अंडमान सागर में समुद्र में पलटी नाव, 300 रोहिंग्या सवार, 250 की मौत का खतरा

ढाका

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने  एक बेहद दुखद घटना की जानकारी दी है। अंडमान सागर में रोहिंग्या शरणार्थियों और बांग्लादेशी नागरिकों से भरी एक नाव पलट गई है, जिसमें बच्चों सहित लगभग 250 लोगों के डूबने या लापता होने की आशंका है। जीवित बचे लोगों ने बताया कि इस नाव पर महिलाओं, बच्चों, चालक दल के सदस्यों और संदिग्ध मानव तस्करों सहित लगभग 300 लोग ठसाठस भरे हुए थे।

हादसा कब, कहां और कैसे हुआ?
शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस नाव में लगभग 280 लोग सवार थे। यह नाव 4 अप्रैल को दक्षिणी बांग्लादेश के 'टेकनाफ' इलाके से मलेशिया के लिए निकली थी। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) के अनुसार, समुद्र में तेज हवाओं, खराब मौसम और नाव में क्षमता से बहुत अधिक लोगों के भरे होने के कारण यह बीच समुद्र में पलट गई।

बचाव कार्य और एक खौफनाक आपबीती
बांग्लादेश तट रक्षक (BCG) के अनुसार, उनका एक जहाज 'एम.टी. मेघना प्राइड' इंडोनेशिया जा रहा था, उसने 9 अप्रैल को समुद्र से 9 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। इनमें एक महिला भी शामिल है। ये लोग अंडमान द्वीप समूह के पास गहरे पानी में ड्रम और लकड़ियों के सहारे अपनी जान बचाते हुए पाए गए।

आधिकारिक समाचार एजेंसी एए के मुताबिक 280 लोगों अवैध तरीके से बोर्ट में बैठकर मलेशिया की ओर जा रहे थे. लेकिन अंडमान सागर की लहरों को कुछ और ही मंजूर था. समंदर की उफनती लहरों के कारण ऐसा हुआ. उन चीखों की गवाह बनीं, जो मदद के लिए उठीं और फिर हमेशा के लिए खामोश हो गईं. ये बोट बांग्‍लादेश के कॉक्स बाजार से शुरू चली थी. इस हादसे में बाल-बाल बचे रफीकुल इस्लाम ने बताया कि नाव पर क्षमता से कहीं ज्यादा लोग सवार थे, जिनमें 13 क्रू मेंबर और मानव तस्कर भी शामिल थे. रफीकुल ने दावा किया कि नाव पलटने से पहले ही करीब 25 से 30 लोग भीड़ और दम घुटने के कारण दम तोड़ चुके थे. इसके बाद समंदर की विशाल लहरों ने नाव को अपनी चपेट में ले लिया और देखते ही देखते सब कुछ खत्म हो गया। 

बचाए गए 9 लोगों में से 6 तस्‍कर
टेकनाफ मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी सैफुद्दीन इस्लाम के अनुसार, बांग्लादेशी जहाज ने 9 अप्रैल को हिंद महासागर से 9 लोगों को रेस्क्यू किया था. जांच में पता चला कि बचाए गए 9 लोगों में से 6 कथित मानव तस्कर हैं जिन्हें अब जेल भेज दिया गया है. पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और जांच जारी है कि इस अवैध यात्रा के पीछे और कौन-कौन से सिंडिकेट शामिल हैं। 

UNHCR और IOM की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि यह त्रासदी रोहिंग्या शरणार्थियों की बेबसी और उनके दीर्घकालिक समाधान की कमी का नतीजा है. बांग्लादेश वर्तमान में लगभग 1.3 मिलियन रोहिंग्याओं की मेजबानी कर रहा है, जो म्यांमार के सैन्य दमन के बाद वहां रह रहे हैं। 

40 वर्षीय रफीकुल इस्लाम इस हादसे में बाल-बाल बचे हैं। उन्होंने बताया कि मानव तस्करों ने उन्हें मलेशिया में नौकरी दिलाने का लालच देकर नाव पर चढ़ाया था। उन्होंने बताया कि यात्रियों ने समुद्र में चार दिन और रातें बिताईं और इस दौरान हालात तेजी से बिगड़ते गए। गश्ती दलों की नजर से बचने के लिए, तस्करों ने यात्रियों को मछली और जाल रखने वाले बेहद तंग स्टोरेज कम्पार्टमेंट में छिपने के लिए मजबूर किया। इस्लाम ने बताया कि वहां सांस लेने के लिए मुश्किल से ही कोई ऑक्सीजन थी। नाव पलटने से पहले कम से कम 30 लोगों की दम घुटने से मौत हो चुकी थी। हम सांस तक नहीं ले पा रहे थे।

जब नाव पलटी, तो सैकड़ों लोग समुद्र में गिर गए। इस्लाम के अनुसार, हादसे के समय नाव पर लगभग 240 लोग सवार थे, जिनमें करीब 20 महिलाएं और कई बच्चे शामिल थे। इनमें से मुट्ठी भर लोग ही जिंदा बच सके। रफीकुल ने बताया- हममें से कई लोगों को नाव के निचले हिस्से में रखा गया था, जहां कुछ लोगों की तो वहीं मौत हो गई। नाव से जो तेल रिसा था, उससे मैं जल गया। हादसा होने के बाद रेस्क्यू होने तक वे लगभग 36 घंटे तक समुद्र में तैरते रहे।

