उप मुख्यमंत्री अरुण साव बोले – खेलों में समग्र विकास के लिए छत्तीसगढ़ तैयार

रायपुर. 
राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के खेल मंत्रियों का दो दिवसीय चिंतन शिविर आज श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (Sher-i-Kashmir International Conference Centre) में प्रारंभ हुआ। इस राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण आयोजन में केंद्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे, विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खेल मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ शामिल हो रहे हैं। 

छत्तीसगढ़ की ओर से उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार इस चिंतन शिविर में भागीदारी कर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री साव ने इस मौके पर कहा कि छत्तीसगढ़ खेलों के क्षेत्र में समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। छत्तीसगढ़ पूरे देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ेगा। 

साव ने बताया कि आज शिविर के पहले दिन केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के साथ देश में खेलों को नई दिशा देने पर मंथन किया गया। यह पहल न केवल नीतियों को मजबूत करेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को आगे लाने का मार्ग भी प्रशस्त करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न के अनुरूप 2047 तक भारत को खेल महाशक्ति बनाने केंद्र सरकार और राज्य सरकारें एकजुट होकर कार्य कर रही हैं। छत्तीसगढ़ के हर गांव और हर शहर से नए खिलाड़ी उभरें और देश-विदेश के खेल मंचों पर अपना परचम लहराएं, यह हमारा लक्ष्य है।

26 अप्रैल तक चलने वाला यह शिविर देश में खेलों के समग्र विकास, नीति सुधार, वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लक्ष्य को हासिल करने और भारत को खेल शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय द्वारा लगातार दूसरे वर्ष इस चिंतन शिविर का आयोजन किया गया है। 

चिंतन शिविर के पहले दिन के प्रमुख सत्रों में ‘मेडल स्ट्रेटजी – खेलो इंडिया’ पर गहन मंथन किया गया। विभिन्न राज्यों से प्राप्त सुझावों के आधार पर खेल प्रशिक्षकों के पोटेंशियल को विकसित करने पर सर्वसम्मति बनी। साथ ही वर्ष 2048 तक भारत को ओलंपिक पदक तालिका में शीर्ष 5 देशों में शामिल करने के रोडमैप पर व्यापक चर्चा हुई। इसमें स्पोर्ट्स साइंस के विस्तार एवं उसके प्रभावी उपयोग को खेल विकास का महत्वपूर्ण आधार माना गया। खेल मंत्रालय द्वारा इस पर निरंतर कार्य किया जा रहा है।

द्वितीय सत्र ‘खेलो भारत नीति – केंद्र एवं राज्य समन्वय को सुदृढ़ करना’ विषय पर आयोजित हुआ। इस सत्र में विभिन्न राज्यों के बेस्ट प्रेक्टिसेस को साझा किया गया। खिलाड़ियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि के प्रभावी उपयोग, प्रतिभा पहचान (Talent Identification) तथा खेल अकादमियों के मानकीकरण पर विशेष बल दिया गया। सत्र के दौरान विद्यालय स्तर पर खेलों को सशक्त बनाने के लिए शारीरिक शिक्षा को अनिवार्य रूप से जोड़ने, खेल शिक्षकों की भर्ती एवं उन्हें उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करने पर सहमति बनी। साथ ही खिलाड़ियों का समग्र डॉटा-बेस तैयार करने पर राज्यों एवं केंद्र द्वारा संयुक्त रूप से कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि प्रतिभाओं की सही पहचान सुनिश्चित हो सके।

इस सत्र में यह भी रेखांकित किया गया कि खिलाड़ियों को केवल नौकरी प्राप्त करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि देश के लिए पदक जीतने के लक्ष्य के साथ समर्पित होकर खेलना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को अधिक अवसर, सम्मान एवं आर्थिक लाभ प्राप्त होते हैं। साथ ही इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि खिलाड़ियों के लिए ऐसी व्यवस्था (मॉडल) विकसित की जाए, जिससे वे नौकरी प्राप्त करने के बाद भी खेल जारी रखें और अपने खेल करियर को बीच में न छोड़ें।

ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति विकसित करने, जमीनी स्तर पर सुविधाओं के विस्तार तथा बच्चों को अधिक समय खेल गतिविधियों में देने पर भी विशेष जोर दिया गया। साथ ही खेल अधोसंरचना के निर्माण में विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई।

तीसरे सत्र में डोपिंग एवं खेल नैतिकता पर गंभीर चर्चा हुई। खेलों में प्रतिबंधित  दवाईयों के उपयोग पर कड़े नियम बनाने तथा डोपिंग को अपराध की श्रेणी में लाने के विषय पर केंद्र सरकार एवं खेल मंत्रालय की सख्त नीति को दोहराया गया। इस सत्र में ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा ने खेलों में सुरक्षित एवं पेशेवर वातावरण सुनिश्चित करने तथा खिलाड़ियों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से सेफ गॉर्डिंग ऑफिसर्स (Safe Guarding Officers) की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया।

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