चीन ने बदली युद्ध की रणनीति: सेना के साथ नागरिक, डेटा और निजी संसाधन भी होंगे लामबंद

 बीजिंग
चीन लंबे और बड़े संघर्ष की तैयारी को अब केवल सेना तक सीमित नहीं रख रहा। संशोधित राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून के जरिए वह नागरिकों, निजी संपत्ति और प्रौद्योगिकी कंपनियों को भी अपने युद्धकालीन तंत्र में खींच रहा है। 28 अगस्त को पारित और 1 अक्टूबर से प्रभावी यह कानून राज्य को रक्षा-सहायता कर्तव्य लागू करने, निजी संसाधन तत्काल अधिग्रहित करने तथा नागरिक तकनीक और डेटा को सैन्य अभियानों से जोड़ने की व्यापक शक्ति देता है। रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग सिर्फ युद्ध शुरू करने नहीं, उसे लंबे समय तक चलाने की तैयारी कर रहा है।

दरअसल, यह संशोधन 2010 के पुराने कानून का 16 वर्षों बाद पहला बड़ा बदलाव है। आधिकारिक परिभाषा के अनुसार, रक्षा लामबंदी अब केवल सैनिकों की भर्ती नहीं, बल्कि संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, सुरक्षा और विकास हितों पर खतरे के समय शांतिकाल से युद्धकाल में तेजी से संक्रमण तथा आर्थिक-सामाजिक शक्ति को रक्षा शक्ति में बदलने की व्यवस्था है। यानी उद्योग, परिवहन, डेटा, नवाचार और नागरिक श्रम, सब युद्ध क्षमता का हिस्सा माने जा सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस नये कानून में पांच ऐसे प्रावधान है, जिनका आम चीनी नागरिकों, निजी मालिकों और कंपनियों पर सबसे सीधा और गंभीर असर पड़ सकता है।

नागरिकों पर अनिवार्य रक्षा कर्तव्य
बताया जा रहा है कि लामबंदी आदेश जारी होने के बाद 18 से 60 वर्ष के पुरुष और 18 से 55 वर्ष की महिला नागरिकों के लिए रक्षा-सहायता कर्तव्य अनिवार्य हो सकते हैं। गर्भावस्था, बीमारी या कुछ विशेष सेवाओं जैसे सीमित अपवादों को छोड़कर कामकाजी उम्र का बड़ा हिस्सा युद्ध प्रयास से बाहर नहीं रह सकेगा। नागरिकों को मोर्चे पर हथियार लेकर भेजना जरूरी नहीं। उन्हें रसद, परिवहन, नागरिक सुरक्षा, निकासी, मरम्मत, गोदाम प्रबंधन या सैन्य सहायता अभियानों में लगाया जा सकता है। व्यवहार में इसका अर्थ यह है कि युद्ध या आपात स्थिति में व्यक्ति यह नहीं चुन सकेगा कि वह युद्ध प्रयास में शामिल होगा या नहीं। राज्य तय करेगा कि उसकी श्रमशक्ति कहां लगेगी।

शीर्ष खुफिया सूत्रों का कहना है कि बीजिंग नागरिक लामबंदी इसलिए बढ़ा रहा है क्योंकि लंबे युद्ध को केवल नियमित सक्रिय-ड्यूटी बलों से नहीं चलाया जा सकता। आधुनिक संघर्ष में मोर्चे के पीछे का काम ( ईंधन, पुर्जे, भोजन, संचार, चिकित्सा और साइबर सहायता)उतना ही निर्णायक हो सकता है जितना अग्रिम पंक्ति में तैनात बव

निजी संपत्ति पर राज्य का तत्काल अधिकार
कानून का दायरा श्रम से आगे जाकर नागरिकों और निजी संगठनों की संपत्ति तक फैला हुआ है। लामबंदी की जरूरत पर अधिकारी निजी वाहन, आवास और अचल संपत्ति, संचार नेटवर्क, सुविधाएं, उपकरण और अन्य संसाधन मांग सकते हैं। यह प्रावधान मालिक के नियंत्रण को उस क्षण निलंबित कर देता है जब राज्य यह तय करे कि वह संसाधन लामबंदी के लिए आवश्यक है। संघर्ष या आपात काल में नागरिक कार, गोदाम, दफ्तर, फैक्ट्री लाइन या नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर बीजिंग के निपटान में आ सकते हैं।

