E20 Controversy: रात 8 बजे फाइल साइन का दावा, पेट्रोल में ब्लेंडिंग के अधिकार को लेकर छिड़ी नई बहस

 नई दिल्ली

"E20 से मेरा कोई लेना-देना नहीं है." केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का यह बयान इन दिनों चर्चा में है. वजह यह है कि पिछले कई सालों से गडकरी देश में इथेनॉल, फ्लेक्स-फ्यूल और वैकल्पिक ईंधनों के सबसे बड़े पैरोकार रहे हैं. उन्होंने कई मंचों से कहा कि भारत को पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करनी होगी. उन्होंने E100 और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को फ्यूचर बताया. यहां तक कि एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि उन्होंने रात 8 बजे 100 प्रतिशत इथेनॉल से जुड़ी फाइल पर साइन कर दिए हैं। 

अब नितिन गडकरी द्वारा इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) को लेकर कोर्ट में रखा गया उनका पक्ष चर्चा की वजह बन गया है. बॉम्बे हाईकोर्ट में उनके पक्ष से कहा गया कि, "E20 या इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से उनका कोई लेना-देना नहीं है और यह उनके मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता." यह बयान ऐसे समय आया है, जब E20 फ्यूल को लेकर सड़क से संसद तक बहस छिड़ी हुई है. ऐसे में उनके इस बयान से लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर दोनों बातों में अंतर क्या है? 

कहां से शुरू हुआ मामला?

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट में 86 पन्नों की एक याचिका दाखिल की, जिसमें उन्होंने कहा है कि सरकार के E20 प्रोग्राम से उनका कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने मेटा, एक्स, गूगल, यूट्यूब और कुछ अन्य सोशल मीडिया यूजर्स के खिलाफ कोर्ट में केस दाखिल किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे AI-जेनरेटेड फर्जी वीडियो और तस्वीरें हटाने की मांग की है. साथ ही 11 करोड़ रुपये का हर्जाना भी मांगा। 

इस याचिका में उन्होंने कहा कि, उनके परिवार को E20 पॉलिसी से कथित आर्थिक लाभ से जोड़ा जा रहा है. जो गलत है. उन्होंने अदालत में स्पष्ट किया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) और E20 पॉलिसी के बनने या उसके लागू होने में उनकी कोई प्रशासनिक भूमिका नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि वह 2014 से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री हैं, लेकिन E20 पॉलिसी उनके मंत्रालय के अधीन नहीं आती। 

 E100 वाली फाइल पर साइन करने की बात?
यही वह प्वाइंट है, जहां सबसे ज्यादा भ्रम पैदा हुआ है. नितिन गडकरी ने बीते महीने माराष्ट्र के नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि, "उन्हें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि, कल रात 8 बजे उन्होंने 100 प्रतिशत इथेनॉल के कानूनी उपयोग को मंजूरी देने वाली फाइल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं." इसके बाद संबंधित नियमों का रास्ता साफ हुआ। 

पहली नजर में यह बयान और अदालत में पेश किया गया गडकरी के पक्ष के बयान एक-दूसरे के विपरीत लगते हैं. लेकिन यदि दोनों मंत्रालयों की जिम्मेदारियों को अलग-अलग समझा जाए तो तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाती है। 

किसके पास है पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग का अधिकार?
भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) का नोडल मंत्रालय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) है. यही मंत्रालय तय करता है कि पेट्रोल में कितना इथेनॉल मिलाया जाएगा, तेल कंपनियां किस तरह इथेनॉल खरीदेंगी और पूरे देश में E20 जैसी व्यवस्था कैसे लागू होगी. यानी पेट्रोल में 10 प्रतिशत, 20 प्रतिशत या उससे अधिक इथेनॉल मिलाने का नीतिगत फैसला सड़क परिवहन मंत्रालय नहीं, बल्कि पेट्रोलियम मंत्रालय करता है। 

सड़क परिवहन मंत्रालय की भूमिका क्या है?
यहीं पर दोनों बातों का अंतर समझना जरूरी है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का काम फ्यूल की ब्लेंडिंग तय करना नहीं, बल्कि उस फ्यूल पर चलने वाले वाहनों के लिए नियम बनाना है. मंत्रालय सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स (CMVR) में संशोधन करता है, E20, E85, E100 और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए टेक्निकल स्टैंडर्ड तय करता है और वाहन निर्माताओं को जरूरी नियमों की मंजूरी देता है। 

दूसरे शब्दों में कहें तो यदि पेट्रोलियम मंत्रालय E20 लागू करता है तो सड़क परिवहन मंत्रालय यह तय करता है कि वाहन उस फ़्यूल पर सुरक्षित और कानूनी रूप से चल सके। 

यही वजह है कि गडकरी का अदालत में यह कहना कि E20 पॉलिसी उनके मंत्रालय के अधीन नहीं है, प्रशासनिक दृष्टि से सही माना जा सकता है. वहीं सार्वजनिक मंचों पर E100 या फ्लेक्स-फ्यूल से जुड़ी फाइल पर हस्ताक्षर करने का उनका दावा भी सड़क परिवहन मंत्रालय की नियमों की भूमिका से जुड़ा हो सकता है। 

क्यों बढ़ा है विवाद?
हाल के महीनों में सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह के दावे किए गए. इनमें माइलेज कम होने, पुराने इंजनों पर असर पड़ने और कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने जैसे आरोप शामिल रहे. इन्हीं आरोपों के बीच नितिन गडकरी और उनके परिवार को भी E20 पॉलिसी से जोड़ते हुए कई पोस्ट और कथित डीपफेक वीडियो वायरल हुए. गडकरी ने इन्हें मानहानि का कारण बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि उन्हें ऐसी पॉलिसी का जिम्मेदार बताना गलत है, क्योंकि EBP उनके मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। 

