BJP संगठन के बाद मोदी कैबिनेट में भी बदलाव की आहट, नए चेहरों को मिल सकता है मौका

 नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में जल्द बड़ा फेरबदल होने की बात कही जा रही है. सियासी गलियारों में इसकी चर्चा शुरू हो चुकी है और कई नेताओं की निगाहें अब उस फोन कॉल पर टिकी हैं, जो उन्हें सरकार में नई जिम्मेदारी मिलने का संकेत दे सकती है. माना जा रहा है कि अगर कैबिनेट में बदलाव होता है तो यह महज सामान्य विस्तार नहीं होगा, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर मोदी सरकार की टीम का बड़ा रीसेट हो सकता है। 

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन की नई संगठनात्मक टीम सामने आने के बाद अब निगाहें सरकार पर हैं. पार्टी संगठन में बड़े बदलाव के बाद सवाल है कि क्या अगला नंबर 'टीम मोदी' का है? संभावित कैबिनेट फेरबदल का फॉर्मूला परफॉर्मेंस + युवा + महिला + क्षेत्रीय संतुलन + सहयोगी दल + चुनावी समीकरण हो सकता है। 

अभी केंद्रीय मंत्रि परिषद में 69 सदस्य हैं, जबकि संविधान के अनुच्छेद 75 (1A) के तहत अधिकतम 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं. यानी सरकार के पास नए चेहरों को शामिल करने की गुंजाइश है. हालांकि संभावित फेरबदल केवल खाली जगह भरने तक सीमित रहने की संभावना नहीं है. इसमें मंत्रियों का प्रदर्शन, राज्यों का प्रतिनिधित्व, एनडीए सहयोगियों की मांग और कई मंत्रियों के पास मौजूद अतिरिक्त मंत्रालयों का बंटवारा भी अहम हो सकता है। 

कैबिनेट फेरबदल की चर्चाओं को बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम के ऐलान के बाद और हवा मिली है. नितिन नबीन ने 65 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम बनाई है, जिसमें 51 नए चेहरे शामिल किए गए हैं. नई टीम में स्मृति ईरानी की राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर वापसी हुई है, जबकि आरएसएस के पूर्व पदाधिकारी राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है. वसुंधरा राजे, तीरथ सिंह रावत और बैजयंत पांडा जैसे वरिष्ठ नेताओं को भी अहम जिम्मेदारियां मिली हैं. वहीं गोयल को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। 

बीजेपी ने अपने डिजिटल तंत्र में भी बदलाव किया है. अमित मालवीय की जगह दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया है और उनके साथ चार सह-संयोजक नियुक्त किए गए हैं। 

संगठन में हुए इन बदलावों का संदेश साफ माना जा रहा है—नए चेहरे, मजबूत जमीनी संगठन और चुनाव के लिए तैयार पार्टी मशीनरी. बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में युवा और महिलाओं के साथ सामाजिक तथा क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व पर भी जोर दिखाई देता है. यही फॉर्मूला संभावित कैबिनेट फेरबदल में भी नजर आ सकता है। 

सहयोगी दलों को मिल सकती है ज्यादा हिस्सेदारी
संभावित फेरबदल में एनडीए के सहयोगी दलों का समीकरण भी महत्वपूर्ण हो सकता है. सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि बीजेपी खासकर महाराष्ट्र और पंजाब के राजनीतिक समीकरणों को संतुलित करने पर विचार कर रही है। 

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास अब लोकसभा में 13 सांसद हैं. उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के छह सांसदों के शिंदे खेमे में आने के बाद केंद्र सरकार में शिवसेना को अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिलने की अटकलें तेज हुई हैं. श्रीकांत शिंदे का नाम संभावित कैबिनेट चेहरों में चर्चा में है, हालांकि इस बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। 

पंजाब भी बीजेपी की रणनीति में अहम है. इस साल राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत आम आदमी पार्टी के सात पूर्व राज्यसभा सांसद बीजेपी में शामिल हुए हैं. संदीप पाठक को बाद में बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में सचिव की जिम्मेदारी भी दी गई। 

इसके साथ ही 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित नजदीकियों को लेकर भी अटकलें लगती रही हैं. हालांकि बीजेपी नेता सार्वजनिक रूप से संकेत दे चुके हैं कि पार्टी चुनाव अपने दम पर लड़ने की तैयारी कर रही है। 

उम्र, परफॉर्मेंस और राज्यों का संतुलन भी अहम
सूत्रों के मुताबिक संभावित कैबिनेट फेरबदल में मंत्रियों का प्रदर्शन और पीढ़ीगत बदलाव भी बड़ा पैमाना हो सकता है. सरकार में कई वरिष्ठ मंत्री 70 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, जबकि बीजेपी लगातार युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है। 

इसके अलावा उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्यों का प्रतिनिधित्व भी नए चेहरों के चयन को प्रभावित कर सकता है. आने वाले चुनावों को देखते हुए इन राज्यों के सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की जा सकती है। 

कई मंत्रियों के पास एक से ज्यादा मंत्रालय
कैबिनेट फेरबदल के जरिए सरकार कुछ वरिष्ठ मंत्रियों पर मौजूद अतिरिक्त जिम्मेदारियों को भी कम कर सकती है. फिलहाल अमित शाह, जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल, एचडी कुमारस्वामी, अश्विनी वैष्णव, ज्योतिरादित्य सिंधिया, किरेन रिजिजू और मनसुख मांडविया समेत कई मंत्री एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 

ऐसे में अगर नए मंत्रियों की एंट्री होती है तो कुछ महत्वपूर्ण विभागों का पुनर्वितरण भी संभव है। 

तीन इस्तीफों से पहले ही बदल चुका है समीकरण
हाल के महीनों में तीन मंत्रियों के बाहर होने से कैबिनेट में बदलाव की जमीन पहले ही तैयार हो चुकी है. पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई में परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को लेकर हुए व्यापक युवा प्रदर्शनों के बीच इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार प्रह्लाद जोशी को दिया गया। 

रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी 21 जून को राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद पद छोड़ दिया था. इसी तरह अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने और दोबारा नामांकन नहीं मिलने के बाद इस्तीफा दे दिया। 

इन घटनाक्रमों के बीच बीजेपी संगठन में व्यापक बदलाव हो चुका है और अब सियासी नजरें मोदी सरकार पर टिक गई हैं. अगर कैबिनेट फेरबदल होता है तो यह केवल नए मंत्रियों की एंट्री और विभागों की अदला-बदली तक सीमित नहीं रहेगा. इसके जरिए बीजेपी 2027 के विधानसभा चुनावों से लेकर 2029 के लोकसभा चुनाव तक के लिए राजनीतिक, सामाजिक, क्षेत्रीय और गठबंधन समीकरणों को एक साथ साधने की कोशिश कर सकती है। 

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