सस्ते फोन का लालच बना खतरा, ऑनलाइन ठगी को लेकर साइबर विंग की बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली
भारत में ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, खासकर स्मार्टफोन खरीदने के लिए लोग ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर काफी भरोसा कर रहे हैं. हर महीने हजारों लोग ई-कॉमर्स या अन्य वेबसाइट्स से मोबाइल फोन खरीदते हैं।

जैसे-जैसे ऑनलाइन खरीदारी का ट्रेंड बढ़ा है, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों ने भी नए-नए तरीके को अपनाकर लोगों को ठगना शुरू कर दिया है. आज साइबर ठग केवल फर्जी कॉल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि नकली वेबसाइट, सोशल मीडिया विज्ञापन, फर्जी डिलीवरी एजेंट, रिफंड फ्रॉड और स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स के जरिए लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे हैं।

खास बात यह है कि ज्यादातर लोग बड़े डिस्काउंट, फ्लैश सेल और 'सीमित समय ऑफर' के लालच में आकर ठगी का शिकार बन जाते हैं. राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़े साइबर फ्रॉड के मामलों में लगभग 38 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है। 

एक्सपर्ट का कहना है कि फेस्टिवल, सेल सीजन और नए स्मार्टफोन लॉन्च के दौरान ऐसे मामलों में तेजी से उछाल आता है।
मोबाइल शॉपिंग फ्रॉड? साइबर क्रिमिनल्स कौन सा अपनाते हैं तरीका.

1. फर्जी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स का जाल
साइबर अपराधी बिल्कुल असली वेबसाइट जैसी दिखने वाली नकली साइट तैयार करते हैं. इन वेबसाइट्स पर महंगे फोन बेहद कम कीमत में दिखाए जाते हैं।

उदाहरण के तौर पर 1 लाख रुपये का फोन 25 या 30 हजार रुपये में ऑफर किया जाता है. यूजर जब वेबसाइट पर जाकर पेमेंट करते हैं, तो या तो डिलीवरी नहीं होती या फिर खाली डिब्बा भेज दिया जाता है. कई मामलों में वेबसाइट कुछ दिनों बाद गायब भी हो जाती है।

2 सोशल मीडिया विज्ञापनों से ठगी
इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर 90 प्रतिशत डिस्काउंट, स्टॉक क्लियरेंस सेल या सरकारी नीलामी जैसे विज्ञापन चलाए जाते हैं. इन विज्ञापनों पर क्लिक करते ही यूजर फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है. एक्सपर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर विज्ञापन की सत्यता जांचना जरूरी है क्योंकि ठग अब AI आधारित डिजाइन और नकली रिव्यू का इस्तेमाल कर रहे हैं।

3. नकली कस्टमर केयर और रिफंड फ्रॉड
कई बार लोग किसी ऑनलाइन ऑर्डर की शिकायत करने के लिए इंटरनेट पर कस्टमर केयर नंबर खोजते हैं. साइबर अपराधी गूगल सर्च में फर्जी नंबर डाल देते हैं. जैसे ही ग्राहक कॉल करता है, उसे AnyDesk, TeamViewer या QuickSupport जैसे ऐप डाउनलोड करवाए जाते हैं. फिर  स्क्रीन शेयर होते ही ठग बैंकिंग ऐप, यूपीआई और OTP तक पहुंच बना लेते हैं. कुछ ही मिनटों में अकाउंट खाली हो जाता है।

4. फर्जी पेमेंट लिंक और फिशिंग
ठग WhatsApp, SMS या ईमेल के जरिए भुगतान लिंक भेजते हैं. लिंक बिल्कुल असली वेबसाइट जैसा दिखाई देता है. यूजर जैसे ही कार्ड डिटेल या यूपीआई जानकारी भरता है, उसकी सारी जानकारी अपराधियों के पास पहुंच जाती है. साइबर सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक भारत में हर दिन हजारों फिशिंग लिंक एक्टिव किए जाते हैं।

5. डिलीवरी स्कैम
कुछ मामलों में ठग खुद को डिलीवरी एजेंट बताते हैं. वे कहते हैं कि 'डिलीवरी कन्फर्म करने के लिए OTP बताइए' या 'QR कोड स्कैन करें. लोग बिना सोचे-समझे जानकारी साझा कर देते हैं और उनके खाते से पैसे निकल जाते हैं।