और भी कठोर पहलू यह है कि अधिग्रहण आदेश मिलते ही संपत्ति तुरंत सौंपनी होगी। वित्तीय मूल्यांकन या मुआवजे का निपटारा पहले पूरा होना जरूरी नहीं। मुआवजा बाद में लामबंदी ढांचे के तहत तय हो सकता है। यानी तत्काल आर्थिक और भौतिक नुकसान उस व्यक्ति या कंपनी पर पड़ता है जिसे संपत्ति सौंपने का आदेश दिया गया है। मालिक अदालत या बाजार भाव का इंतजार करके आदेश टाल नहीं सकेगा।

बता दें कि पुराने कानून में मुख्य रूप से 'अस्थायी उपयोग' की भाषा थी, जबकि नई व्यवस्था में संग्रहण और अधिग्रहण दोनों का दायरा बढ़ाया गया है। इससे राज्य न केवल अस्थायी कब्जा ले सकता है, बल्कि जरूरत पड़ने पर संसाधनों को रक्षा तंत्र में अधिक स्थायी रूप से खपा सकता है।

नागरिक तकनीक और डेटा का सैन्यीकरण
तीसरा बड़ा बदलाव डिजिटल अर्थव्यवस्था को युद्ध मशीन से जोड़ने का है। नागरिक प्रौद्योगिकी कंपनियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालकों और डेटा-इंफ्रास्ट्रक्चर प्रबंधकों को रक्षा लामबंदी के लिए तकनीकी पहुंच, परिचालन सहायता और बुनियादी ढांचे पर नियंत्रण देना अनिवार्य हो सकता है।

इसका सीधा अर्थ है कि शांतिकाल में निजी मानी जाने वाली सेवाएं ( क्लाउड, मैपिंग, लॉजिस्टिक्स सॉफ्टवेयर, भुगतान प्रणाली, सोशल प्लेटफॉर्म का डेटा ढांचा, एआई मॉडल या साइबर सुरक्षा उपकरण) युद्धकाल में सैन्य उपयोग के लिए खुल सकती हैं। नागरिक उच्च-तकनीक गतिविधि और सैन्य अभियान के बीच की रेखा धुंधली पड़ जाती है।

रिपोर्ट के अनुसार, साइबर क्षमता और डेटा सिस्टम की अनिवार्य तैनाती पीएलए को दोहरे उपयोग वाले नागरिक नवाचार तक तत्काल पहुंच देगी। चीन के सैन्य सुधारों में बार-बार यह कमी रेखांकित हुई है कि पारंपरिक बल आधुनिक सूचना युद्ध की गति से मेल नहीं खाते। नया कानून इसी अंतर को नागरिक क्षेत्र से पाटने की कोशिश दिखता है।

आधिकारिक भाषा में भी 'उन्नत तकनीक का रक्षा लामबंदी में उपयोग' और 'उभरते क्षेत्रों में लामबंदी शक्ति विकसित करना' जोड़ा गया है। यानी कम ऊंचाई वाली अर्थव्यवस्था, ड्रोन, उपग्रह सेवाएं, महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला और डेटा सेवाएं अब रक्षा तैयारी का हिस्सा मानी जाएंगी।

आदेश मानने से इनकार पर जुर्माना और मुकदमा
लामबंदी तभी काम करती है जब आदेश का पालन तेज और बिना शर्त हो। इसीलिए दंड प्रावधानों को कानून की रीढ़ बताया गया है। स्थानीय अधिकारियों को उन उद्यमों पर भारी जुर्माना लगाने और कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है जो मसौदा आह्वान, श्रम आदेश या संपत्ति अधिग्रहण मानने से इनकार करें।

गंभीर उल्लंघन पर व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ आपराधिक अभियोजन भी हो सकता है। व्यावहारिक भाषा में, युद्धकालीन लामबंदी आदेश का प्रतिरोध केवल प्रशासनिक चूक नहीं, अपराध बन सकता है। इससे कंपनियां कानूनी जोखिम के डर से पहले ही राज्य के साथ तालमेल बढ़ाने को मजबूर हो सकती हैं, चाहे वे वाहन बेड़ा चलाती हों, गोदाम रखती हों या सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म संचालित करती हों।

अर्थव्यवस्था, प्रतिबंध और लंबी लड़ाई की तैयारी
इन चार प्रावधानों के पीछे पांचवां, अधिक रणनीतिक तर्क है। सूत्रों के अनुसार, पुनर्गठन का उद्देश्य चीन को लंबे संघर्ष के आर्थिक दबाव से निपटने योग्य बनाना भी है। आर्थिक सुरक्षा, रसद और आपूर्ति श्रृंखलाओं को लामबंदी प्रोटोकॉल में लाने से बीजिंग अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को अपेक्षाकृत तेजी से अवशोषित कर सकता है और साथ ही ईंधन, पुर्जे, खाद्य सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति बनाए रख सकता है।