ये लोग खतरनाक समुद्री यात्रा क्यों कर रहे थे?
म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों को लंबे समय से जुल्म और हिंसा का सामना करना पड़ा। इस समय म्यांमार के रखाइन राज्य में सेना और एक विद्रोही गुट 'अराकान आर्मी' के बीच भीषण जंग चल रही है। जान बचाने के लिए 10 लाख से ज्यादा रोहिंग्या बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में बने विशाल शिविरों में रह रहे हैं, जहां हालात बेहद खराब और अमानवीय हैं।

मलेशिया जाने की चाहत
मलेशिया एक अपेक्षाकृत अमीर देश है, जहां कंस्ट्रक्शन और खेती के काम के लिए एशिया के गरीब हिस्सों से मजदूर जाते हैं। तस्कर इन्ही मजबूर लोगों से पैसे लेकर उन्हें खतरनाक और खचाखच भरी नावों से अवैध तरीके से ले जाते हैं।

संयुक्त राष्ट्र (UNHCR) ने क्या कहा?
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि यह घटना म्यांमार के लोगों के लंबे समय से बेघर होने और उनकी समस्या का कोई स्थायी समाधान न होने का एक भयानक परिणाम है। यह त्रासदी याद दिलाती है कि म्यांमार में हालात सुधारने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है, ताकि रोहिंग्या शरणार्थी सुरक्षित और सम्मान के साथ अपनी मर्जी से अपने घर लौट सकें।

यह कोई पहली घटना नहीं है। अंडमान सागर, जो म्यांमार, थाइलैंड और मलेशिया के बीच फैला है, वह ऐसे कई हादसों का गवाह बनता रहता है। पिछले साल मई में भी म्यांमार तट के पास दो नावों के डूबने से 427 रोहिंग्या लोगों के मारे जाने की आशंका जताई गई थी।

गहराता मानवीय संकट और हताशा
यह त्रासदी रोहिंग्या शरणार्थियों की उस गहरी हताशा को उजागर करती है, जिसके चलते वे मलेशिया, इंडोनेशिया और थाइलैंड जैसे देशों में जाने के लिए जान की बाजी लगा रहे हैं। सहायता एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि मानवीय सहायता में लगातार हो रही कमी के कारण स्थिति और खराब हो रही है। कॉक्स बाजार में 500 घरों के सर्वेक्षण पर आधारित इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी (IRC) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, केवल 2% रोहिंग्या माता-पिता ही अपने बच्चों के भविष्य को लेकर आशान्वित हैं।

खाद्य राशन में कटौती के बाद प्रति व्यक्ति भोजन की लागत घटकर महज 7 डॉलर (लगभग 580 रुपये) प्रति माह रह गई है। इसके चलते लगभग 69% शरणार्थी परिवारों का कहना है कि उनके बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया है, और आधे परिवारों को अपने बच्चों से मजदूरी करवानी पड़ रही है। IRC ने दानदाताओं और अधिकारियों से अपील की है कि वे अब केवल आपातकालीन सहायता के बजाय दीर्घकालिक समाधानों पर ध्यान दें। चेतावनी दी गई है कि अगर निरंतर आर्थिक और मानवीय समर्थन नहीं मिला, तो शरणार्थी और उनकी मेजबानी कर रहे स्थानीय समुदाय, दोनों ही गहरी गरीबी और अत्यधिक संकट का शिकार हो जाएंगे।

Related Posts

Pakistan Hindu Population: 1941 से अब तक कितना बदला हिंदुओं का जनसंख्या अनुपात? ब्रिटिश रिपोर्ट के आंकड़ों ने खींचा ध्यान

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की स्थिति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में है। ब्रिटेन स्थित प्रवासी संगठन INSIGHT UK ने ब्रिटिश संसद में एक रिपोर्ट पेश कर…

बलोचिस्तान में सुरक्षा बलों के कैंप को बनाया निशाना, BLF की महिला यूनिट समेत दो दस्तों के हमले का दावा

बलोचिस्तान पाकिस्तान के बलोचिस्तान में सैन्य कैंप पर हमले को लेकर बलोचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने बड़ा दावा किया है. संगठन के मुताबिक, उसकी लड़ाकू यूनिटों ने 1 अक्टूबर 2026…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

2027 के चुनावी रण के लिए कांग्रेस का मंथन, दिल्ली में खरगे की अध्यक्षता में जुटेंगे सांसद

2027 के चुनावी रण के लिए कांग्रेस का मंथन, दिल्ली में खरगे की अध्यक्षता में जुटेंगे सांसद

भारत में हॉकी विश्व कप 2030 कराने की तैयारी, मेजबानी के लिए पंजाब समेत तीन राज्य आगे

भारत में हॉकी विश्व कप 2030 कराने की तैयारी, मेजबानी के लिए पंजाब समेत तीन राज्य आगे

PU में गाड़ियों की आवाजाही से बढ़ी परेशानी, रोक नहीं लगी तो सड़कों पर उतरेंगे छात्र

PU में गाड़ियों की आवाजाही से बढ़ी परेशानी, रोक नहीं लगी तो सड़कों पर उतरेंगे छात्र

अंबेडकर प्रतिमा पर तीसरी बार हमला, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

अंबेडकर प्रतिमा पर तीसरी बार हमला, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस

लुधियाना में दर्दनाक हादसा, ऑटो की टक्कर से 2 की गई जान, 9 लोग घायल

लुधियाना में दर्दनाक हादसा, ऑटो की टक्कर से 2 की गई जान, 9 लोग घायल

लुधियाना में सरेआम गुंडागर्दी, जगजोत सिंह पर हमला कर सिर पर किए वार

लुधियाना में सरेआम गुंडागर्दी, जगजोत सिंह पर हमला कर सिर पर किए वार

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581