इसमें कोई दो राय नहीं है कि, पिछले कई सालों से इथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल को बढ़ावा देने के सबसे बड़े पब्लिक फेस में नितिन गडकरी का नाम रहा है. देश में अगर किसी नेता ने सबसे ज्यादा इथेनॉल, फ्लेक्स-फ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन, बायो-सीएनजी और ऑप्शनल फ्यूल की बात की है, तो वह नितिन गडकरी ही हैं. उन्होंने लगातार E20 और इथेनॉल के पक्ष में बयान दिए हैं. इसलिए आम लोगों के मन में यह धारणा बनी कि E20 पॉलिसी भी उन्हीं की पहल है. जबकि प्रशासनिक व्यवस्था में नीति बनाने और उस नीति के अनुसार वाहनों के लिए नियम तैयार करने की जिम्मेदारी अलग-अलग मंत्रालयों के पास होती है। 

हाल के दिनों में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी लगातार नितिन गडकरी के साथ मंच साझा करते हुए नज़र आए है. बीते दिनों देश की पहली फ्लेक्स फ्यूल कार मारुति वैगनआर और हीरो मोटोकॉर्प की फ्लेक्स-फ्यूल बाइक्स (स्प्लेंडर प्लस और हीरो एचएफ) को दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने एक साथ लॉन्च किया था. इस दौरान हरदीप सिंह पुरी ने भी इथेनॉल ब्लेंडिंग और E20 फ्यूल को सही बताया. यहां तक कि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि, इस फ़्यूल से वाहनों के माइलेज में मामूली गिरावट संभव है, लेकिन यह वाहनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। 

बढ़ता E20 विवाद और आंदोलन की तैयारी
E20 पेट्रोल को लेकर विवाद अब आंदोलन का रूप लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. हाल ही में सोशल मीडिया पर 'E20 Janta Party' नाम से शुरू हुए डिजिटल कैंपेन ने लोगों का ध्यान खींचा है. हालांकि, ये कोई रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी या संगठन नहीं है, लेकिन 'X' से लेकर इंस्टाग्राम तक इस हैंडल पर लाखों फॉलोवर हो चुके हैं। 

इस बीच देश की राजधानी में अगले कुछ दिनों में E20 को लेकर 3 बड़े आंदोलनों की तैयारी है. सामाजिक कार्यकर्ता और इंडस्ट्रलिस्ट तहसीन पूनावाला ने 31 जुलाई को इंडिया गेट से पार्लियामेंट स्ट्रीट तक "गाड़ी मार्च" निकालने का ऐलान किया है. दूसरी ओर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 1 अगस्त 2026 को सुबह 11:30 बजे दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में "नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट E20" आयोजित करने की घोषणा की है. इसके अलावा दिल्ली की कई टैक्सी और ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने भी 4 अगस्त को संसद तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। 

Related Posts

TATA की कनेक्टेड कारों पर साइबर अटैक का खतरा, iRA 2.0 और iRA.ev में मिली खामी

 नई दिल्ली टाटा कार्स को लेकर इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) एक वॉर्निंग जारी की है. ये वॉर्निंग टाटा मोटर्स की गाड़ियों से जुड़ी हुई है, जो कंपनी के…

रिटायरमेंट से पहले अग्निवीरों को मिला एक्सटेंशन, 75% जवानों को सेवा का अतिरिक्त मौका

नई दिल्ली अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव किया गया है। चार साल की सेवा पूरी करने के बाद बाहर होने वाले 75 प्रतिशत अग्निवीरों को अब दो साल का अतिरिक्त…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed

झोटा हत्याकांड के आरोपी की दुकान तोड़ने पर पुलिस का एक्शन, 1200 लोगों पर FIR दर्ज

झोटा हत्याकांड के आरोपी की दुकान तोड़ने पर पुलिस का एक्शन, 1200 लोगों पर FIR दर्ज

पंजाब में ED की बड़ी कार्रवाई, विधायक अमनदीप से जुड़े 7 ठिकानों पर छापेमारी

पंजाब में ED की बड़ी कार्रवाई, विधायक अमनदीप से जुड़े 7 ठिकानों पर छापेमारी

दलजीत के अंतिम संस्कार का रास्ता साफ, कल मोगा में दी जाएगी अंतिम विदाई

दलजीत के अंतिम संस्कार का रास्ता साफ, कल मोगा में दी जाएगी अंतिम विदाई

पंजाब में ‘जख्म 84’ पर सियासी जंग, राहुल गांधी और BJP आमने-सामने

पंजाब में ‘जख्म 84’ पर सियासी जंग, राहुल गांधी और BJP आमने-सामने

पाकिस्तान-दुबई से जुड़े हथियार तस्करी नेटवर्क का खुलासा, 11 गिरफ्तार, भारी मात्रा में हथियार बरामद

पाकिस्तान-दुबई से जुड़े हथियार तस्करी नेटवर्क का खुलासा, 11 गिरफ्तार, भारी मात्रा में हथियार बरामद

CM मान ने युवाओं को दी नौकरी की सौगात, बोले- जनता के साथ अच्छा व्यवहार रखें

CM मान ने युवाओं को दी नौकरी की सौगात, बोले- जनता के साथ अच्छा व्यवहार रखें

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581

Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (1) in /home/hmueqlhb/thedaily247.com/wp-includes/functions.php on line 5581