क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं ऐसे अपराध?
साइबर मामलों से जुड़े एक्सपर्ट यह मानते हैं कि डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन खरीदारी के विस्तार के साथ साइबर अपराधियों को नए अवसर मिल रहे हैं. भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 95 करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऑनलाइन खरीदारी तेजी से बढ़ रही है. युवा वर्ग जल्दी डिस्काउंट और ऑफर के चक्कर में आ जाता है. कई लोग साइबर सुरक्षा के बेसिक नियमों से अनजान हैं. यही कारण है कि साइबर ठग लगातार नए तरीके विकसित कर रहे हैं।

कैसे पहचाने कि ऑनलाइन ऑफर फर्जी है?
यदि कोई फोन बाजार मूल्य से आधे या उससे भी कम दाम पर मिल रहा है, तो सतर्क हो जाइए. कई नकली वेबसाइट्स असली नाम से मिलते-जुलते डोमेन बनाती हैं. इसमे ऑफर या फेक सेल जैसे नाम हैं. देकर प्रोडक्ट को जल्द से जल्द बेचने का प्रयास उनके द्वारा किया जाता है. इस दौरान जब उपभोक्ता ऑनलाइन पेमेंट के लिए जाता है तो वेबसाइट केवल एडवांस पेमेंट मांग रही है और COD विकल्प नहीं दे रही, तो शक करना चाहिए।

फर्जी वेबसाइट्स पर अक्सर टूटी-फूटी हिंदी या अंग्रेजी होती है. कई बार सभी रिव्यू एक जैसे दिखते हैं तो आप समझ जाइए कि यहां पर ऑनलाइन फ्रॉड होने वाला है. अगर इस तरीके के ऑफर आ रहे हैं तो भी समझिए कि यह फ्रॉड करने वाली वेबसाइट है. केवल 5 मिनट का ऑफर, अभी खरीदें वरना मौका खत्म, जैसे मैसेज लोगों पर मानसिक दबाव बनाते हैं।
कैसे सुरक्षित ऑनलाइन खरीदारी करें

केवल भरोसेमंद प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करें

मोबाइल हमेशा ऑथराइज्ड वेबसाइट या जाने-माने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीदें. ब्रांड की ऑफिशियल साइट सबसे सुरक्षित विकल्प मानी जाती है।

वेबसाइट का URL जरूर जांचें

वेबसाइट के नाम के आगे HTTPS और लॉक का निशान देखें. गलत स्पेलिंग वाली साइट से बचें.

डिलीवरी के समय वीडियो रिकॉर्ड करें
 

फोन की अनबॉक्सिंग करते समय वीडियो रिकॉर्ड करना सुरक्षित माना जाता है. इससे विवाद की स्थिति में सबूत रहता है.

IMEI नंबर चेक करें

फोन मिलने के बाद *#06# डायल करके IMEI नंबर देखें और बॉक्स पर लिखे नंबर से मिलाएं.संचार साथी पोर्टल पर भी IMEI की जांच की जा सकती है.

OTP और UPI PIN कभी साझा न करें

कोई भी बैंक, कंपनी या डिलीवरी एजेंट OTP नहीं मांगता. OTP साझा करना सीधे खाते तक पहुंच देना है.

स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स से दूर रहें

अनजान व्यक्ति के कहने पर AnyDesk या TeamViewer जैसे ऐप डाउनलोड न करें.
लोगों को बचाने के लिए सरकार चला रही अभियान

सरकार लगातार साइबर अपराध रोकने के लिए अभियान चला रही है. गृह मंत्रालय के तहत इंडियन साइबर क्राइम कॉर्डिनेशन सेंटर्स (I4C) लोगों को जागरूक करने के लिए डिजिटल कैंपेन चला रहा है.इसके अलावा बैंकों और ई-कॉमर्स कंपनियों को भी सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं.  कई फर्जी वेबसाइट्स और साइबर गैंग्स के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

ऑनलाइन मोबाइल खरीदारी सुविधाजनक जरूर है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही भारी नुकसान पहुंचा सकती है. साइबर अपराधी लोगों की जल्दबाजी, लालच और तकनीकी जानकारी की कमी का फायदा उठाते हैं. सस्ते ऑफर, फर्जी वेबसाइट और नकली कॉल के जाल में फंसने से बचने के लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है. याद रखें कि सुरक्षित डिजिटल व्यवहार ही साइबर ठगी से सबसे बड़ा बचाव है. अगर कोई ऑफर जरूरत से ज्यादा अच्छा लगे, तो पहले उसकी जांच करें क्योंकि ऑनलाइन दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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