफ्लेक्‍ट होने के बजाय दूसरी दिशा में मुड़ जाती हैं। 
  •     S-डक्ट (S-Duct) या ट्विस्टेड एयर इंटेक, जो इंजन के कंप्रेसर ब्लेड्स को छिपाते हैं. कंप्रेसर ब्लेड्स किसी भी लड़ाकू विमान में रडार के लिए सबसे बड़े परावर्तक (रिफ्लेक्टर) माने जाते हैं। 
  •     विमान के पंखों, फ्यूजलाज (मुख्य ढांचे), कैनार्ड्स और अन्य सतहों में 90 प्रतिशत से अधिक कंपोजिट सामग्री का उपयोग, जो धातु की तुलना में रडार ऊर्जा को अधिक प्रभावी ढंग से अवशोषित करती है। 
  •     स्वदेशी रडार एब्जॉर्बेंट मैटेरियल (RAM) कोटिंग, जिसे एएमसीए (Advanced Medium Combat Aircraft) कार्यक्रम के तहत विकसित तकनीकों के आधार पर तैयार किया गया है। 
  •     सतहों के बीच अधिक चिकने और निर्बाध संक्रमण (स्मूथ सरफेस ट्रांजिशन) तथा बाहरी उभारों और गैप्स की संख्या में कमी, जिससे रडार पर विमान की पहचान और भी कठिन हो जाती है। 

मॉडर्न टेक्‍नोलॉजी के साथ बड़ा आकार
दिलचस्प बात यह है कि तेजस MK2 फाइटर जेट आकार में अपने पूर्ववर्ती एमके-1ए से बड़ा है. इसमें लंबा फ्यूजलेज, क्लोज कपल्ड कैनार्ड और अधिक ईंधन तथा हथियार ले जाने की क्षमता होगी. सामान्य तौर पर विमान का आकार बढ़ने से उसकी रडार पहचान भी बढ़ जाती है, लेकिन डिजाइनरों ने एडवांस एयरोडायनामिक डिजाइन, स्मूथ ट्रांजिशन और व्यापक रूप से कंपोजिट सामग्री के इस्तेमाल के जरिए इसकी रडार पहचान को उल्लेखनीय रूप से कम करने में सफलता हासिल की है. तेजस एमके-1ए पहले से ही अपनी श्रेणी के विमानों में अपेक्षाकृत कम आरसीएस के लिए जाना जाता है. इसका अनुमानित फ्रंटल आरसीएस लगभग 0.5 वर्ग मीटर या उससे कम माना जाता है. अब इसमें चार गुना तक कमी लाकर तेजस MK2 को लो विजिबिलिटी वाले उन विमानों की श्रेणी में पहुंचाने का प्रयास किया गया है, जिनकी तुलना अक्सर महंगे और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों से की जाती है। 

रडार को चकमा देने की क्षमता
रडार से कम दिखाई देने की यह क्षमता विमान को दुश्मन के रडार द्वारा देर से पकड़े जाने में मदद करेगी. इससे विशेष रूप से बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (बीवीआर) एरियल वॉर में इंडियन एयरफोर्स को सामरिक बढ़त मिल सकती है. हालांकि, विमान को पूरी तरह हथियारों और ईंधन टैंकों से लैस करने के बाद भी कम आरसीएस बनाए रखना सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती बनी हुई है. बाहरी हथियार, पॉड और अतिरिक्त टैंक रडार सिग्नेचर को बढ़ा देते हैं. इसी कारण डिजाइनर एडवांस रडार और अन्य तकनीकों पर काम कर रहे हैं। 

भारत के एरियल पावर को नई ऊंचाई
रक्षा अधिकारियों का कहना है कि इन तकनीकी सुधारों के बावजूद विमान के विकास और वायुसेना में शामिल किए जाने की समयसीमा प्रभावित नहीं होनी चाहिए. भारतीय वायुसेना को अपनी भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजस MK2 की आवश्यकता है, खासकर तब तक जब तक एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) परियोजना पूरी तरह मैच्‍योर नहीं हो जाती. GE F414 इंजन, ‘उत्तम’ एईएसए रडार और अन्य आधुनिक सिस्‍टम्‍स के साथ तेजस MK2 भारतीय वायुसेना के लिए एक शक्तिशाली लड़ाकू प्लेटफॉर्म साबित हो सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि कम रडार पहचान, एडवांस सेंसर, अधिक हथियार क्षमता और संभावित सुपरक्रूज क्षमता से यह विमान भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारत की ताकत को नई ऊंचाई देगा। 

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