बता दें कि आधुनिक युद्ध केवल तोप और जहाज का नहीं, फैक्ट्री शिफ्ट, बंदरगाह क्षमता, रेलवे स्लॉट, चिप लाइन, क्लाउड सर्वर और ट्रक बेड़े का भी युद्ध है। नया कानून इन्हीं नागरिक स्तंभों को कानूनी रूप से रक्षा तंत्र से बांधता है। लंबे संघर्ष में जो देश अपनी नागरिक अर्थव्यवस्था को तेजी से युद्ध अर्थव्यवस्था में बदल सके, वही टिका रह सकता है।

भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
अब सवाल उठता है कि भारत के लिए इसका क्या मतलब है? दरअसल, विस्तारित लामबंदी क्षमता बीजिंग को वास्तविक नियंत्रण रेखा सहित विवादित मोर्चों पर दीर्घकालिक रसद बनाए रखने में मदद कर सकती है। एलएसी जैसे ऊंचाई वाले मोर्चे पर निर्णायक तत्व अक्सर सिर्फ टुकड़ियों की संख्या नहीं, बल्कि सर्दी में ईंधन, राशन, गोला-बारूद, इंजीनियरिंग सामग्री, चिकित्सा सहायता और संचार लिंक को महीनों तक बनाए रखना होता है। यदि नागरिक ट्रक, गोदाम, निर्माण कंपनियां, टेक प्लेटफॉर्म और डेटा नेटवर्क कानूनी रूप से लामबंदी में खिंच सकते हैं, तो सीमा पर टिकाऊ तैनाती की लागत और गति दोनों बदल सकती है।

इससे साफ है कि चीन न केवल किसी संघर्ष में प्रवेश करने की प्रारंभिक लामबंदी की तैयारी कर रहा है, बल्कि उस संघर्ष को लंबे समय तक चलाने के लिए जरूरी संसाधन ( श्रम, संपत्ति, तकनीक, डेटा और आपूर्ति श्रृंखला) भी पहले से कानूनी ढांचे में समेट रहा है।

Related Posts

बांग्लादेश में राजनीतिक उत्पीड़न और कट्टरपंथ पर शेख हसीना का बड़ा बयान

ढाका  बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने देश के मौजूदा हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में राजनीतिक उत्पीड़न बढ़ रहा है. महिलाओं…

1100 किलो के टेलीस्कोप की धरती पर वापसी से हलचल, क्या इंसानों को है कोई खतरा?

वाशिंगटन नासा का 22 साल पुराना ऐतिहासिक नील गेह्रेल्स स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप अपनी अंतिम यात्रा पर निकल चुका है. अंतरिक्ष में दो दशक से ज्यादा समय तक सेवा देने के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

CM मान ने युवाओं को दी नौकरी की सौगात, बोले- जनता के साथ अच्छा व्यवहार रखें

CM मान ने युवाओं को दी नौकरी की सौगात, बोले- जनता के साथ अच्छा व्यवहार रखें

फतेहगढ़ साहिब के पर्यटन विकास को लेकर राज्यपाल का बड़ा बयान, प्रस्ताव मिलते ही होगी मंजूरी

फतेहगढ़ साहिब के पर्यटन विकास को लेकर राज्यपाल का बड़ा बयान, प्रस्ताव मिलते ही होगी मंजूरी

फर्जी NHAI अधिकारी की जमानत याचिका खारिज, 7.29 करोड़ की ठगी का मामला

फर्जी NHAI अधिकारी की जमानत याचिका खारिज, 7.29 करोड़ की ठगी का मामला

PGI मरीजों के पैसों का खेल उजागर, ढाबा संचालक और दुकानदारों के खातों में पहुंचे करोड़ों रुपये

PGI मरीजों के पैसों का खेल उजागर, ढाबा संचालक और दुकानदारों के खातों में पहुंचे करोड़ों रुपये

पंजाब में मौसम के बीच प्रदूषण की मार, कई शहरों में AQI 200 के पार पहुंचा

पंजाब में मौसम के बीच प्रदूषण की मार, कई शहरों में AQI 200 के पार पहुंचा

पंजाब में पूर्व कैबिनेट मंत्री के घर ED का छापा, दूसरे दिन भी दस्तावेज खंगाल रही टीम

पंजाब में पूर्व कैबिनेट मंत्री के घर ED का छापा, दूसरे दिन भी दस्तावेज खंगाल रही टीम

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581