बिहार की सरकार में बदलाव की तैयारी, नीतीश सीएम की कुर्सी छोड़ने को रेडी, BJP के सिग्नल का इंतजार

पटना
 बिहार में सरकार का बदलना तय है. नीतीश कुमार सीएम पद छोड़ने को तैयार हैं. विधान परिषद से उन्होंने इस्तीफा दे दिया है. यानी अब अगर-मगर की कोई गुंजाइश नहीं बची है. जल्द ही इस आशंका पर भी विराम लग जाएगा कि वे संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्यसभा की शपथ लेने के बाद 6 महीने तक सीएम रह सकते हैं. नीतीश ने अब दिल्ली की राजनीति में जाने का पक्का मन बना लिया है. यही वजह रही कि उन्होंने ससमय विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. राज्यसभा की सदस्यता की शपथ के लिए भी वे तारीख तय होने का इंतजार कर रहे हैं. अनुमान है कि सीएम पद से इस्तीफा की औपचारिकता भी अप्रैल के दूसरे सप्ताह में पूरी हो जाएगी। 

इस्तीफा शपथ के पहले या बाद में?
यह सवाल जरूर बनता है कि नीतीश कुमार सीएम पद कब छोड़ेंगे. राज्यसभा की सदस्यता की शपथ के पहले पद छोड़ देंगे या बाद में, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है. चूंकि नीतीश कुमार ने मीडिया से मुखातिब होना बंद कर दिया है, इसलिए इसे लेकर संशय बना हुआ है. तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं. कोई कह रहा कि वे इस्तीफा अभी नहीं देंगे. 6 महीने की संवैधानिक व्यवस्था का लाभ लेते हुए वे मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे. हालांकि जेडीयू के सूत्र बता रहे हैं कि नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता की शपथ लेने के पहले ही इस्तीफा दे सकते हैं, बशर्ते भाजपा चेहरा घोषित कर दे. चर्चा यह भी है कि सरकार के स्वरूप पर एनडीए में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, इसीलिए विलंब हो रहा है. इतना तो तय है कि मुख्यमंत्री भाजपा का ही बनेगा. लेकिन, कौन बनेगा, इसे लेकर भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं. जेडीयू के बड़े नेता लगातार कहते रहे हैं कि सीएम भाजपा से ही बनेगा, लेकिन वह नीतीश के मन मुताबिक होगा। 

अगला सीएम नीतीश की पसंद का?
सीएम के लिए नीतीश कुमार की पसंद की बात करें तो उन्होंने अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान इशारों-इशारों में अपनी पसंद जाहिर कर दी है. यात्रा के दौरान जनसंवाद के दौरान वे मंच पर सम्राट के कंधे पर हाथ रखते रहे. इतना ही नहीं, उन्होंने कई जगह कहा भी कि अब ये ही सब काम देखेंगे. अब इससे बड़ा संकेत क्या हो सकता है. यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा नीतीश के चयन पर मुहर लगाती है या पुरानी परिपाटी निभाते हुए कोई चौंकाने वाला नाम घोषित करती है. भाजपा ने 2014 से ही यह परिपाटी शुरू की है कि सीएम वह नहीं बनता, जिसकी सर्वाधिक चर्चा होती है. हरियाणा में मनोहर खट्टर और झारखंड में रघुवर दास के नाम चौंकाने वाले थे. मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली में भी भजपा ने यही किया। 

बिहार की राजनीति में सम्राट फिट
बिहार का मिजाज जातीय समीकरण को पसंद करता है. नीतीश कुमार ने भले जातिवाद को बढ़ावा नहीं दिया, लेकिन उनके उत्थान के पीछे लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण सहायक बना. इस समीकरण को अक्षुण्म रखते हुए नीतीश ने हर जाति में अपने रणनीतिक कौशल से वोट बैंक बनाया. कुर्मी-कोइरी की 10 फीसद से भी कम आबादी के बावजूद वे 20 साल तक बिहार के सीएम बनते रहे. चूंकि सम्राट चौधरी कोइरी जाति से आते हैं, इसलिए नीतीश के पैटर्न में दूसरों के मुकाबले ज्यादा फिट बैठेंगे. नीतीश अगर उन्हें अपना उत्तराधिकारी बता रहे हैं तो इसकी बड़ी वजह यही हो सकती है. भाजपा भी वोट बैंक की राजनीति में माहिर है. संभव है, वह दूसरे राज्यों के प्रयोग से बिहार में बचे। 

भाजपा भी बढ़ाती रही है सम्राट को
सम्राट का पलड़ा एक और वजह से भारी दिखता है. भाजपा में आने के बाद उन्हें बड़ा फलक मिला है. भाजपा ने उन्हें पहले प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंपी. उन्हें दूसरी बार डेप्युटी सीएम बनाया. इस बार तो भाजपा ने नीतीश के पास शुरू से ही रहने वाला गृह विभाग भी उनसे लेकर सम्राट को सौंप दिया है. सम्राट के प्रमोशन के संकेत उस वक्त भी मिले थे, जब लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ मंच साझा करने के अलावा बोलने का भी अवसर दिया. मसलन भाजपा सम्राट को प्रमोट करने का काम शुरू से ही इसीलिए कर रही है कि समय आने पर उन्हें सूबे की कमान सौंपी जा सके। 

नीतीश कर रहे BJP का इंतजार
जेडीयू के सूत्र बताते हैं कि नीतीश ने अब सीएम पद का मोह छोड़ दिया है. वे इंतजार कर रहे हैं कि भाजपा नए सीएम का ऐलान करे तो वे बागडोर सौंप कर मुक्त हो जाएं. यानी वे भाजपा के ग्रीन सिग्नल का इंतजार कर रहे हैं. जानकारी तो यह भी मिल रही है कि राज्यसभा की शपथ के पहले ही भाजपा नाम की घोषणा कर देगी. चूंकि लंबे इंतजार के बाद भाजपा को बिहार में सरकार बनाने का मौका मिल रहा है, इसलिए वह इस आयोजन को भव्य बनाना चाहती है. पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत केंद्रीय स्तर के नेता नए सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत कर सकते हैं. 5 राज्यों में चुनाव प्रचार तेज होने के कारण सबका शिड्यूल देखा जा रहा है. नए नेता के चुनाव की औपचारिकताएं भी पूरी करनी हैं. अनुमान है कि अप्रैल के दूसरे हफ्ते के आरंभ में नेता चयन की रस्म पूरी कर ली जाएगी. इसके साथ ही शपथ ग्रहण की तैयारी भी शुरू हो जाएगी. बंगाल चुनाव शुरू होने से पहले भाजपा बिहार में नई सरकार का गठन कर लेगी। 

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