Pentagon Emissions: डॉक्युमेंट्री में दावा, अमेरिकी सेना का कार्बन उत्सर्जन 140 देशों से भी अधिक

वाशिंगटन

 वैश्विक पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को लेकर अक्सर बड़े-बड़े देशों और औद्योगिक घरानों को कटघरे में खड़ा किया जाता है. लेकिन दुनिया में एक ऐसा महा-प्रदूषक है, जिसे अंतरराष्ट्रीय जलवायु संधियों में ‘फ्री पास’ यानी पूरी छूट मिली हुई है. प्रसिद्ध खोजी पत्रकार एबी मार्टिन (Abby Martin) की नयी खोजी डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘अर्थ्स ग्रेटेस्ट एनिमी’ (Earth’s Greatest Enemy) ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है. 120 मिनट की फिल्म ने पुख्ता सबूतों और अविश्वसनीय आंकड़ों के साथ साबित किया है कि अमेरिकी सेना (US Military) और उसका रक्षा मुख्यालय पेंटागन वैश्विक जलवायु संकट को बढ़ाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा संस्थागत प्रदूषक है। 

140 देशों के कुल उत्सर्जन से भी अधिक कार्बन फैलाता है पेंटागन
लॉरा पोलक (Laura Pollock) की ओर से की गयी फिल्म की समीक्षा के अनुसार, इस डॉक्युमेंट्री में अमेरिकी रक्षा विभाग और उसकी नौसेना एवं वायुसेना के प्रदूषण फैलाने संबंधी जो आंकड़े पेश किये गये हैं, वे चौंकाने वाले हैं। 

    विमानों का ईंधन ईकोसाइड : फिल्म में पत्रकार एबी मार्टिन बताती हैं कि औसत अमेरिकी नागरिक अपने पूरे जीवनकाल में (लगभग 40 वर्ष) जितना ईंधन का इस्तेमाल करता है, बोइंग पेगासस (Boeing Pegasus) जैसे अमेरिकी सैन्य टैंकर की सिर्फ एक उड़ान में उतना ईंधन खत्म हो जाता है. अमेरिका ऐसे 600 से अधिक उड़ान टैंकर हवा में उड़ाता है। 

    140 देशों से भी बड़ा प्रदूषक पेंटागन : अमेरिकी सेना का कुल कार्बन उत्सर्जन दुनिया के 140 देशों के संयुक्त उत्सर्जन से भी कहीं अधिक है. इसके बावजूद वैश्विक जलवायु सम्मेलनों (जैसे COP26) में सैन्य उत्सर्जन के इन आंकड़ों को छिपा लिया जाता है। 

    लाखों समुद्री जीवों का कत्लेआम : एक डरावना आंकड़ा यह भी है कि अमेरिकी नौसेना (US Navy) को अपने 5 साल के युद्धाभ्यास और परीक्षणों के दौरान 2.6 मिलियन (26 लाख) से अधिक समुद्री स्तनधारी जीवों (Marine Mammals) को नुकसान पहुंचाने या उन्हें मार डालने की कानूनी छूट मिली हुई है. इतना ही नहीं, इराक और अफगानिस्तान में युद्ध के दौरान छोड़े गये 2.5 लाख से अधिक गोले और प्रदूषण ने वहां की भूमि को स्थायी रूप से बंजर बना दिया है। 

जहां-जहां अमेरिकी बेस, वहां-वहां ‘जहरीली मौत’
खोजी पत्रकार एबी मार्टिन और उनके पति माइक प्रिसनर ने इस सच्चाई को उजागर करने के लिए पूरी दुनिया का दौरा किया. वे ग्लासगो (स्कॉटलैंड) से लेकर अलास्का, हवाई और जापान के ओकिनावा द्वीप तक गये. कैंप लेज्यून और कोरल रीफ को कैसे नुकसान पहुंचा है, यहां जानें। 
डॉक्युमेंट्री का संदेश : एक साथ कई मोर्चे पर संघर्ष कर रही है हमारी प्रकृति। 

Earths Greatest Enemy: उत्तरी कैरोलिना के कैंप लेज्यून का सच

उत्तरी कैरोलिना के ‘कैंप लेज्यून’ में अमेरिकी सेना के ही घरेलू बेस से हुए ईंधन रिसाव, जहरीले कचरे और औद्योगिक अपशिष्टों के कारण स्थानीय अमेरिकी बस्तियों के पानी में जहर घुल गया. फिल्म में उन माताओं का रुदन दिखाया गया है, जिन्होंने इस दूषित पानी के कारण अपने बच्चों को खो दिया। 

हवाई और ओकिनावा में कोरल रीफ का विनाश
हवाई और ओकिनावा (जापान) में अमेरिकी सैन्य ठिकानों के निर्माण के लिए पहाड़ों को डायनामाइट से उड़ाया जा रहा है. उसके मलबे को समुद्र में फेंककर दुर्लभ कोरल रीफ (मूंगा चट्टानों) को हमेशा के लिए दफन किया जा रहा है. जब पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कायक (नावों) के जरिये समुद्र में इसका विरोध किया, तो अमेरिकी स्पीडबोट्स ने उनकी नावें पलट दीं और उन्हें हिरासत में ले लिया। 

अमेरिकी नेताओं का पाखंड
डॉक्युमेंट्री में अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था के पाखंड पर भी तीखा प्रहार किया गया है. फिल्म में दिखाया गया है कि एक तरफ तत्कालीन अमेरिकी हाउस स्पीकर नैंसी पेलोसी और प्रगतिशील प्रतिनिधि अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज जैसी नेता लाइव स्ट्रीम पर कॉप-26 (COP26) के लक्ष्यों को ‘ऐतिहासिक’ बताती हैं, लेकिन जब उनसे सवाल पूछा जाता है कि नेट-जीरो (Net-Zero) के दावों के बीच पेंटागन का बजट और सैन्य खर्च लगातार क्यों बढ़ाया जा रहा है, तो उनके पास कोई जवाब नहीं होता। 

अमेरिकी पाखंड का सबसे अचूक और प्रामाणिक दस्तावेज
यह फिल्म सीधे तौर पर व्हाइट हाउस और पेंटागन को कटघरे में खड़ा करती है, जो आम जनता को पर्यावरण बचाने के लिए ‘प्लास्टिक स्ट्रॉ’ छोड़ने और ‘इलेक्ट्रिक कारें’ खरीदने का उपदेश देते हैं, लेकिन खुद खरबों गैलन कच्चा तेल फूंकने वाली अपनी युद्ध मशीनरी के प्रदूषण को आधिकारिक रिकॉर्ड की किताबों से ही गायब रखते हैं. यह डॉक्युमेंट्री पर्यावरण संरक्षण के नाम पर पूंजीवादी ताकतों द्वारा चलाये जा रहे इस सबसे बड़े पाखंड का एक अचूक और प्रामाणिक दस्तावेज है। 

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